Sunday, 4 December 2016

भारत के इस शहर में जलाए नहीं, दफनाए जाते हैं हिंदुओं के शव, जानिए क्यों शुरू हुई ये प्रथा

By: Secret On: 06:00
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  • भारत के इस शहर में जलाए नहीं, दफनाए जाते हैं हिंदुओं के शव, जानिए क्यों शुरू हुई ये प्रथा

    Hindu Cemeteries of Kanpur, History in Hindi :  भारत के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर में एक अनोखी परम्परा का पालन पिछले 86 वर्षों से किया जा रहा है। सुनने में थोड़ा अजीब लगता है, लेकिन यहां पिछले 86 सालों से हिंदुओं को कब्रिस्तान में दफनाया जा रहा है। जहाँ 86 साल पहले कानपुर में हिन्दुओं का एक कब्रिस्तान था वही अब ये बढ़ कर 7 हो चुके है। आखिर क्यों यहां खोदी जाती हैं हिंदुओं की कब्रें, आइए जानते है इसके पिछे की कहानी –

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    कानपुर में हिन्दुओं का प्रथम कब्रिस्तान 1930 में बना। इसकी शुरुआत अंग्रेजों ने की थी। वर्तमान में यह कब्रिस्तान कानपुर के कोकाकोला चौराहा रेलवे क्रॉसिंग के बगल में है और अच्युतानंद महाराज कब्रिस्तान के नाम से जाना जाता है।
    फतेहपुर जनपद के सौरिख गांव के रहने वाले स्वामी अच्युतानंद दलित वर्ग के बड़े रहनुमा थे। कानपुर प्रवास के दौरान साल 1930 में स्वामी जी एक दलित वर्ग के बच्चे के अंतिम संस्कार में शामिल होने भैरव घाट गए थे। वहां अंतिम संस्कार के समय पण्डे बच्चे के परिवार की पहुंच से बड़ी दक्षिणा की मांग रहे थे। इस बात को लेकर अच्युतानंद की पण्डों से बहस भी हुई। इस पर पण्डों ने उस बच्चे का अंतिम संस्कार करने से मना कर दिया। पण्डों की बदसलूकी से नाराज अच्युतानंद महाराज ने उस दलित बच्चे का अंतिम संस्कार खुद विधि-विधान के साथ पूरा किया। उन्होंने बच्चे की बॉडी को गंगा में प्रवाहित कर दिया।

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    स्वामी जी यहीं नहीं थमे। उन्होंने दलित वर्ग के बच्चों के लिए शहर में कब्रिस्तान बनाने की ठान ली। इसके लिए उन्हें जमीन की जरूरत थी। उन्होंने अपनी बात अंग्रेज अफसरों के सामने रखी। अंग्रेजों ने बिना किसी हिचक के कब्रगाह के लिए जमीन दे दी। तभी से इस कब्रिस्तान में हिंदुओं को दफनाया जा रहा है। 1932 में अच्युतानंद जी की मृत्यु के बाद उनके पार्थिव शारीर को भी इसी कब्रिस्तान में दफनाया गया।
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    इस हिंदू कब्रिस्तान की प्रथा दलितों के बच्चों की कब्रों से शुरू हुई थी। अब यहां हिंदुओं की किसी भी जाति के शव दफनाए जा सकते हैं।  बीते सालों में यह कब्रिस्तान सिर्फ बच्चों तक सीमित नहीं है। अब यहां हर उम्र और जाति के शवों को भूमिप्रवाहित किया जाता है।

    Yahan Kabron mein dafan hai Hindu
    1930 से ही इस कब्रिस्तान की देखभाल पीर मोहम्मद शाह का परिवार कर रहा है। पीर मोहम्मद शाह ने बताया, हम यहीं पैदा हुए। आज मेरी उम्र करीब 52 साल है। मैं 12 साल की उम्र से पिता जी के साथ यह काम कर रहा हूं। अब इस कब्रिस्तान की देखरख मैं ही कर रहा हूं। मेरा काम यहां आने वाली डेड बॉडीज को दफनाना और कब्रों की देखरेख करना है।  पीर मोहम्मद के मुताबिक यहां सिर्फ हिंदुओं के शव दफनाने के लिए आते हैं, मुसलमानों के नहीं। दिनभर में 2-5 बॉडी आ जाती हैं।  हमें आजतक यहां कोई दिक्कत नहीं हुई। कभी किसी ने यह नहीं कहा कि तुम मुसलमान हो, यहां क्यों हो। हमें भी कभी अजीब नहीं लगा कि हिन्दुओं के कब्रों के लिए क्यों काम कर रहे हैं।
    कुछ अन्य फैक्ट्स 

    • अंतिम संस्कार के लिए यहां पंडित नहीं आते। मुसलमान ही करवाते हैं अंतिम संस्कार।
    • अगर किसी कब्र पर 2-3 साल तक कोई देखरेख के लिए नहीं आता, तो उस कब्र को खोद दिया जाता है, नई कब्र बनाने के लिए।
    • पहली मिटटी मृतक के घरवाले देते है। उसके बाद कब्र खोदने वाले डेड बॉडी को दफ़न करते है।
    • दफनाने के बाद डेथ सर्टिफिकेट बनवाने के लिए रसीद दी जाती है। उसे नगर निगम में दिखाकर सर्टिफिकेट बनवा सकते हैं।
    • यहां अंतिम संस्कार के समय कोई पूजापाठ की विधि नहीं होती। बस अगरबत्ती जलाई जाती है।
    • कानपुर में अब हिंदुओं के 7 कब्रिस्तान बन गए हैं। यहां दफनाने में कुल 500 रुपए लगते हैं।
    • पुरानी कब्र से निकली अस्थियों को गढ्ढा खोदकर गाड़ दिया जाता है।
    • 1931 में पहली बार यहां अशोक नगर इलाके की 15 वर्षीय लड़की को दफनाया गया था। 1956 में भिखारीदास और उनके पुत्र वंशीदास को यहां दफनाया गया।

    Saturday, 3 December 2016

    Myths & Facts of Snakes : सांपो से जुड़े 10 भ्रम और अंधविश्वास

    By: Secret On: 16:30
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  • Myths & Facts of Snakes : सांपो से जुड़े 10 भ्रम और अंधविश्वास

    Myths & Facts of Snakes in Hindi : हमारे समाज में सांपो को लेकर कई तरह के अन्धविश्वास और भ्रम फैले हुए है। हमारा साहित्य, हमारी फिल्में और हमरी अंध धार्मिकता इनको कम करने की बजाय बढ़ाने का काम करती है। आज हम इस लेख में सांपो से जुड़ी हुई मान्याताओं और अन्धविश्वास को वैज्ञानिक द्रष्टिकोण से परखेंगे।
    1. सांप दूध पीते है !
    सांपो से जुडी हुई हमारी प्रथम मान्यता यह है कि सांप दूध पीते है। यहाँ तक की हम  नाग पंचमी और अनेक अवसरो पर उन्हे दूध पिलाते भी है।  तो क्या यह वैज्ञानिक द्रष्टिकोण से सही है ? इसका जवाब है, नहि। जीव विज्ञान के अनुसार सांप पूरी तरह से मांसाहारी जीव है, ये मेंढक, चूहा, पक्षियों के अंडे व अन्य छोटे-छोटे जीवों को खाकर अपना पेट भरते हैं। दूध इनका प्राकृति आहार नहीं है। सपेरों को जब भी सांप को दूध पिलाना होता है तो वो उन्हे भूखा प्यासा रखते है।  भूखे प्यासे सांप के सामने जब दूध लाया जाता है तो वो इसे पी लेता है लेकिन यह कभी कभी सांप कि मौत का कारण भी  बन जाता है क्योकि कई बार दूध सांप के फेफड़ों में घुस जाता है जिससे उसे निमोनिया हो जाता है।
    Myths & Facts of Snakes in Hindi
    2.  सांप अपने साथी कि मौत का बदला लेते है !
    हमारे समाज में ऐसी मान्यता है कि यदि कोई मनुष्य किसी सांप को मार दे तो मरे हुए सांप की आंखों में मारने वाली की तस्वीर उतर आती है, जिसे पहचान कर सांप का साथी उसका पीछा करता है और उसको काटकर वह अपने साथी की हत्या का बदला लेता है। यह सांपो से जुड़ा एक ऐसा अंधविश्वास है जिसका हमारे यहाँ कहनियों और फिल्मो मे जमकर इस्तमाल हुआ है। लेकिन यदि हम बात वैज्ञानिक द्रष्टिकोण से करे तो इसमें तनिक मात्र भी सच्चाई नहि है। सांप अल्पबुद्धि वाले जीव होते हैं। इनका मस्तिष्क इतना विकसित नहीं होता कि ये किसी घटनाक्रम को याद रख सकें और बदला लें। जीव विज्ञान के अनुसार जब कोई सांप मरता है तो वह अपने गुदा द्वार से एक खास तरह की गंध छोड़ता है जो उस प्रजाति के अन्य सांपों को आकर्षित करती है। इस गंध को सूंघकर अन्य सांप मरे हुए सांप के पास आते हैं, जिन्हें देखकर ये समझ लिया जाता है कि अन्य सांप अपने मरे हुए सांप की हत्या का बदला लेने आए हैं।
    3. सांप बीन कि धुन सुनकर नाचते है !
    खेल-तमाशा दिखाने वाले कुछ लोग सांप को अपनी बीन की धुन पर नचाने का दावा करते हैं जबकि ये पूरी तरह से अंधविश्वास है क्योंकि सांप के तो कान ही नहीं होते। दरअसल ये मामला सांपों की देखने और सुनने की शक्तियों और क्षमताओं से जुड़ा है। सांप हवा में मौजूद ध्वनि तरंगों पर प्रतिक्रिया नहीं दर्शाते पर धरती की सतह से निकले कंपनों को वे अपने निचले जबड़े में मौजूद एक खास हड्डी के जरिए ग्रहण कर लेते हैं।सांपों की नजर ऐसी है कि वह केवल हिलती-डुलती वस्तुओं को देखने में अधिक सक्षम हैं बजाए स्थिर वस्तुओं के। सपेरे की बीन को इधर-उधर लहराता देखकर नाग उस पर नजर रखता है और उसके अनुसार ही अपने शरीर को लहराता है और लोग समझते हैं कि सांप बीन की धुन पर नाच रहा है।
    Myths & Facts of Snakes in Hindi
    4. सांप मणिधारी होते है !
    सांपो से जुडी एक अन्य मान्यता यह है कि कई सांप मणिधारी होते है यानी इनके सिर के ऊपर एक चमकदार, मुल्यवान और चमत्कारी मणि होती है। ये मणि यदि किसी इंसान को मिल जाये तो उसकी  किसमत चमक जाती है। जीव विज्ञान के अनुसार यह मान्यता भी पूरी तरह से अंधविश्वास है क्योंकि दुनिया में अभी तक 3000 से भी ज्यादा प्रजातियों के करोडो सांप पकडे जा चुके है लेकिन किसी के पास भी इस प्रकार कि कोइ मणि नही मिली है। तमिलनाडु के इरुला जनजाति के लोग जो सांप को पकडऩे में माहिर होते हैं वे भी मणिधारी सांप के होने से इंकार करते हैं।
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    5. कुछ सांपो के दोनो सिरो पर मुंह होते है !
    कभी कभी जेनेटिक चेंज कि वजह से ऐसे सांप तो पैदा हो जाते है जिनके एक सिर कि जगह दो सिर होते है ऐसा इन्सान सहित इस धरती के किसी भी प्राणी के साथ हो सकता है।  लेकिन ऐसा कोई भी सांप नही होता है जिसके दोनो सिरो पर मुंह होते है।  होता यह है की कुछ सांपों की पूंछ नुकीली न होकर मोटी और ठूंठ जैसी दिखाई देती है। चालाक सपेरे ऐसे सांपों की पूंछ पर चमकीले पत्थर लगा देते हैं जो आंखों की तरह दिखाई देते हैं और देखने वाले को यह लगता है कि इस सांप को दोनों सिरों पर दो मुंह हैं।

    Myths & Facts of Snakes in Hindi
    इस साँप कि पुंछ सिर के जैसी होने के कारण दोनो सिरो पर मूंह होने का आभास हो रहा है।

    Myths & Facts of Snakes in Hindi
    दो सिर वाला सांप 
    6. कुछ सांपो की मुंछे होती है !
    सांपो कि एक प्रजाति “हॉर्नड वाईपर” के सिंग तो  होते है पर सांप कि किसी भी प्रजाति के मुंछे नही होती है क्योकि सांप सरीसृप (रेप्टाइल) वर्ग के जीव हैं, इनके शरीर पर अपने जीवन की किसी भी अवस्था में बाल नहीं उगते। होता यह है की सांप को कोई खास स्वरूप देने पर अच्छी कमाई हो सकती है इसी लालच में सपेरे घोड़े की पूंछ के बाल को बड़ी ही सफाई से सांप के ऊपरी जबड़े में पिरोकर सिल देता है। इसके अलावा जब कोई सांप अपनी केंचुली उतारता है तो कभी-कभी केंचुली का कुछ हिस्सा उसके मुंह के आस-पास चिपका रह जाता है। ऐसे में उस सांप को देखकर मुंछों का भ्रम हो सकता है।
    7 उड़ने वाले सांप होते है !
    वैसे तो सांपो की किसी भी प्रजाति मे उडने का गुण नही होता है। लेकिन भारत और दक्षिण पूर्वी एशिया के वर्षा वनो (रेन फारेस्ट) में एक साँप पाया जाता है जिसका नाम ही फ्लाइंग स्नेक है। हालांकि इनमे भी इनके नाम के अनुरुप उड़ने का गुण नहि होता है। लेकिन इनमे अन्य सांपो से अलग एक विषेश क्वालिटी पाइ जाती है। ये फ्लाइंग स्नेक अपना अधिकांश समय वर्षा वनो के  ऊंचे ऊंचे पेडो पर बिताते है। इन सांपो को जब एक पेड़ से दूसरे पेड़ पर जाना होता है तो यह अपने शरीर को सिकोड़कर छलांग लगा देते है। जब ये सांप उछलकर एक पेड़ से दूसरे पेड़ पर जाते हैं तो ऐसी प्रतीत होता है कि जैसे ये उड़ रहे हों। हालांकि इस तरह से यह 100 मीटर तक की दुरी तय कर लेते है।
    8. कुछ सांप इच्छाधारी होते हैं !
    एक और बहुप्रचलित मान्यता जिसका कि हुमारे साहित्य और फिल्मोँ मे जमकर प्रयोग हुआ है वो यह है की कुछ सांप इच्छाधारी होते हैं यानी वे अपनी इच्छा के अनुसार अपना रूप बदल लेते हैं और कभी-कभी ये मनुष्यों का रूप भी धारण कर लेते हैं, ये भी एक मान्यता है जो कि पूरी तरह से गलत है। जीव विज्ञान के अनुसार इच्छाधारी सांप सिर्फ मनुष्यों का अंधविश्वास और कोरी कल्पना है, इससे ज्यादा और कुछ नहीं।
    9. सांपो कि आंखो मे सम्मोहन शक्ति होती है !
    कुछ लोग मानते हैं कि सांप की आंखों में किसी को भी सम्मोहित करने की शक्ति होती है यानी सांप जिसकी भी आंखों में देख लेता है वह मनुष्य या अन्य कोई प्राणी उस सांप के आदेश का पालन करता है। यह भी अंधविश्वास और कोरी कल्पना के अलावा कुछ नहीं है।
    10. सभी सांप अंडे देते है !
    ऐसा नही है। धरती पर पाए जाने वाले सांपो मे से 70 % सांप अंडे देते है पर बाकि की 30 % प्रजातिया , इंसानो कि तरह सिधे बच्चे पैदा करते है।



    Hindi Facts of Flying Snakes : क्या है उड़ने वाले साँपों का रहस्य ?

    By: Secret On: 07:00
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  • Hindi Facts of Flying Snakes : क्या है उड़ने वाले साँपों का रहस्य ?

    Flying Snake Myth, Reality & Facts in Hindi : सभी जीवों में गाय के बाद सांप ही एक ऐसा जीव है जिसका हिन्दू धर्म से गहरा नाता है। ये भगवान शिव के प्रिय है और हम भी इन्हें भगवान तुल्य मानकर नागपंचमी पर इनकी पूजा करते है। इसके अलावा सांपो से जुड़े कई ऐसे रहस्यमयी मिथक भी है जो की हमें रोमांचित करते है जैसे की क्या मणिधारी सांप होते है ? या फिर क्या इच्छाधारी नाग होते है ? ऐसी ही सांपो से जुडी एक और बात है जो सदियों से हमारे कौतुहल का विषय रही है, वो ये की क्या उड़ने वाले सांप होते है और यदि होते है तो वो बिना पंखो के उड़ते कैसे है?
    Flying Snake Myth, Reality & Facts in Hindi
    चीन समय से ही ऐसे सांपो को देखे जाने के बारे में कहा जाता रहा है लेकिन इनका कोई प्रमाण नहीं था। लेकिन जब वैज्ञानिक घने वर्षा वनों में पहुंचे तो उन्होंने पाया की उड़ने वाले साप महज़ कल्पना नहीं है बल्कि इस धरती पर उनका अस्तित्व है।  वैज्ञानिको ने प्रमाण के तौर पर उनकी फोटो खींची और वीडियो भी बनाए। वैज्ञानिको ने पाया की ऐसे सांपो का अस्तित्व तो है पर पुरे विशव में यह केवल दक्षिण एशिया के वर्षा वनों में ही पाए जाते है।
    Udane wale sannpo ka rahasya
    उड़ने में सक्षम यह सांप क्रिसोपेलिया जाती से सम्बंधित है हालांकि इस सांप की मात्र पांच प्रजातियों में ही उड़ने की क़ाबलियत होती है। यह सांप 3 से 4 फ़ीट लम्बे होते है और यह वर्षा ऊंचे ऊंचे पेड़ों पर रहते है। ये सांप एक पेड़ से दूसरे पेड़ पर जाने के लिए उड़ान भरते है। इस तरह से यह अधिकतम 350 फ़ीट की दुरी तक जा पाते है। हालाँकि कुछ वैज्ञानिक उनकी इस क्रिया को उड़ना न मानकर एक पेड़ से दूसरे पेड़ पर छलांग लगाना मानते है। लेकिन अधिकाँश वैज्ञानिको का कहना है की इसे छलांग मानना गलत है क्योंकि 350 फ़ीट बहुत ज्यादा दुरी होती है। बन्दर जो की छलांग लगाने के सबसे अनुकूल होते है वो भी कुछ फ़ीट तक ही छलांग लगा पाते है।
    बरहाल हमें इसे उड़ान माने या छलांग पर वैज्ञानिको को यह बात सबसे ज्यादा परेशान और हैरान कर रही थी की पंखों जैसी कोई संरचना नहीं होने के बावजूद सांप इस क्रिया को कैसे पूरा करते है। इस बात पर कई दशको से शोध चल रहे थे पर कोई सार्थक निष्कर्ष पर वैज्ञानिक नहीं पहुँच पाये थे।  पर इस साल के शुरुआत में इस पर हुई एक महत्तवपूर्ण रिसर्च का प्रकाशन ‘जर्नल ऑफ़ एक्सपेरिमेंटल बायोलॉजी’ में हुआ जिससे इस रहस्य पर से पर्दा उठा।
    वैज्ञानिकों यह तो पहले से जानते थे की जो सांप उड़ना जानते हैं वे उड़ने के लिए अपने आकार को बदल पाने में माहिर होते हैं। लेकिन वो ये करते कैसे है इस पर पहली बार विस्तृत शोध हुआ है। इस शोध के विशेषज्ञ अमेरिका स्थित वर्जीनिया टेक यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर जैक सोचा ने इन उड़ने वाले सांपों के बारे में बताया कि ये सांप एक पेड़ से दूसरे पेड़ तक छलांग लगाते समय अपने सिर से पूंछ की तरफ तक अपने शरीर को चपटा कर लेता है। इस आकार में आकर यह अपनी पसलियों को सिर की दिशा में आगे की ओर व रीढ़ की दिशा में ऊपर की ओर घुमा पाता है। इस अवस्था में इसकी चौड़ाई दोगुनी हो जाती है और क्रॉस सेक्शन कर यह एक विशेष आकार पा लेता है जिसके कारण ही इसका उड़ना संभव हो पाता है। वैज्ञानिको के अनुसार इस खोज का उपयोग एक ऐसा रोबोट या मशीन बनाने में किया जा सकता है जो उड़ सकती हो।

    Friday, 2 December 2016

    विचित्र किन्तु सत्य – अंगा आदिवासी जो लाशों को ममी बनाकर रखते है सुरक्षीत तथा बडे उत्सवो में शामील करते है पूर्वजो की ममी क़ो

    By: Secret On: 17:30
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  • विचित्र किन्तु सत्य – अंगा आदिवासी जो लाशों को ममी बनाकर रखते है सुरक्षीत तथा बडे उत्सवो में शामील करते है पूर्वजो की ममी क़ो:

    Smoked Mummies Of Papua New Guinea : इंसान की मृत्यु होने के पशचात उसके शव का रीती रिवाजो क़े साथ अँतिम संस्कार कीया जाता हैं। लेकिन कई समुदायों में अंतिम संस्कार की किर्या बडी विचित्र होती हैं जैसे की तिब्बत की स्काय बुरिअल जिसके बारे में हमने आपको अपनी एक पिछली पोस्ट में बताया था। ऐसी ही एक अनोखी अंतिम संस्कार की किर्या पापुआ न्यू गिनी के अंगा जनजाति के लोग अपनाते है जो  कि पहले लाश क़ो हल्क़ा सा जलाते है और फिर उस अध जलीं लाश को ममी बनाकार पहाडों पऱ हमेंशा के लीए सुरक्षीत रख़ देते है।

    Smoked Mummies Of Papua New Guinea : Story& History in Hindi
    पापुआ न्यू गिनी के मोरोबे में अंगा जनजाति अपनी अनोखी ममीकरण तकनीक के लिए चर्चित है। यहां शवों को सुरक्षित रखने के लिए पहले उन्हें सुलगाया जाता है, फिर उन्हें मकबरों या कब्रों में दफनाने की जगह पहाड़ियों पर रख दिया जाता है, ताकि वे पहाड़ियों पर से गांव को देखते रहें। शव लाल रंग में रंगे होते हैं। पहाड़ियों पर बांस के सहारे रखी ये लाशें देखने में बड़ी ही विचित्र लगती हैं, लेकिन अंगा जनजाति के लोगों के लिए ये मृतकों को सम्मान देने के सबसे बेहतरीन तरीकों में से एक है।
    Smoked Mummies Of Papua New Guinea  Information in Hindi
    शवों के संलेपन का काम बड़ी ही सावधानी से किसी अनुभवी व्यक्ति द्वारा करवाया जाता है। सबसे पहले घुटने, कंधे और पैरों को सही आकार देने के लिए पूरी चर्बी हटाई जाती है। फिर बांस के ढांचे में उन्हें रखा जाता है। इस दौरान शरीर से निकले पदार्थों को मृतक के परिजनों और रिश्तेदारों के बालों और त्वचा पर लगाया जाता है। ऐसा माना जाता है कि इससे मृतक की ताकत जीवित व्यक्ति में आ जाती है।
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    Smoked Mummies Of Papua New Guinea  Information in Hindi
    इसके बाद अगले चरण में मांस की सड़न को रोकने के लिए शव से आंखें, मुंह और गुदा का हिस्सा निकाला लिया जाता है। इसके बाद माना जाता है कि ममी (लाश के संरक्षण) को सदियों तक संरक्षित रखा जा सकता है। जीभ, हथेली से लेकर तमाम ऐसे हिस्सों को निकाल लिया जाता है, जिनसे सड़न पैदा होने का डर हो। इसके बाद शव के बाकी बचे ढांचे को आग में सुलगाया जाता है।
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    आग में सुलगाने के बाद ममी पर लाल रंग का लेप लगाया जाता है, जिसमें डाला गया प्राकृतिक कोकुन शव का सदियों तक संरक्षण करता है। इस पूरी प्रक्रिया के बाद जाकर ममी तैयार होती है। किसी खास मौके या जश्न के वक्त अंगा आदिवासी अपने परिजनों की ममी को पहाड़ियों पर से उतारते भी हैं, ताकि उन्हें जश्न का हिस्सा बनाया जा सके। मोरोबे में आज दो सौ साल पुरानी ममी भी देखने को मिल जाएंगी।

    भारत का एक मात्र श्मशान घाट जहाँ मुर्दे से भी वसूला जाता है टैक्स, तीन हज़ार साल पुरानी है परंपरा

    By: Secret On: 08:00
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  • भारत का एक मात्र श्मशान घाट जहाँ मुर्दे से भी वसूला जाता है टैक्स, तीन हज़ार साल पुरानी है परंपरा

    Unique tradition of Manikarnika Ghat – Tax for cremation : काशी का मणिकर्णिका श्मशान घाट के बारे में मान्यता  है कि यहां चिता पर लेटने वाले को सीधे मोक्ष मिलता है। दुनिया का ये इकलौता श्मशान जहां चिता की आग कभी ठंडी नहीं होती। जहां लाशों का आना और चिता का जलना कभी नहीं थमता। यहाँ पर एक दिन में करीब 300 शवों का अंतिम संस्कार होता है।

    लेकिन मणिकर्णिका घाट की इसके अलावा भी कई अन्य विशेषताएं है जो भारत के किसी अन्य श्मशान घाट में नहीं है। ऐसी ही दो विशेषताओं के बारे में हम अब तक आप सब को बता चुके है। पहली यह की  मणिकर्णिका घाट पर जलती चिताओं के बीच चिता भस्म से खेली जाती है होली और दूसरी चैत्र नवरात्री अष्टमी को मणिकर्णिका घाट पर,जलती चिताओं के बीच, मोक्ष की आशा में सेक्स वर्कर करती है पूरी रात डांस।
    आज हम आपको इस श्मशान घाट से ही जुडी एक और अन्य परंपरा के बारे में बताएंगे जो भी यहाँ के अलावा कई और नहीं पाई जाती है।

    आप शायद यकीन ना करें पर इस श्मशान घाट पर आने वाले हर मुर्दे को चिता पर लिटाने से पहले बाकायदा टैक्स वसूला जाता है। श्मशान घाट पर लाशों से पैसे वसूलने के पीछे की ये कहानी भी कम दिलचस्प नहीं है।
    Unique tradition of Manikarnika Ghat - Tax for cremation Hindi
    मणिकर्णिका घाट पर अंतिम संस्कार की कीमत चुकाने की परम्परा तकरीबन तीन हजार साल पुरानी है। मान्यता है कि श्मशान के रख रखाव का जिम्मा तभी से डोम जाति के हाथ था। चूंकि डोम जाति के पास तब रोजगार का कोई और साधन नहीं था लिहाजा दाह संस्कर के मौके पर उन्हें दान देने की परम्परा थी। मगर डोम तब दाह संस्कार की यूं मुंह मांगी कीमत नहीं मांगते थे और ना ही पैसा कमाने के गलत तरीके अपनाते थे।

    दरअसल टैक्स वसूलने के मौजूदा दौर की शुरुआत हुई राजा हरीशचंद्र के जमाने से। हरीशचंद्र ने तब एक वचन के तहत अपना राजपाट छोड़ कर डोम परिवार के पूर्वज कल्लू डोम की नौकरी की थी। इसी बीच उनके बेटे की मौत हो गई और बेटे के दाह संस्कार के लिये उन्हें मजबूरन कल्लू डोम की इजाजत मांगनी पड़ी। चूंकि बिना दान दिये तब भी अंतिम संस्कार की इजाज़त नहीं थी लिहाजा राजा हरीशचंद्र को मजबूरन अपनी पत्नी की साड़ी का एक टुकड़ा बतौर दक्षिणा कल्लू डोम को देना पड़ा। बस तभी से शवदाह के बदले टैक्स मांगने की परम्परा मजबूत हो गई। वही परम्परा जिसका बिगड़ा हुआ रूप मणिकर्णिका घाट पर आज भी जारी है.
    चूंकि ये पेशा अब पूरी तरह एक धंधे की शक्ल अख्तियार कर चुका है लिहाजा श्मशान के चप्पे चप्पे पर डोम परिवार ने बाकायदा जासूस फैला रखे हैं। उनकी नजर श्मशान में आने वाली हर शव यात्रा पर रहती है ताकि किस पार्टी से कितना पैसा वसूला जा सकता है इसका ठीक ठीक अंदाजा लगाया जा सके।

    Unique tradition of Manikarnika Ghat - Tax for cremation Hindi
    वैसे डोम परिवार की बात पर यकीन किया जाए तो गुजरे जमाने में उन पर धन-दौलत लुटाने वाले रईसों की कमी नहीं थी। उनका दावा है कि उस दौर में अंतिम संस्कार के एवज में उन्हें राजे रजवाड़े जमीन जायदाद यहां तक की सोना-चांदी तक दिया करते थे। जबकी आज के जमाने में मिलनेवाली तयशुदा रकम के लिये भी उन्हें श्मशान आने वालों से उलझना पड़ता है।

    Thursday, 1 December 2016

    8 अजीबोगरीब भारतीय मान्यताएं- आस्था या अन्धविश्वास?

    By: Secret On: 17:00
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  • 8 अजीबोगरीब भारतीय मान्यताएं- आस्था या अन्धविश्वास?

    8 Weird Indian Traditions in Hindi : भारत त्योहारों, उत्सवों और आस्था का देश है। यहां विभिन्न धर्मों, जातियों और समुदायों के लोग रहते हैं। सबकी अपनी-अपनी मान्यताएं और धार्मिक विश्वास हैं लेकिन कभी-कभी यही आस्था और विश्वास अंधविश्वास में बदल जाता है। आस्था के नाम पर भारत में कई अजीबोगरीब मान्यताएं हैं, जिन्हें सुनकर इंसान के रोंगटे खड़े हो जाएं। आज इस लेख में हम आपको ऐसी ही  8  मान्यताओं के बारे में बता रहे है।
    1. अच्छे भाग्य के लिए छत से फेंकते हैं बच्चों को8 Weird Indian Traditions in Hindi
    महाराष्ट्र के शोलापुर में बाबा उमर दरगाह और कर्नाटक के इंदी स्थित श्री संतेश्वर मंदिर में तो बच्चों को छत से नीचे फेंका जाता है। यहां ऐसी मान्यता है कि बच्चे को ऊंचाई से नीचे फेंकने पर उसका और उसके परिवार का भाग्योदय होता है। इसके साथ ही बच्चा स्वस्थ रहता है। यहां करीब 50 फीट की ऊंचाई से बच्चे को फेंका जाता है, जहां नीचे खड़े लोग उसे चादर से पकड़ते हैं। पिछले 700 सालों से यहां बड़ी संख्या में हिंदू और मुस्लिम अपने बच्चों को लेकर पहुंचते हैं।
    2. बारिश के लिए मेंढकों की शादीAmazing Indian Traditions in Hindi
    हमारे देश के ही कुछ हिस्सों में अच्छी बारिश के लिए मेंढक और मेंढकी की शादी पूरे रीति-रिवाज से कराई जाती है। दरअसल असम और त्रिपुरा के आदिवासी इलाकों में लोग बारिश के लिए मेंढकों की शादी कराते हैं। यहां ऐसी मान्यता है कि मेंढकों की शादी कराने से इंद्र देवता प्रसन्न होते हैं और उस साल भरपूर बारिश होती है।

    3. चर्म रोगों से बचने के लिए फूड बाथ8 Weird Indian Rituals in Hindi
    कर्नाटक के कुछ ग्रामीण इलाकों में स्थित मंदिरों में भोज के बाद बचे हुए खाने पर लोटने की परंपरा है। यहां ऐसी मान्यता है कि ऐसा करने से चर्म रोग और बुरे कर्मों से मुक्ति मिल जाती है। दरअसल मंदिर के बाहर ब्राह्मणों को केले के पत्ते पर भोजन कराया जाता है। बाद में नीची जाति के लोग इस बचे हुए भोजन पर लोटते हैं। इसके बाद ये लोग कुमारधारा नदी में स्नान करते हैं और इस तरह यह परंपरा पूरी होती है।
    4. विकलांगता से बचाने के लिए गले तक जमीन मेंAmazing Indian Rituals in Hindi
    उत्तरी कर्नाटक और आंध्रप्रदेश के ग्रामीण इलाकों में बड़ी अजीब परंपरा है। यहां बच्चों को शारीरिक और मानसिक विकलांगता से बचाने के लिए उन्हें गले तक जमीन में गाड़ दिया जाता है। यह अनुष्ठान सूर्यग्रहण या चंद्रग्रहण शुरू होने के 15 मिनट पहले शुरू होता है। ऐसी मान्यता है कि बच्चों को कुछ घंटे के लिए जमीन में दबाने से उन्हें शारीरिक और मानसिक अपंगता से छुटकारा मिलता है।
    5. चेचक से बचने को छेदते हैं शरीरVichitra Hindustani Parmpara
    मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में हनुमान जयंती के अवसर पर होने वाले पारंपरिक उत्सव में लोग अपने शरीर को छेदते हैं। इसके पीछे मान्यता है कि ऐसा करने से वो माता (चेचक) के प्रकोप से बच जाते हैं। मार्च के आखिरी या अप्रैल की शुरुआत में आने वाली चैत्र पूर्णिमा के दिन लोग ऐसा करते हैं। शरीर को छेदने के बाद ये लोग खुशी से नाचते-गाते हैं।
    6. खौलते दूध से बच्चों को नहलाना26
    उत्तरप्रदेश में वाराणसी और मिर्जापुर के कुछ मंदिरों में ‘कराहा पूजन’ की अनोखी परंपरा है। यहां नवजात बच्चों को खौलते दूध से नहलाया जाता है और यह काम बच्चे का पिता ही करता है। बाद में वह खुद खौलते दूध से नहाता है। यह उत्सव मनाने के दौरान मंत्र और श्लोक भी पढ़े जाते हैं। ऐसी मान्यता है कि ऐसा करने से भगवान प्रसन्न होकर बच्चे को अपना आशीर्वाद देते हैं। नवरात्रि पर भी ‘कराहा पूजन’ किया जाता है, जिसमें पुजारी खौलती खीर से नहाते हैं।
    7. गायों के पैरों से कुचलनाTradition or Superstition In India
    भारत में मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले के कुछ गावों में एक अजीब सी परम्परा का पालन सदियो से किया जा रहा है।  इसमें लोग जमीन पर लेट जाते हैं और उनके ऊपर से दौड़ती हुए गाये गुजारी जाती हैं। इस परंपरा का पालन दीवाली के अगले दिन किया जाता है जो कि एकादशी का पर्व कहलाता है। इस दिन उज्जैन जिले के Bhidawad और आस पास के गाँव के लोग पहले अपनी गायों को रंगों और मेहंदी से अलग-अलग पैटर्न से सजाते हैं। उसके
    बाद लोग अपने गले में माला डालकर रास्ते में लेट जाते है और अंत में दौड़ती हुए गायें उन पर से गुजर जाती हैं।

    8. बच्चियों की कुत्तों से शादीweird Indian Superstition in Hindi
    इसे परम्परा ना कहकर कुरुति कहा जाए तो ज्यादा उपयुक्त होगा। इसमें भूतों का साया और अशुभ ग्रहों का प्रभाव हटाने के नाम पर बच्चियों की शादी कुत्तों से करवाई जाती है।  हालाकि ये शादी सांकेतिक होती हैं, पर होती हैं असली हिन्दू तरीके और रीती रिवाज़ से। लोगों को शादी में आने का निमंत्रण दिया जाता है। पंडित, हलवाई सब बुक किये जाते है। बाकायदा मंडप तैयार होता है और पुरे मन्त्र विधान से शादी सम्पन कराई जाती है। इस शादी में एक असली शादी जितना ही खर्चा बैठता है और उससे भी बड़ी बात कि समाज एवं रिश्तेदार भी इसमें बढ़ चढ़ के  हिस्सा लेते है। शायद आपको एक बार तो यकीन ही नहीं होगा कि ऐसा भी हो सकता है। लेकिन यह बिलकुल सत्य है। हमारे देश में झारखण्ड राज्य के कई इलाकों में परंपरा के नाम पर ऐसी शादियां सदियों से कराई  जा रही है।

    दुनिया की अनसुलझी रहस्यमयी घटनाएं

    By: Secret On: 07:00
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  • दुनिया की अनसुलझी रहस्यमयी घटनाएं


    Duniya ki Ansuljhi Rahasyamayi Ghatnaye: यह संसार रहस्यमयी घटनाओं, चीज़ों, जगहों से भरा पड़ा है। इनमे से कई रहस्य सुलझा लिए गए है और कई अभी तक अनसुलझे है। हमने अपनी एक पुरानी पोस्ट में आपको दुनिया के 10 अनसुलझे रहस्यों के बारे में बताया था। इसी कड़ी में आज हम आपको दुनिया की 8 अनसुलझी रहस्यमयी घटनाओं के बारे में बता रहे है।
    1. जब मिला 6 इंच छोटा नरकंकाल

    Duniya ki Ansuljhi Rahasyamayi Ghatnaye,
    चिली के घोस्ट टाउन के पास 6 से 8 इंच छोटा नरकंकाल पाया गया था। इस नरकंकाल के दांत काफी मजबूत थे और इसके बॉडी पर धारियां थी। बाद में ये मान लिया गया कि ये कंकाल इंसान का ही था। ऐसे में सवाल उठता है कि इतने छोटे इंसान के दांत कहां होते हैं? बहरहाल, किसी के पास भी इस नरकंकाल के बारे में स्पष्ट जानकारी मौजूद नहीं है।
    2. जब आसमान से बरसे ‘मीट के टुकड़े’
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    1876 में बाथ कंट्री के रंकिन में अचानक मीट की बारिश होने लगी। आसमान से मीट के टुकड़े गिर रहे थे। नेवार्क साइंटिफिक एसोसिएशन ने इन टुकड़ों की जांच कर पाया कि ये टुकड़े घोड़े या किसी नवजात के हैं। लेकिन असलियत किसी को पता नहीं चल पाई।
    3. आज भी सुरक्षित है 2,000 साल पुरानी बॉडी
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    चीन में पाई गई लेडी डाइस की ममी का रहस्य आज तक किसी को पता नहीं चल पाया। करीब 2 हजार साल पुरानी इस डेड बॉडी को आज भी ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचा है। जब ये डेड बॉडी मिली थी तब भी बॉडी की स्किन सॉफ्ट थी। उसके पैरों और हाथों के जॉइंट्स हिल रहे थे। इस ममी को किस तरीके से प्रिजर्व किया गया था, इसका जवाब किसी को नहीं मिला।
    4. एक छेद में समा जाती है आधी नदी
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    द डेविल्स केटल के नाम से मशहूर इस छेद में नदी का आधा पानी समा जाता है। पर किसी को नहीं पता की पानी जाता कहां है। कई सालों से रिसर्चर्स इस बारे में शोध कर रहे हैं पर अबतक उन्हें कोई जवाब नहीं मिला है।
    5. जब जानवरों ने बचाई लोगों की जान
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    1975 में चीन के हियेंग सिटी के लोगों की जान जानवरों ने बचा ली थी। जानवरों के अजीबोगरीब बर्ताव की वजह से शहर खाली करवा लिया गया। इसके कुछ देर के बाद ही 7.3 मैग्निट्यूड के भूकंप ने 90% शहर तबाह कर दिया था।
    6. स्विमिंग करने के दौरान गायब हो गए ऑस्ट्रेलियाई प्राइम मिनिस्टर
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    22 महीने तक ऑस्ट्रेलिया के प्राइम मिनिस्टर रहे हेरोल्ड होल्ट को आखिरी बार चेवियट बीच पर देखा गया था। उसके बाद हेरोल्ड गायब हो गए। उन्हें ढूंढने के लिए पुलिस, ऑस्ट्रेलियन नेवी डाइवर्स, एयर फाॅर्स हेलिकॉप्टर्स भी लगाए गए। लेकिन हेराल्ड का कोई निशान नहीं मिला।
    7. क्या सच था 1518 का ‘डांसिंग प्लेग’?
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    कहा जाता है कि 1518 में एल्सासे के स्ट्रासबर्ग में डांसिंग प्लेग फैला था। लोग कई महीनों तक बिना रुके डांस करते रहे थे। इस दौरान कइयों की मौत हार्ट अटैक और स्ट्रोक्स की वजह से हो गई थी। इस प्लेग के रहस्य से कभी पर्दा नहीं हट पाया।
    8. एयरपोर्ट से हुई बोइंग विमान की चोरी, चोर नहीं उड़ा सकता था विमान
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    2003 में अंगोलन एयरपोर्ट से बोइंग 727 की चोरी हो गई थी। बोइंग के लाइट्स बंद थे, ट्रांसपॉन्डर डिसएबल किये हुए थे और बोइंग ने वैसे ही उड़ान भर दी। अटलांटिक ओशन के ऊपर से गुजरते हुए इस बोइंग विमान को फिर किसी ने नहीं देखा।