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Wednesday, 25 April 2018

दूसरी दुनिया के दरवाजे और वर्महोल का रहस्य

By: Secret On: 08:00
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  • दूसरी दुनिया के दरवाज़े हैं ये रहस्यमय वर्महोल




           अपनी धरती पर अब तक इस तरह के दो वर्म होल ढूँढ़े जा चुके हैं। इनमें से एक फ्लोरिडा कोस्टारिका और बरमूडा के बीच बरमूडा त्रिकोण है, जबकि दूसरे की खोज अभी २६ वर्ष पहले 18 अगस्त 1990 को हुई। जापान, ताइवान तथा गुगुआन के मध्य स्थित यह ट्रायंगल “ड्रेगन्स ट्राइएंगल” के नाम से प्रसिद्ध है | क्या होते है ये वर्म होल ? वर्म होल इस अखिल विश्व ब्रह्माण्ड के वो छिद्र हैं जहाँ पर समय (Time) और आकाश (Space) की सारी ज्यामितियाँ एक हो जाती हैं अर्थात यहाँ पर समय (Time) और आकाश (Space) का परस्पर एक-दूसरे में रूपांतर संभव है | समय (Time) और आकाश (Space) की ज्यामितियाँ एक हो जाने की वजह से, इस अखिल विश्व ब्रह्माण्ड में जितनी भी विमायें (Dimensions) हैं वो सब उस ‘बिंदु’ में तिरोहित हो जाती हैं इसी वजह से इस बिंदु में प्रचंड आकर्षण शक्ति होती है |

    तो अगर आप किसी वर्म होल के मुहाने पर खड़े हैं तो उसकी अकल्पनीय आकर्षण शक्ति में फंस सकते हैं | एक बार कोई भी वस्तु उस छिद्र में फंसी तो वो स्वयं भी उस बिंदु के समान हो जाएगी लेकिन अगले ही क्षण वो इस बिंदु से बाहर किसी दूसरे लोक में होगी | जितने समय तक वो वस्तु उस बिंदु में रहेगी वो अपने आप को उस ब्रह्माण्ड की सारी विमाओं (Dimensions) में व्यक्त करेगी लेकिन ये समय इतना कम होता है कि न तो इसको किसी भी तरह से मापा जा सकता है और न ही इस मानवीय शरीर से इसका अनुभव किया जा सकता है |

    अगर आप दुर्भाग्य वश इस वर्म होल में फंस गए तो, दिक्-काल (Time-Space) की सारी ज्यामितियों के हो जाने की वजह से, आप के साथ दो संभावने हो सकती है | या तो आप किसी बिलकुल अद्भुत और अनजान लोक में पहुंचे लेकिन वहां भी उसी समय में जी रहे होंगे जिस समय में आप जीते अगर पृथ्वी लोक में होते तो | ऐसा भी हो सकता है की दूसरे लोक में भी आपको अपने आस-पास, अपने लोगो की आवाज़े आरही हों जो गायब होते वक्त आपके आस-पास थे लेकिन आप उनको देख नहीं पा रहे हों क्योकि आप उनसे इतर किसी दूसरे लोक में हैं | ऐसा इसलिए होता है की वर्म होल में फंसने की वजह आप के क्षेत्र या आकाश (Space) की ज्यामिति परिवर्तित (Change) हो गयी लेकिन आपके समय (Time) की ज्यामिति नहीं बदली |

    दूसरी सम्भावना ये है कि हो सकता है वर्म होल में फंसने के बाद आप वापस उसी जगह पर हों लेकिन आप की अपनी दुनिया के लोग वहां न हों हांलाकि हो सकता है जगह थोड़ी सी बदली-बदली सी लगे लेकिन वास्तव में आप होंगे उसी जगह पर, लेकिन आप के अपने समय के संगी-साथी वहां नहीं होंगे | ऐसा समय की ज्यामिति परिवर्तित होने से होता है | यानि आपके स्थान या आकाश (Space) की ज्यामिति तो वही रही लेकिन समय (Time) की ज्यामिति बदल गयी |आप अपने ही लोक, अपने ही ग्रह पर लेकिन किसी और समय में होंगे |

    यद्यपि वर्महोल की परिकल्पना वैज्ञानिको के लिए अभी भी चुनौती पूर्ण बनी हुई है लेकिन ब्रह्माण्ड के अद्भुत रहस्यों में से एक वर्म होल ने कई अनसुलझी गुत्थियों को सुलझा भी दिया है | पृथ्वी पर स्थित वर्म होलों के संबंध में वैज्ञानिकों के एक दल का विश्वास है कि इस प्रकार के अनेक छोटे वर्म होल्स इसके जल या स्थल भाग में स्थित हो सकते हैं पर किन्हीं कारणों से उनके मुँह बंद रहते हैं और यदा−कदा ही खुलते हैं, किन्तु जब खुलते हैं, तो इस प्रकार की घटनाएँ देखने−सुनने को मिलती हैं। ये छिद्र कभी−कभी ही क्यों खुलते हैं और अधिकाँश समय बंद क्यों रहते हैं? इस संबंध में जानकारी प्राप्त करने के लिए वैज्ञानिक अब पृथ्वी स्थित अपनी प्रयोगशाला में ही छोटे आकार के वर्महोल विनिर्मित करने का प्रयास कर रहे हैं, ताकि उनकी प्रकृति के बारे में गहराई से अध्ययन किया जा सके। यदि ऐसा हुआ, तो फिर लोक−लोकान्तरों की यात्रा बिना किसी कठिनाई के कर सकना संभव हो सकेगा और व्यक्ति इच्छानुसार किसी भी लोक का सफर किसी भी समय सरलतापूर्वक कर सकेगा।

    ऐसे गमनागमन का आर्ष साहित्यों में यत्र−तत्र वर्णन भी मिलता है। महाभारत में एक इसी तरह के प्रसंग का उल्लेख वन पर्व के तीर्थयात्रा प्रकरण में मौजूद है, जिसमें बंदी नामक एक पंडित ने यज्ञ के आयोजन के लिए विद्वान ब्राह्मणों को समुद्र मार्ग से वरुण लोक भेजा था। चर्चा यह भी है कि यज्ञ के उपराँत वे सकुशल पुनः उसी मार्ग से पृथ्वी लोक आ गये थे। इससे स्पष्ट है कि तब लोग उस विद्या में निष्णात् हुआ करते थे, जिसे आत्मिकी या उच्च स्तरीय रूप माना जाता है। यदि ऐसा नहीं होता, तो उनका वापस लौट पाना एक प्रकार से अशक्य बना रहता। आज इसी अशक्त ता के कारण ऐसी घटनाओं में व्यक्ति एक लोक से दूसरे में पहुँच तो जाता है, पर फिर अपने पूर्व लोक में वापस नहीं आ पाता। इससे यह भी साबित होता है कि अन्य लोकों का सुनिश्चित अस्तित्व असंदिग्ध रूप से विद्यमान है।

    इसी का समर्थन करते हुए प्रसिद्ध वैज्ञानिक रिचर्ड एच. ब्रायण्ट अपनी कृति “अदर वर्ल्डस” में लिखते हैं कि भौतिक आयामों से परे अपने ही जैसे किसी अन्य विश्व-ब्रह्माण्ड के लिए यह जरूरी है कि व्यक्त चार आयामों के अतिरिक्त और चार आयाम हों। यह आयाम प्रत्यक्ष आयामों को ढकेंगे नहीं, वरन् हर नया आयाम प्रत्येक दूसरे से समकोण पर स्थित होगा। वे कहते हैं कि यद्यपि इस प्रकार की विचारधारा सिद्धाँत रूप में संभव नहीं है, फिर भी गणितीय रूप से इसे दर्शाया जा सकता है। उनके अनुसार यदि भौतिक विज्ञान की पहुँच से बाहर दृश्य आयामों से परे कोई पड़ोसी अदृश्य संसार वास्तव में है, तो इसे पाँचवें, छठवें, सातवें और आठवें आयामों से बना होना चाहिए। इस प्रकार विज्ञान ने भी सूक्ष्म लोकों के अस्तित्व पर एक प्रकार से मुहर लगा दी है।


    Monday, 23 April 2018

    भगवान भोलेनाथ के ऐसे रहस्य जिन्हें सुनकर चौक जाएंगे आप ( भाग- 1)

    By: Secret On: 17:00
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  • भगवान भोलेनाथ के ऐसे रहस्य जिन्हें सुनकर चौक जाएंगे आप( भाग-1  )
    भगवान शिव अर्थात पार्वती के पति शंकर जिन्हें महादेव, भोलेनाथ, आदिनाथ आदि कहा जाता है, उनके बारे में यहां प्रस्तुत हैं 35 रहस्य।
    इन 35 रहस्यों को मैं तीन भागों में आपके सामने प्रस्तुत करूंगा -
    1. आदिनाथ शिव
    सर्वप्रथम शिव ने ही धरती पर जीवन के प्रचार-प्रसार का प्रयास किया इसलिए उन्हें 'आदिदेव' भी कहा जाता है। 'आदि' का अर्थ प्रारंभ। आदिनाथ होने के कारण उनका एक नाम 'आदिश' भी है।



    2. शिव के अस्त्र-शस्त्र

    शिव का धनुष पिनाक, चक्र भवरेंदु और सुदर्शन, अस्त्र पाशुपतास्त्र और शस्त्र त्रिशूल है। उक्त सभी का उन्होंने ही निर्माण किया था।



    3. शिव का नाग
    शिव के गले में जो नाग लिपटा रहता है उसका नाम वासुकि है। वासुकि के बड़े भाई का नाम शेषनाग है।



    4. शिव की अर्द्धांगिनी
    शिव की पहली पत्नी सती ने ही अगले जन्म में पार्वती के रूप में जन्म लिया और वही उमा, उर्मि, काली कही गई हैं।


    5. शिव के पुत्र
    शिव के प्रमुख 6 पुत्र हैं- गणेश, कार्तिकेय, सुकेश, जलंधर, अयप्पा और भूमा। सभी के जन्म की कथा रोचक है।



    6. शिव के शिष्य

    शिव के 7 शिष्य हैं जिन्हें प्रारंभिक सप्तऋषि माना गया है। इन ऋषियों ने ही शिव के ज्ञान को संपूर्ण धरती पर प्रचारित किया जिसके चलते भिन्न-भिन्न धर्म और संस्कृतियों की उत्पत्ति हुई। शिव ने ही गुरु और शिष्य परंपरा की शुरुआत की थी। शिव के शिष्य हैं- बृहस्पति, विशालाक्ष, शुक्र, सहस्राक्ष, महेन्द्र, प्राचेतस मनु, भरद्वाज इसके अलावा 8वें गौरशिरस मुनि भी थे।


    7. शिव के गण
    शिव के गणों में भैरव, वीरभद्र, मणिभद्र, चंदिस, नंदी, श्रृंगी, भृगिरिटी, शैल, गोकर्ण, घंटाकर्ण, जय और विजय प्रमुख हैं। इसके अलावा, पिशाच, दैत्य और नाग-नागिन, पशुओं को भी शिव का गण माना जाता है। शिवगण नंदी ने ही 'कामशास्त्र' की रचना की थी। 'कामशास्त्र' के आधार पर ही 'कामसूत्र' लिखा गया।



    8. शिव पंचायत
    भगवान सूर्य, गणपति, देवी, रुद्र और विष्णु ये शिव पंचायत कहलाते हैं।


    9. शिव के द्वारपाल
    नंदी, स्कंद, रिटी, वृषभ, भृंगी, गणेश, उमा-महेश्वर और महाकाल।


    10. शिव पार्षद
    जिस तरह जय और विजय विष्णु के पार्षद हैं उसी तरह बाण, रावण, चंड, नंदी, भृंगी आदि शिव के पार्षद हैं।

    11. सभी धर्मों का केंद्र शिव

    शिव की वेशभूषा ऐसी है कि प्रत्येक धर्म के लोग उनमें अपने प्रतीक ढूंढ सकते हैं। मुशरिक, यजीदी, साबिईन, सुबी, इब्राहीमी धर्मों में शिव के होने की छाप स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है। शिव के शिष्यों से एक ऐसी परंपरा की शुरुआत हुई, जो आगे चलकर शैव, सिद्ध, नाथ, दिगंबर और सूफी संप्रदाय में वि‍भक्त हो गई।


    12. बौद्ध साहित्यके मर्मज्ञ अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त विद्वान प्रोफेसर उपासक का मानना है कि शंकर ने ही बुद्ध के रूप में जन्म लिया था। उन्होंने पालि ग्रंथों में वर्णित 27 बुद्धों का उल्लेख करते हुए बताया कि इनमें बुद्ध के 3 नाम अतिप्राचीन हैं- तणंकर, शणंकर और मेघंकर।

    13. देवता और असुर दोनों के प्रिय शिव
    भगवान शिव को देवों के साथ असुर, दानव, राक्षस, पिशाच, गंधर्व, यक्ष आदि सभी पूजते हैं। वे रावण को भी वरदान देते हैं और राम को भी। उन्होंने भस्मासुर, शुक्राचार्य आदि कई असुरों को वरदान दिया था। शिव, सभी आदिवासी, वनवासी जाति, वर्ण, धर्म और समाज के सर्वोच्च देवता हैं।

    Sunday, 22 April 2018

    भारतीय इतिहास के 14 हैरतंगेज़ और रोमांचित रहस्य !

    By: Secret On: 16:00
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  • भारतीय इतिहास के 14 हैरतंगेज़ और रोमांचित रहस्य !

    अगर आप कठिन से कठिन पहेलियाँ बुझाने में माहिर है और ऐतिहासिक किस्सों में दिलचस्पी रखते है तो भारतीय इतिहास के इन अनसुलझे रहस्यों को जानकर आश्चर्यचकित हो जायेंगे।
    इतिहास हमेशा कुछ न कुछ सिखाता है पर उसमे अनगिनत रहस्य समाये होते है जिसे इंसान हर कदम पर सुलझाने की कोशिश करता है। कुछ रहस्य नये होते है और कुछ सदियों पुराने! भारतीय इतिहास में ऐसी कई कहानियाँ मौजूद है, जिसमे ढेरों राज़ छिपे है, जिन्हें जानने के लिये वैज्ञानिक और इतिहासकार हमेशा से प्रयत्न करतेआ रहे है।
    आईये ऐसी ही कुछ कहानियों से रूबरू होते है। अगर आप इन्हें सुलझा सकते है तो कमेंट बॉक्स में जरूर लिखे। क्या पता इन अनसुलझे प्रश्नों का उत्तर आप ही में से किसी के पास हो!

    1. गुमनाम सिंधु घाटी सभ्यता



    सिंधु घाटी सभ्यता भारत की सबसे प्राचीन संस्कृति है। मिस्र (इजिपशियन) और मेसोपोटामियन सभ्यता से भी  सिंधु घाटी सभ्यता बहूत पुरानी, बड़ी, रहस्यमय और अनेक अनसुलझे सवालो से भरी पड़ी है। जिन लोगो ने इस सभ्यता की शुरुआत की उनके बारे में पुख्ता सबूत अभी तक नहीं मिले। इतना ही नहीं, उनके द्वारा इस्तेमाल किये गये 4000 साल पुराने सिंधु चित्रमय लिपि को भी आजतक कोई समझ नहीं पाया। उस जमाने की संस्कृति और उससे संबधित असंख्य रहस्य धरती की गोद में समा गये इसलिये इस सभ्यता को समझना मुश्किल है। सभ्यता को लेकर बहुत सारे सिद्धांत दिये गये है पर कोई भी निर्णायक नहीं है।

    2. चरामा की एलियन नुमा शैल चित्र

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    छत्तीसगढ़ के बस्तर आदिवासी इलाके में चरामा गाँव के पास पुरातन गुफाए मिली है जहा के पत्थरो पे दुसरे ग्रह के लोगो जैसे दिखने वाले चित्र पाये गये। गुफाओ की खोज करने वाले पुरातत्ववादी जे. आर. भगत कहते है कि चित्रो में चेहरे अलग तरह से दिखते है और कुछ चित्र उड़न तश्तरी के भी है।इससे जुडी हुयी एक कहानी गांववाले बताते है जिसमे रोहेला नामक लोग उड़न तश्तरी से यहाँ आते है और गांववालो का अपहरण करते है। छत्तीसगढ़ पुरातत्व विभाग ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन और अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) को इस मुहीम में मदद करने की मांग की है।

    3. बिहार की सोन भंडार गुफाएं

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    बिहार की सोन भंडार गुफाएं एक बड़े पत्थर से बनायीं हुयी है और कहा जाता है कि ये गुफाएं मगधन राजा बिम्बिसार के ज़माने की है। लोगो का मानना है कि बिम्बिसार राजा अपने खजाने को छुपाने के लिये इन गुफाओ का इस्तेमाल करता था। सोन भंडार का मतलब है ‘सोने का खजाना’। जब बिम्बिसार को उसके पुत्र अजातशत्रु ने कारागार  में डाल दिया तब उसके आदेश से उसकी बीवी ने राज्य का खजाना इस गुफाओ में छिपाया था। यहा पर मिली हुयी संखलिपि में लिखित शिलालेख है जिनसे शायद इस खजाने तक पहुँचने की चाबी मौजूद है। अंग्रेजो ने खजाने को हासिल करने के लिये दरवाजो पर तोप के गोले बरसाये थे जिनके निशान आज भी दिखते है पर उन्हें कुछ भी नहीं मिला था।

    4. नौ अपरिचित व्यक्ति

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    भारत के ‘नौ अपरिचित व्यक्ति’दुनिया भर के सबसे बड़े रहस्यों में से एक माने जाते  है। जानकारों का मानना है कि इसवी सन पूर्व 273 में जब कलिंगा का युद्ध हुआ था जिसमे 100,000 लोगो की जाने गयी थी, उसके बाद सम्राट अशोक ने इन नौ व्यक्तियों का गुट बनाया था। नौ में से हर एक व्यक्ति को एक विषय पर बहुत सारा ज्ञान था, जिसमे पर्यटन, विज्ञान और युद्ध कौशल जैसे विषय शामिल थे। उन सभी 9 लोगो के बारे में पूरी जानकारी नहीं है पर ऐसा मानना है कि आज भी उनके वंशज मौजूद है।

    5. मीर ओस्मान अली का खजाना

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    हैदराबाद के असफ जाह शासन के सातवे और आखरी निज़ाम मीर ओस्मान अली खान अपने गहनो और खजाने के संग्रह के लिये प्रसिद्ध थे। सन 1937 में टाइम मैगज़ीन ने उन्हें दुनिया के सबसे अमीर आदमी का सम्मान दिया। उनके द्वारा संग्रहित की गयी सभी गहनों और खजाने को उनके मृत्यु के बाद भी कोई ढूंड नहीं पाया था। लोगो का कहना है कि सारा खजाना हैदराबाद के कोठी पैलेस में छुपा है जहा निजाम रहते थे।

    6. लामा तेनझीन की 500 साल पुरानी ममी

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    हिमालय में स्पिटी के पास घुइन नामक एक छोटासा क़स्बा है जहा पुराने ज़माने में प्रचलित, खुद की ममी बनाने की संस्कृति देखने को मिलती है ।यहा पर एक छोटे से कमरे में 500 साल की ममी रखी गयी है जिसे कांच से सरंक्षित किया गया है। पंद्रहवी शताब्दी के महंत सांघा तेनझीन की ये ममी है, जिसकी त्वचा और सर के बाल आज भी साबुत है। ये ममी सबसे पहली प्राकृतिक ममी है।

    7. जयगढ़ किले का शाही खजाना

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    जयगढ़ का जैवाना किला दुनिया के सबसे बड़े पहियों वाली तोपो के लिये प्रसिद्द तो है पर साथ साथ साजिश और खजानों की कहानियो के लिये भी प्रसिद्ध है। ऐसा कहा जाता है कि अफगानिस्तान की जंग जीतने के बाद अकबर के रक्षा मंत्री मान सिंग ने युद्ध में जीता हुआ खजाना इसी किले में छुपा के रखा था। सन 1977 में तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने किले में खजाना और पानी की टंकिया ढूंढने के लिये एक मुहीम चलायी। पर इसमे कुछ भी नहीं पाया गया। इस मुहीम की पूरी कहानी महारानी गायत्री देवी द्वारा लिखी गयी ‘A Princess Remembers’ नामक किताब में पढने को मिलता है।

    8. नानासाहेब का लापता होना

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    नानासाहेब 1857 के विद्रोह के नेता थे जिन्होंने ब्रिटिश शासन को ललकारा था। विद्रोह के बाद नानासाहेबअचानक एक दिन गायब हो गए। इतिहास में किसीको पता नहीं है कि उनके द्वारा लूटा हुआ खजाना कहा है। कहानी ये भी है कि वो खजाने के साथ नेपाल चले गये और ब्रिटिशो के हाथ नहीं लगे। ब्रिटिश काल से नानासाहेब और उनका खजाना एक रहस्य बना हुआ है।

    9. कुलधरा- भूतो से पीड़ित गाँव

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    जैसलमेर के पश्चिम दिशा में 20 किमी के बाद भूतो से पीड़ित कुलधारा गाँव है जहा 100 साल पहले पालीवाल ब्राह्मण रहते थे। लगबग 1500 लोग एक ही रात में इस गाँव को छोड़कर निकल गये। किसी को खबर नहीं थी कि वो कहा और क्यों गये पर लोगो का मानना है कि दुष्ट शासक सलीम सिंग और उसके लगाये गये लगान की वजह से लोग गाँव छोड़कर चले गए, और जाते जाते गाँव को एक श्राप भी देकर गये। उस घटना के बाद जिसने भी गाँव में रहने का निश्चय किया उसकी मौत हो गयी इसी वजह से ये गाँव  आजतक नहीं बसा।

    10. चपाती आंदोलन

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    1857 के विद्रोह के दौरान चपाती आंदोलन शुरू किया गया था, जिसके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है इसलिये आजतक यह एक रहस्य बना हुआ है। कुछ अध्ययन द्वारा ये बताया गया है कि कोलेरा से प्रभावित लोगो को चपाती पहूचाना इसका उद्देश था पर इस आंदोलन का असली मकसद आज भी किसीको नहीं पता। इतिहासकारो का मानना है कि इस आंदोलन से 1857 में ब्रिटिश राज में खलबली मची थी।

    11. नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की मृत्यु

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    नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की मृत्यु के बारे में असंख्य कहानियाँ प्रचलित है, जो आज भी एक रहस्य बना हुआ है। कोई नहीं जानता कि तायपेई से टोकियो जाने वाले विमान में उनके साथ क्या हुआ। आजाद भारत का ये एक अनसुलझा सवाल है। उनके गायब होने के बाद ऐसा कहा जाता है कि वो भारत वापस आये थे और उत्तर भारत में साधू के वेश में रहते थे। इस बात का सबूत नहीं है पर ऐसा माना जाता है कि उत्तर प्रदेश के फैजाबाद में रहने वाले साधू गुमनामी बाबा ही सुभाष चन्द्र बोस थे।

    12. लालबहादुर शास्त्री की असामयिक मौत

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    भारत के प्रधानमंत्री बनने के महज 2 साल बाद दुसरे देश में लाल बहादुर शास्त्री की अचानक मौत होना देश के लिये एक दुर्भाग्य था और सबसे बड़ा रहस्य भी। सन 1966 में ताशकन्त देश में दिल का दौरा पड़ने से उनकी मौत हुयी। नीले धब्बे और कटने के निशान उनके शरीर पर थे पर न तो उनका पोस्ट मार्टम किया गया और न ही उनकी मौत से जुड़े कोई दस्तावेज़ सरकार को दिये गये। इसलिये उनकी मौत पर हमेशा एक प्रश्नचिन्ह बना रहा।

    13. शांतीदेवी का पुनर्जन्म

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    एक बच्ची का दिल्ली में पुनर्जन्म हुआ जिसका नाम शांतिदेवी था। शांतिदेवी ने अपने घरवालो को उसके पहले जन्म के घर और घरवालो की जानकारी दी। महात्मा गाँधी द्वारा स्थापन की गयी एक कमिटी ने शांतिदेवी द्वारा दी गयी जानकारी को टटोला और रिकॉर्ड किया।

    14. एक योगी कुछ खाये-पिये बिना जी रहा है

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    अहमदाबाद से 200 किमी दूर अम्बाजी गाँव में चुनरीवाला माताजी नाम से मशहूर एक कमजोर बुर्जुर्ग तपस्वी रहते है। इनका असली नाम प्रल्हाद जानी है। इनका कहना है कि 11 साल की उम्र से वो देवी अम्बा के  भक्त बने और अध्यात्म से जुडे। वे  कहते  है कि देवी ने उन्हें आशीर्वाद देकर अमृत दिया जिसे वो तालू के छेद से शरीर में पहुँचता रहता है। सन 2003 में 21 लोगो की मेडिकल रिसर्च टीम ने इस योगी पर विडियो द्वारा नज़र रखी पर कुछ निष्कर्ष नहीं निकला। योगी का कहना है कि सन 1940 से वो कुछ भी खाए पिए बगैर जी रहे है।

    Friday, 15 September 2017

    प्रह्लाद जानी एक अबूझ पहेली (एक योगी)

    By: Secret On: 17:20
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  • हवाख़ोर योगी विज्ञान के लिए अबूझ पहेली
    वे न कुछ खाते हैं और न पीते हैं. सात दशकों से केवल हवा पर जीते हैं. गुजरात में मेहसाणा ज़िले के प्रहलाद जानी एक ऐसा चमत्कार बन गये हैं, जिसने विज्ञान को चौतरफ़ा चक्कर में डाल दिया है.
    भूख-प्यास से पूरी तरह मुक्त अपनी चमत्कारिक जैव ऊर्जा के बारे में प्रहलाद जानी स्वयं कहते हैं कि यह तो दुर्गा माता का वरदान हैः "मैं जब 12 साल का था, तब कुछ साधू मेरे पास आये. कहा, हमारे साथ चलो. लेकिन मैंने मना कर दिया. क़रीब छह महीने बाद देवी जैसी तीन कन्याएं मेरे पास आयीं और मेरी जीभ पर उंगली रखी. तब से ले कर आज तक मुझे न तो प्यास लगती है और न भूख."

    उसी समय से प्रहलाद जानी दुर्गा देवी के भक्त हैं. उन के अपने भक्त उन्हें माताजी कहते हैं. लंबी सफ़ेद दाढ़ी वाला पुरुष होते हुए भी वे किसी देवी के समान लाल रंग के कपड़े पहनते और महिलाओं जैसा श्रृंगार करते हैं.

    कई बार जांच-परख

    भारत के डॉक्टर 2003 और 2005 में भी प्रहलाद जानी की अच्छी तरह जांच-परख कर चुके हैं. पर, अंत में दातों तले उंगली दबाने के सिवाय कोई विज्ञान सम्मत व्याख्या नहीं दे पाये. इन जाचों के अगुआ रहे अहमदाबाद के न्यूरॉलॉजिस्ट (तंत्रिकारोग विशेषज्ञ) डॉ. सुधीर शाह ने कहाः "उनका कोई शारीरिक ट्रांसफॉर्मेशन (कायाकल्प) हुआ है. वे जाने-अनजाने में बाहर से शक्ति प्राप्त करते हैं. उन्हें कैलरी (यानी भोजन) की ज़रूरत ही नहीं पड़ती. हमने तो कई दिन तक उनका अवलोकन किया, एक-एक सेकंड का वीडियो लिया. उन्होंने न तो कुछ खाया, न पिया, न पेशाब किया और न शौचालय गये."

    भारतीय सेना की भी दिलचस्पी

    गत 22 अप्रैल से नौ मई तक प्रहलाद जानी डॉक्टरी जाँच-परख के लिए एक बार फिर अहमदाबाद के एक अस्पातल में 15 दिनों तक भर्ती थे. इस बार भारतीय सेना के रक्षा शोध और विकास संगठन का शरीरक्रिया


    डॉक्टर जांचते हैं, पर पाते कुछ नहीं
    विज्ञान संस्थान DIPAS जानना चाहता था कि प्रहलाद जानी के शरीर में ऐसी कौन सी क्रियाएं चलती हैं कि उन्हें खाने-पीने की कोई ज़रूरत ही नहीं पड़ती.

    तीस डॉक्टरों की एक टीम ने तरह तरह की डॉक्टरी परीक्षाएं कीं. मैग्नेटिक रिजोनैंस इमेजींग मशीन से उन के शरीर को स्कैन किया. हृदय और मस्तिष्क क्रियाओं को तरह तरह से मापा. रक्त परीक्षा की. दो वीडियो कैमरों के द्वारा चौबीसो घंटे प्रहलाद जानी पर नज़र रखी. जब भी वे अपना बिस्तर छोड़ते, एक वीडियो कैमरा साथ साथ चलता.

    परिणाम आने की प्रतीक्षा

    इस बार डीएनए विश्लेषण के लिए आवश्यक नमूने भी लिये गये. शरीर के हार्मोनों, एंज़ाइमों और ऊर्जादायी चयापचय (मेटाबॉलिज़्म) क्रिया संबंधी ठेर सारे आंकड़े जुटाये गये. उनका अध्ययन करने और उन्हें समझने-बूझने में दो महीने तक का समय लग सकता है.

    डॉक्टरों का कहना है कि इन सारे परीक्षणों और आंकड़ों के विश्लेषण के आधार पर प्रहलाद जानी के जीवित रहने का रहस्य या तो मिल जायेगा या उनके दावे का पर्दाफ़ाश हो जायेगा. पिछली परीक्षाओं और अवलोकनों से न तो कोई रहस्य खुला और न कोई पर्दाफ़ाश हो पाया. बल्कि, जैसा कि डॉ. सुधीर शाह ने बताया, डॉक्टरों की उलझन और भी बढ़ गयीः "(कहने पर) वे अपने आप अपने ब्लैडर (मूत्राशय) में यूरीन (पेशाब) लाते हैं. यदि वह (पेशाब) 120 मिलीलीटर था और हमने कहा कि हमें आज शाम को 100 मिलीलीटर चाहिये, तो वे 100 मिलीलीटर कर देंगे. यदि हम कहेंगे कि कल सुबह ज़ीरो (शून्य) होना चाहिये, तो ज़ीरो कर देंगे. कहने पर शाम को 50 मिलीलीटर कर देंगे. यानी हम जो भी कहें, वे हर बार वैसा ही कर पाये हैं. यह अपने आप में ही एक चमत्कार है."

    विज्ञान को विश्वास नहीं


    दैवीय आशीर्वाद या छल-प्रपंच?

    प्रहलाद जानी अपनी आयु के आठवें दशक में भी नियमित रूप से योगाभ्यास करते हैं और ध्यान लगाते हैं. योगी-ध्यानी व्यक्तियों में चमत्कारिक गुणों की कहानियों पर भारत में लोगों को आश्चर्य नहीं होता, पर विज्ञान उन्हें स्वीकार नहीं करता.

    विज्ञान केवल उन्हीं चीज़ों को स्वीकार करता है, जो स्थूल हैं या नापी-तौली जा सकती हैं. प्रहलाद जानी इस सांचे में फ़िट नहीं बैठते. तब भी, विज्ञान उनके अद्भुत चमत्कार का व्यावहारिक लाभ उठाने में कोई बुराई भी नहीं देखता. डॉ. सुधीर शाहः "कैलरी या भोजन के बदले वे किसी दूसरे प्रकार की ऊर्जा से अपने शरीर को बल देते हैं. अगर हम उस ऊर्जा को पकड़ सके, उसे माप सके, तो हो सकता है कि हम दूसरे आदमियों में भी उसे प्रस्थापित कर सकें और तब पूरी मानवजाति का और चिकित्सा विज्ञान का भविष्य बदल जायेगा."

    अंतरिक्ष यात्राओं के लिए विशेष उपयोगी

    भारतीय सेना का रक्षा शोध संस्थान भी यही समझता है कि यदि यह रहस्य मालूम पड़ जाये, तो लोगों को न केवल लड़ाई के मैदान में और प्राकृतिक आपदाओं के समय बिना अन्न-पानी के लंबे समय तक जीवित रहना सिखाया जा सकता है, बल्कि चंद्रमा और मंगल ग्रह पर जाने वाले अंतरिक्षयात्रियों के राशन-पानी की समस्या भी हल हो सकती है.

    लेकिन, प्रश्न यह है कि क्या किसी तपस्वी की तपस्या का फल उन लोगों को भी बांटा जा सकता है, जो तप-तपस्या का न तो अर्थ जानते हैं और न उसमें विश्वास करते हैं? क्या यह हो सकता है कि सिगरेट से परहेज़ तो आप करें, पर कैंसर से छुटकारा मिले धूम्रपान करने वालों को?

    Monday, 11 September 2017

    क्या होगा अगर पृथ्वी 5 सेकण्ड के लिए अपना गुरुत्वाकर्षण खो दे!

    By: Secret On: 10:00
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  • अक्सर हमने पढ़ा है कि यह ग्रेविटी ही है, जिसकी वजह से हम जमीन पर चल पा रहे हैं, ग्राउंडेड रहते हैं। गुरुत्वाकर्षण , जो कि एक साथ पदार्थ खींचने वाली प्राकृतिक घटना है। लेकिन क्या हो अगर हमारे ग्रह को पाँच सेकेंड्स तक गुरुत्वाकर्षण खोना पड़ जाए? तो क्या यह वास्तव में पृथ्वी पर जीवन का अंत हो सकता है?

    गुरुत्वाकर्षण किसी ऑब्जेक्ट को एक दूसरे की ओर खींचती है, कोई ऑब्जेक्ट जितना बड़ा हेगा, उसका ग्रेविटेशनल पुल भी उतना ही ज्यादा होगा। हम जानते हैं कि हमारी पृथ्वी बहुत बड़ी है और बहुत करीब है। इसकी गुरुत्वाकर्षण की वजह से जब हम कुछ हवा में भी फेंकते हैं तो वो ज़मीन पर आकर गिरता है।

    सूर्य पृथ्वी से बहुत अधिक बड़ा है, इतना की हमारे ग्रह की करीब 1 मिलियन से अधिक कॉपीज़ इसके अंदर फिट हो सकती हैं। यह सूरज का गुरुत्वाकर्षण ही है, जिसकी वजह से हमारा ग्रह और अन्य इसके चारों ओर ऑर्बिट करते हैं। गुरुत्वाकर्षण के बिना, इंसान और अन्य वस्तुएं वजनहीन हो जाती हैं।

    कभी फिल्में देखें जहां अंतरिक्ष यात्री चन्द्रमा पर अपने देश के झंडे लगाने की कोशिश कर रहे हैं? वे ऊपर और नीचे होते रहते हैं, क्योंकि चंद्रमा बहुत छोटा है और इसलिए वहां पृथ्वी की तुलना में बहुत कम गुरुत्व है। ऐसा ही कुछ अंतरिक्ष यान में वेटलेस होकर तैरते अंतरिक्ष यात्री के साथ भी होता है।

    वहीं पृथ्वी पर वापस आते ही वो वापस ज़मीन पर आ जाते हैं, क्योंकि यहां का गुरूत्वाकर्षण उन्हें वापस खींच लेता है। अगर धरती अचानक अपना सारा गुरूत्वाकर्षण को खो देती है, तो हम सिर्फ फ्लोटिंग शुरू नहीं करेंगे, बल्कि यह मानवों के साथ-साथ कारों और इमारतों जैसे चीजों को भी फास्ट-मूविंग बना देगा।

    इसका कारण यह है कि ग्रह गुरुत्वाकर्षण के बिना भी स्पिनिंग जारी रखेगा। गुरुत्वाकर्षण की हानि का मतलब होगा कि ग्रह हवा, पानी और पृथ्वी के वायुमंडल को भी नीचे खींचने से रोक देगा। शायद यही तबाही की वजह बन सकता है। अचानक और महत्वपूर्ण वायु दबाव के नुकसान से सभी के इनर ईयर को नुकसान पहुंचाएगा।

    Sunday, 10 September 2017

    हम सपने क्यों देखते है?

    By: Secret On: 10:00
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  • मानव मस्तिष्क ग्रे पदार्थ की रहस्यमय छोटी गेंद है। शोधकर्ता अभी भी कई पहलुओं से चकित हैं कि यह कैसे और क्यों संचालित होता है। कई दशकों से वैज्ञानिक नींद और सपने की स्टडीज का अभ्यास कर रहे हैं, और हम अभी भी स्लपिंग के बारे में 100 प्रतिशत नहीं जानते हैं। हम यह नहीं जानते हैं कि वास्तव में हम कैसे और क्यों हम सपने देखते हैं। हम यह जानते हैं कि हमारे सपने का चक्र आम तौर पर नींद के आरईएम चरण के दौरान आता है।

    यह भी वैज्ञानिक समुदाय के बीच काफी सामान्य रूप से स्वीकार किया गया है कि हम सभी सपने देखते हैं, हालांकि हर आवृत्ति में देखे गए सपने अलग-अलग होते हैं। सपने वास्तव में कोई शारीरिक, जैविक या मनोवैज्ञानिक फंक्शन होते हैं या नहीं, इसका पता लगाना अभी बाकी है। कई सिद्धांत हैं कि हम सपने क्यों देखते हैं। एक यह है कि सपने हमारी नींद के साथ-साथ काम करते हैं।

    जिससे कि हमारे वेकिंग आवर्स के दौरान इकट्ठा हुई हर चीज के माध्यम से मस्तिष्क को सॉर्ट किया जा सके। आपका मस्तिष्क एक दिन में सैकड़ों हजारों चीजों से मिलता है और हर दिन लाखों इनपुट हमारे ब्रेन में सैट होते हैं। नींद के दौरान, मस्तिष्क इस सारी जानकारी को सॉर्ट करने के लिए काम करता है, यह तय करता है कि क्या रखना है और क्या भूलना है। कुछ शोधकर्ताओं का मानना है कि इस प्रक्रिया में सपने एक भूमिका निभाते हैं।

    ऐसे विचारों का समर्थन करने के लिए कुछ शोध भी हैं। अध्ययन से पता चलता है कि हम अपने जागने के समय में नई चीजें सीख रहे होते हैं, तो जब हम सोते हैं तो सपने बढ़ते हैं। एक अध्ययन में भाग लेने वाले जो लोग एक लैंग्वेज कोर्स कर रहे थे, वो उन लोगों की तुलना में अधिक सपना देखते हैं, जो कोर्स नहीं कर रहे थे। इस तरह के अध्ययनों में विचार है कि हम अपने सपनों का इस्तेमाल करते हैं और अल्पकालीन यादों को दीर्घकालिक यादों में परिवर्तित करते हैं।

    एक और सिद्धांत यह है कि सपनों को आम तौर पर हमारी भावनाओं को दर्शाता हैं। दिन के दौरान, हमारे दिमाग कुछ कार्यों को प्राप्त करने के लिए कनेक्शन बनाने के लिए कड़ी मेहनत करते हैं। मस्तिष्क केवल मानसिक कार्य ही नहीं करता है यह सही संबंध बनाने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। कुछ ने प्रस्ताव किया है कि रात में सब कुछ धीमा हो जाता है। हमें नींद के दौरान कुछ भी ध्यान देने की आवश्यकता नहीं है, इसलिए हमारे दिमाग बहुत ढीले कनेक्शन बनाते हैं।

    नींद के दौरान है कि दिन की भावनाएं हमारे सपनों के चक्र में युद्ध करती हैं। उदाहरण के लिए, यदि आप अपनी नौकरी खोने के बारे में चिंतित हैं, तो आप सपने देख सकते हैं कि आप दिग्गजों की दुनिया में रहने वाले एक सिकुड़े हुए व्यक्ति हैं, या आप एक महान रेगिस्तानी खाई के माध्यम से निशाना बना रहे हैं। एक सिद्धांत यह है कि सपने सचमुच किसी भी फंक्शन में काम नहीं करते हैं, कि जब हमें नींद आती है तो वे मस्तिष्क की फायरिंग का सिर्फ एक बेकार उप-उत्पाद है।

    हम जानते हैं कि आरईएम की नींद के दौरान हमारे दिमाग का पीछे वाला भाग बहुत सक्रिय हो जाता है, इस दौरान सबसे ज्यादा सपना देखा जाता है। यह है कि जब तक मस्तिष्क ऐसे रहस्य रखता है, तब तक हम निश्चित रूप से बिल्कुल नहीं कह सकते कि हम सपने क्यों देखते हैं।

    Saturday, 10 December 2016

    भारत की इन जगहों पर प्रतिबंधित है आपका प्रवेश, लेनी पड़ती है विशेष परमिशन

    By: Secret On: 21:15
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  • भारत की इन जगहों पर प्रतिबंधित है आपका प्रवेश, लेनी पड़ती है विशेष परमिशन

    Banned Indian Places For Tourist : देश के अलग-अलग हिस्सों में कई ऐसे प्लेसेस हैं, जहां लोगों के जाने पर बैन लगा हुआ है। आपको जानकर भले ही हैरत हो रही होगी, लेकिन ये सच है। स्थानीय लोगों को छोड़ दिया जाए तो इन जगहों पर जाने के लिए इनर लाइन परमिट लेना होता है। ये कानून देश-दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से आए तमाम टूरिस्ट्स के लिए मान्य है।बताया जाता है कि ये सभी प्लेसेस दूसरे देशों की सीमाओं के नजदीक स्थित हैं, ऐसे में सुरक्षा कारणों से बगैर आदेश के एंट्री नहीं मिलती है। हालांकि, परमिशन लेकर जाने वाले लोग एक तय समय सीमा तक ही इन क्षेत्रों में घूम सकते हैं। इसके बाद टूरिस्ट को उन प्लेसेस को देखकर वापस लौट जाना होता है। ऐसे में आज हम आपको भारत के 5 ऐसे प्लेसेस के बारे में बताने जा रहे हैं।
    क्या है इनर लाइन परमिट (What is Inner Line Permit)
    इनर लाइन परमिट भारत का आधिकारिक यात्रा दस्तावेज है, जो देश और विदेशों के टूरिस्ट्स को प्रोटेक्टेड एरिया में जाने के लिए परमिट देता है। ये परमिट तय समय सीमा और कुछ लोगों के लिए ही मान्य होता है। मुख्यत: ये परमिट भारत में इस समय सिर्फ तीन राज्यों – मिजोरम, नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश में ही पूर्ण रुप से लागू है। हालांकि, इन राज्यों के अलावा दूसरे देशों के बॉर्डर लाइन पर भी इस परमिट की आवश्यकता होती है।
    कोहिमा, नागालैंड (Kohima, Nagaland)
    Kohima - Banned Indian PlacesFor Tourist - Hindi Information
    पहाड़ की एक ऊंचे चोटी पर बसा कोहिमा भारत के उत्तर-पूर्वी राज्य नागालैंड की राजधानी है, जो अंगामी नागा जनजाति की भूमि है। इसे एशिया का स्विट्जरलैंड भी कहा जाता है। यहां पर जाने के लिए इनर परमिट लाइन की आवश्यकता होती है।
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    लोकतक लेक, मणिपुर (loktak lake, Manipur)
    loktak lake Manipur - Banned Indian PlacesFor Tourist - Hindi Information
    भारत के उत्तर-पूर्व में सबसे बड़े साफ पानी की लेक के रुप में प्रख्यात लोकतक झील झील में कई जगह पर भूखंड के टुकड़े तैरते हुए दिखाई देते हैं, जिनमें पानी भरा हुआ होता है। इन टुकड़ों को फुमदी के नाम से जाना जाता है, जो मिट्टी, पेड़-पौधों और जैविक पदार्थों से मिलकर कठोर संरचना में बने होते हैं। अपने अनोखेपन के कारण ये झील लोगों को खूब आकर्षित करती है। हालांकि, इस झील को देखने के लिए भी इनर लाइन परमिट लेने की आवश्यकता है।

    चांगु लेक, सिक्किम (Changu lake, Sikkim)
    Changu Lake - Banned Indian PlacesFor Tourist - Hindi Information
    चांगु लेक सिक्किम का प्रमुख टूरिस्ट डेस्टिनेशन है। सर्दियों में इस झील का पानी पूरी तरह से जम जाता है। हालांकि, यहां पर भी आने के लिए इनर लाइन परमिट लेने की आवश्यकता होती है।
    जीरो, अरुणाचल प्रदेश (Ziro, Arunachal Pradesh)
    Ziro Arunachal Pradesh - Banned Indian PlacesFor Tourist - Hindi Information
    अरुणाचल प्रदेश में भी इनर लाइन परमिट लागू है। इस कारण से यहां भी परमिशन लेकर ही कोई जा सकता है। यहां पर कई शानदार टूरिस्ट अट्रैक्शन हैं, लेकिन इनमें सबसे पॉपुलर जीरो वैली है। इस वैली को वर्ल्ड हेरिटेज साइट्स में शुमार किया जाता है। बता दें कि इस वैली के पास ही आपातानी ट्राइब से जुड़े लोग रहते हैं।
    आइजोल, मिजोरम (Izol, Mizoram)
    Izol Mizoram - Banned Indian PlacesFor Tourist - Hindi Information
    मिजोरम की राजधानी आइजोल में कई शानदार प्लेसेस हैं, जिसे देखने के लिए दुनियाभर से लोग आते हैं। इनमें म्यूजियम, हिल स्टेशन, स्थानीय लोग और उनकी कला शामिल है। हालांकि, मिजोरम में भी इनर लाइन परमिट लागू है। इस वजह से यहां लिमिटेड टाइम पीरियड के लिए कोई व्यक्ति परमिशन लेकर जा सकता है।

    पीयूष गोयल- जिन्होंने पाँच अदभुत तरीकों से लिखी है पुस्तकें

    By: Secret On: 17:30
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  • पीयूष गोयल- जिन्होंने पाँच अदभुत तरीकों से लिखी है पुस्तकें

    उल्‍टे अक्षरों से लिख गई भागवत गीता (Bhagwat Gita)
    Piyush Goel- Who wrote books in 5 amazing way
    आप इस भाषा को देखेंगे तो एकबारगी भौचक्के रह जायेंगे। आपको समझ में नहीं आयेगा कि यह किताब किस भाषा शैली में लिखी हुई है। पर आप जैसे ही दर्पण ( शीशे‌ ) के सामने पहुंचेंगे तो यह किताब खुद-ब-खुद बोलने लगेगी। सारे अक्षर सीधे नजर आयेंगे। इस मिरर इमेज किताब को पीयूष ने लिखा है। मिलनसार पीयूष मिरर इमेज की भाषा शैली में कई किताबें लिख चुके हैं।
    सुई से लिखी मधुशाला ( Madhushala )
    Piyush Goel- Who wrote books in 5 amazing way
    पीयूष ने एक ऐसा कारनामा कर दिखाया है कि देखने वालों आँखें खुली रह जाएगी और न देखने वालों के लिए एक स्पर्श मात्र ही बहुत है। पीयूष ने पूछने पर बताया कि सुई से पुस्तक लिखने का विचार क्यों आया ? अक्सर मुझ से ये पूछा जाता था कि आपकी पुस्तकों को पढ़ने के लिए शीशे की जरूरत पड़ती है। पढ़ना उसके साथ शीशा, आखिर बहुत सोच समझने के बाद एक विचार दिमाग में आया क्यों न सूई से कुछ लिखा जाये सो मैंने सूई से स्वर्गीय श्री हरिवंशराय बच्चन जी की विश्व प्रसिद्ध पुस्तक ‘मधुशाला’ को करीब 2 से ढाई महीने में पूरा किया। यह पुस्तक भी मिरर इमेज में लिखी गयी है और इसको पढ़ने लिए शीशे की जरूरत नहीं पड़ेगी क्योंकि रिवर्स में पेज पर शब्दों के इतने प्यारे मोतियों जैसे पृष्ठों को गुंथा गया है, जिसको पढ़ने में आसानी रहती हैं और यह सूई से लिखी ‘मधुशाला’ दुनिया की अब तक की पहली ऐसी पुस्तक है जो मिरर इमेज व सूई से लिखी गई है।
    मेंहदी कोन से लिखी गई गीतांजलि ( Gitanjali )
    Piyush Goel- Who wrote books in 5 amazing way
    पीयूष ने एक और नया कारनामा कर दिखाया है उन्होंने 1913 के साहित्य के नोबेल पुरस्कार विजेता रविन्द्रनाथ टैगोर की विश्व प्रसिद्ध कृति ‘गीतांजलि’ को ‘मेंहदी के कोन’ से लिखा है। उन्होंने 8 जुलाई 2012 को मेंहदी से गीतांजलि लिखनी शुरू की और सभी 103 अध्याय 5 अगस्त 2012 को पूरे कर दिए।इसको लिखने में 17 कोन तथा दो नोट बुक प्रयोग में आई हैं। पीयूष ने श्री दुर्गा सप्त शती, अवधी में सुन्दरकांड, आरती संग्रह, हिंदी व अंग्रेजी दोनों भाषाओं में श्री साईं सत्चरित्र भी लिख चुके हैं। ‘रामचरितमानस’ (दोहे, सोरठा और चौपाई ) को भी लिख चुके हैं।
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    कील से लिखी ‘पीयूष वाणी’
    Piyush Goel- Who wrote books in 5 amazing way
    अब पीयूष ने अपनी ही लिखी पुस्तक ‘पीयूष वाणी’ को कील से ए-फोर साइज की एल्युमिनियम शीट पर लिखा है। पीयूष ने पूछने पर बताया कि कील से क्यों लिखा है ? तो उन्होंने बताया कि वे इससे पहले दुनिया की पहली सुई से स्वर्गीय श्री हरिवंशराय बच्चन जी की विश्व प्रसिद्ध पुस्तक ‘मधुशाला’ को लिख चुके हैं। तो उन्हें विचार आया कि क्यों न कील से भी प्रयास किया जाये सो उन्होंने ए-फोर साइज के एल्युमिनियम शीट पर भी लिख डाला।
    कार्बन पेपर की मदद से लिखी ‘पंचतंत्र’ ( Carbon paper written ‘Panchatantra’ )
    Piyush Goel- Who wrote books in 5 amazing way
    Piyush Goel- Who wrote books in 5 amazing way
    पीयूष गोयल
    गहन अध्ययन के बाद पीयूष ने कार्बन पेपर की सहायता से आचार्य विष्णुशर्मा द्वारा लिखी ‘पंचतंत्र’ के सभी ( पाँच तंत्र, 41 कथा ) को लिखा है। पीयूष ने कार्बन पेपर को (जिस पर लिखना है) के नीचे उल्टा करके लिखा जिससे पेपर के दूसरी और शब्द सीधे दिखाई देंगे यानी पेज के एक तरफ शब्द मिरर इमेज में और दूसरी तरफ सीधे।