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Tuesday, 24 April 2018

भगवान भोलेनाथ के ऐसे रहे जिन्हें सुनकर चौक जाएंगे आप ( भाग - 2 )

By: Secret On: 07:00
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  •  भगवान भोलेनाथ के ऐसे रहे जिन्हें सुनकर चौक जाएंगे आप ( भाग-2)




    14. शिव चिह्न


    वनवासी से लेकर सभी साधारण व्‍यक्ति जिस चिह्न की पूजा कर सकें, उस पत्‍थर के ढेले, बटिया को शिव का चिह्न माना जाता है। इसके अलावा रुद्राक्ष और त्रिशूल को भी शिव का चिह्न माना गया है। कुछ लोग डमरू और अर्द्ध चन्द्र को भी शिव का चिह्न मानते हैं, हालांकि ज्यादातर लोग शिवलिंग अर्थात शिव की ज्योति का पूजन करते हैं। 

    15. शिव की गुफा

    शिव ने भस्मासुर से बचने के लिए एक पहाड़ी में अपने त्रिशूल से एक गुफा बनाई और वे फिर उसी गुफा में छिप गए। वह गुफा जम्मू से 150 किलोमीटर दूर त्रिकूटा की पहाड़ियों पर है। दूसरी ओर भगवान शिव ने जहां पार्वती को अमृत ज्ञान दिया था वह गुफा 'अमरनाथ गुफा' के नाम से प्रसिद्ध है।


    16. शिव के पैरों के निशान

    श्रीपद- श्रीलंका में रतन द्वीप पहाड़ की चोटी पर स्थित श्रीपद नामक मंदिर में शिव के पैरों के निशान हैं। ये पदचिह्न 5 फुट 7 इंच लंबे और 2 फुट 6 इंच चौड़े हैं। इस स्थान को सिवानोलीपदम कहते हैं। कुछ लोग इसे आदम पीक कहते हैं।

    रुद्र पद- तमिलनाडु के नागपट्टीनम जिले के थिरुवेंगडू क्षेत्र में श्रीस्वेदारण्येश्‍वर का मंदिर में शिव के पदचिह्न हैं जिसे 'रुद्र पदम' कहा जाता है। इसके अलावा थिरुवन्नामलाई में भी एक स्थान पर शिव के पदचिह्न हैं।

    तेजपुर- असम के तेजपुर में ब्रह्मपुत्र नदी के पास स्थित रुद्रपद मंदिर में शिव के दाएं पैर का निशान है।

    जागेश्वर- उत्तराखंड के अल्मोड़ा से 36 किलोमीटर दूर जागेश्वर मंदिर की पहाड़ी से लगभग साढ़े 4 किलोमीटर दूर जंगल में भीम के मंदिर के पास शिव के पदचिह्न हैं। पांडवों को दर्शन देने से बचने के लिए उन्होंने अपना एक पैर यहां और दूसरा कैलाश में रखा था।

    रांची- झारखंड के रांची रेलवे स्टेशन से 7 किलोमीटर की दूरी पर 'रांची हिल' पर शिवजी के पैरों के निशान हैं। इस स्थान को 'पहाड़ी बाबा मंदिर' कहा जाता है।


    17. शिव के अवतार

    वीरभद्र, पिप्पलाद, नंदी, भैरव, महेश, अश्वत्थामा, शरभावतार, गृहपति, दुर्वासा, हनुमान, वृषभ, यतिनाथ, कृष्णदर्शन, अवधूत, भिक्षुवर्य, सुरेश्वर, किरात, सुनटनर्तक, ब्रह्मचारी, यक्ष, वैश्यानाथ, द्विजेश्वर, हंसरूप, द्विज, नतेश्वर आदि हुए हैं। वेदों में रुद्रों का जिक्र है। रुद्र 11 बताए जाते हैं- कपाली, पिंगल, भीम, विरुपाक्ष, विलोहित, शास्ता, अजपाद, आपिर्बुध्य, शंभू, चण्ड तथा भव।


    18. शिव का विरोधाभासिक परिवार

    शिवपुत्र कार्तिकेय का वाहन मयूर है, जबकि शिव के गले में वासुकि नाग है। स्वभाव से मयूर और नाग आपस में दुश्मन हैं। इधर गणपति का वाहन चूहा है, जबकि सांप मूषकभक्षी जीव है। पार्वती का वाहन शेर है, लेकिन शिवजी का वाहन तो नंदी बैल है। इस विरोधाभास या वैचारिक भिन्नता के बावजूद परिवार में एकता है।

    19. ति‍ब्बतस्थित कैलाश पर्वत पर उनका निवास है। जहां पर शिव विराजमान हैं उस पर्वत के ठीक नीचे पाताल लोक है जो भगवान विष्णु का स्थान है। शिव के आसन के ऊपर वायुमंडल के पार क्रमश: स्वर्ग लोक और फिर ब्रह्माजी का स्थान है। 

    20.शिव भक्त 

    ब्रह्मा, विष्णु और सभी देवी-देवताओं सहित भगवान राम और कृष्ण भी शिव भक्त है। हरिवंश पुराण के अनुसार, कैलास पर्वत पर कृष्ण ने शिव को प्रसन्न करने के लिए तपस्या की थी। भगवान राम ने रामेश्वरम में शिवलिंग स्थापित कर उनकी पूजा-अर्चना की थी।

    21.शिव ध्यान

        शिव की भक्ति हेतु शिव का ध्यान-पूजन किया जाता है। शिवलिंग को बिल्वपत्र चढ़ाकर शिवलिंग के समीप मंत्र जाप या ध्यान करने से मोक्ष का मार्ग पुष्ट होता है।


    22.शिव मंत्र 

      दो ही शिव के मंत्र हैं पहला- ॐ नम: शिवाय। दूसरा महामृत्युंजय मंत्र- ॐ ह्रौं जू सः। ॐ भूः भुवः स्वः। ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्‌। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्‌। स्वः भुवः भूः ॐ। सः जू ह्रौं ॐ ॥ है।

    23.शिव व्रत और त्योहार 

      सोमवार, प्रदोष और श्रावण मास में शिव व्रत रखे जाते हैं। शिवरात्रि और महाशिवरात्रि शिव का प्रमुख पर्व त्योहार है।


    24.शिव प्रचारक 
      भगवान शंकर की परंपरा को उनके शिष्यों बृहस्पति, विशालाक्ष (शिव), शुक्र, सहस्राक्ष, महेन्द्र, प्राचेतस मनु, भरद्वाज, अगस्त्य मुनि, गौरशिरस मुनि, नंदी, कार्तिकेय, भैरवनाथ आदि ने आगे बढ़ाया। इसके अलावा वीरभद्र, मणिभद्र, चंदिस, नंदी, श्रृंगी, भृगिरिटी, शैल, गोकर्ण, घंटाकर्ण, बाण, रावण, जय और विजय ने भी शैवपंथ का प्रचार किया। इस परंपरा में सबसे बड़ा नाम आदिगुरु भगवान दत्तात्रेय का आता है। दत्तात्रेय के बाद आदि शंकराचार्य, मत्स्येन्द्रनाथ और गुरु गुरुगोरखनाथ का नाम प्रमुखता से लिया जाता है।



    25.शिव महिमा 
      शिव ने कालकूट नामक विष पिया था जो अमृत मंथन के दौरान निकला था। शिव ने भस्मासुर जैसे कई असुरों को वरदान दिया था। शिव ने कामदेव को भस्म कर दिया था। शिव ने गणेश और राजा दक्ष के सिर को जोड़ दिया था। ब्रह्मा द्वारा छल किए जाने पर शिव ने ब्रह्मा का पांचवां सिर काट दिया था।


    Monday, 23 April 2018

    भारत के कुछ ऐसे रहस्य जो आज तक हैं अनसुलझे

    By: Secret On: 08:00
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  • भारत के कुछ ऐसे रहस्य जो आज तक हैं अनसुलझे

    1. मुंहनोचवा – 2002 में उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में एक विचित्र सी वास्तु देखने को मिली थी जिसने अपने हमले से कई लोगों को अपना शिकार बनाया था। इस घटना में कई लोगों को गंभीर चोटें आई, कुछ लोगों की तो मौत हो गई थी। उस समय यहाँ के लोगों में इसका बहुत ज्यादा खौफ हो गया था जिसे इन्होंने मुंहनोचवा नाम दिया। लेकिन आज तक कोई पता नहीं लगा पाया की ये वस्तु क्या थी और क्यों हमले करती थी।
    2. छत्तीसगढ़ की रहस्यमयी रॉक पेंटिंग – छत्तीसगढ़ के चमारा क्षेत्र की गुफाओं में कुछ रॉक पेंटिंग्स बनी हैं जिन्हें 10,000 साल पुरानी रॉक पेंटिंग्स बताया जाता है। इस पेंटिंग में एलियंस की उड़नतश्तरी (UFO) का चित्र बना है जिसमे दिखाया गया है की कुछ एलियंस मानवों का अपहरण कर रहे हैं। कुछ लोगों का कहना है की उनके पूर्वजों के अनुसार यहाँ से वाकई में एलियंस इंसानों का अपहरण कर साथ ले जाते थे। लेकिन आज तक कोई ये पता नहीं लगा पाया की इन पेंटिंग का असली रहस्य क्या है और किसने ये पेंटिंग बनाई हैं।


    3. क्या वाकई ताजमहल एक शिव मंदिर था? – ताजमहल के बारे में सब जानते हैं की ये शाहजहां ने अपनी बेगम मुमताज की याद में बनवाया था लेकिन एक मशहूर इतिहासकार और प्रोफेसर P.N OAK का दावा है की ये ताजमहल कोई प्यार की निशानी नहीं है बल्कि ये एक शिव मंदिर था जिसे तेजोमहल कहा जाता था। प्रोफेसर P.N OAK अपने कई तर्क में ताजमहल का शिव मंदिर होने का दावा करते हैं लेकिन इनके इस दावे पर कुछ ख़ास गौर नहीं किया गया क्योंकि ऐसे में देश में साम्प्रदायिक हिंसा भी हो सकती है। लेकिन इनका ये दावा एक संदेह जरूर छोड़ता है की क्या है असल में ताजमहल की हकीकत?

    4. ज्वाला जी मंदिर की अखंड ज्योति – हिमाचल प्रदेश में स्थित ज्वाला देवी मंदिर में एक अखंड ज्योति है जो हमेशा जलती रहती है कभी नहीं बुझती। लेकिन आज तक कोई पता नहीं लगा पाया की क्या कारण है की ये ज्योति बुझती ही नहीं है। ऐसा भी कहा जाता है की अकबर ने इस ज्योति को कई बार बुझाने की कोशिश की लेकिन उसे सफलता नहीं मिली।


    5. निधिवन, वृन्दावन – वृन्दावन के निधिवन मंदिर के बारे में ऐसी मान्यता है की यहाँ के परिसर के रंगमहल में आज भी भगवान कृष्ण का वास है। कहा जाता है की रंगमहल में भगवान कृष्ण रात के समय विश्राम करते हैं और यहाँ के पुजारी रोज रंगमहल में माखन-मिश्री का प्रसाद रखते हैं और बिस्तर बिछाते हैं और सुबह देखने पर बिस्तर ऐसा बिखरा होता है जैसे इस पर कोई सोया हो और प्रसाद भी ग्रहण किया हो। लेकिन इसके पीछे का रहस्य कोई नहीं जान पाया की वाकई में यहाँ भगवान कृष्ण का वास है या इसकी हकीकत कुछ और है।


    6. जयगढ़ के किले का रहस्यमयी ख़जाना – पिंक सिटी जयपुर के जयगढ़ के किले में भी एक रहस्य छुपा है जिसका सच आज तक कोई नहीं खोज पाया है। कहा जाता है की राजा मान सिंह ने अकबर से छुपाकर यहाँ हीरे-जवाहरात और करोड़ों की संपत्ति छुपा कर रखी थी। कई बार इस खजाने को ढूंढने की कोशिश की गई लेकिन आज तक इस खजाने का पता नहीं चल पाया।


    7. भारत-चीन बॉर्डर पर बना UFO Base – भारत और चीन की सीमा पर स्थित Kongka-La Pass भी अपने आप में एक रहस्य छुपाये हुए है। यहाँ लोग UFO Base होने का दावा करते हैं क्योंकि समय समय पर यहाँ लोगों को उड़न तश्तरी और अजीब से प्राणी दिखाई देते हैं। इस जगह पर कई वैज्ञानिक शोध कर चुके हैं और उन्हें खुद अजीबोगरीब चीजों का अहसास हुआ है। लेकिन इनका असली रहस्य आज तक कोई नहीं खोज पाया।


    Sunday, 22 April 2018

    भारतीय इतिहास के 14 हैरतंगेज़ और रोमांचित रहस्य !

    By: Secret On: 16:00
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  • भारतीय इतिहास के 14 हैरतंगेज़ और रोमांचित रहस्य !

    अगर आप कठिन से कठिन पहेलियाँ बुझाने में माहिर है और ऐतिहासिक किस्सों में दिलचस्पी रखते है तो भारतीय इतिहास के इन अनसुलझे रहस्यों को जानकर आश्चर्यचकित हो जायेंगे।
    इतिहास हमेशा कुछ न कुछ सिखाता है पर उसमे अनगिनत रहस्य समाये होते है जिसे इंसान हर कदम पर सुलझाने की कोशिश करता है। कुछ रहस्य नये होते है और कुछ सदियों पुराने! भारतीय इतिहास में ऐसी कई कहानियाँ मौजूद है, जिसमे ढेरों राज़ छिपे है, जिन्हें जानने के लिये वैज्ञानिक और इतिहासकार हमेशा से प्रयत्न करतेआ रहे है।
    आईये ऐसी ही कुछ कहानियों से रूबरू होते है। अगर आप इन्हें सुलझा सकते है तो कमेंट बॉक्स में जरूर लिखे। क्या पता इन अनसुलझे प्रश्नों का उत्तर आप ही में से किसी के पास हो!

    1. गुमनाम सिंधु घाटी सभ्यता



    सिंधु घाटी सभ्यता भारत की सबसे प्राचीन संस्कृति है। मिस्र (इजिपशियन) और मेसोपोटामियन सभ्यता से भी  सिंधु घाटी सभ्यता बहूत पुरानी, बड़ी, रहस्यमय और अनेक अनसुलझे सवालो से भरी पड़ी है। जिन लोगो ने इस सभ्यता की शुरुआत की उनके बारे में पुख्ता सबूत अभी तक नहीं मिले। इतना ही नहीं, उनके द्वारा इस्तेमाल किये गये 4000 साल पुराने सिंधु चित्रमय लिपि को भी आजतक कोई समझ नहीं पाया। उस जमाने की संस्कृति और उससे संबधित असंख्य रहस्य धरती की गोद में समा गये इसलिये इस सभ्यता को समझना मुश्किल है। सभ्यता को लेकर बहुत सारे सिद्धांत दिये गये है पर कोई भी निर्णायक नहीं है।

    2. चरामा की एलियन नुमा शैल चित्र

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    छत्तीसगढ़ के बस्तर आदिवासी इलाके में चरामा गाँव के पास पुरातन गुफाए मिली है जहा के पत्थरो पे दुसरे ग्रह के लोगो जैसे दिखने वाले चित्र पाये गये। गुफाओ की खोज करने वाले पुरातत्ववादी जे. आर. भगत कहते है कि चित्रो में चेहरे अलग तरह से दिखते है और कुछ चित्र उड़न तश्तरी के भी है।इससे जुडी हुयी एक कहानी गांववाले बताते है जिसमे रोहेला नामक लोग उड़न तश्तरी से यहाँ आते है और गांववालो का अपहरण करते है। छत्तीसगढ़ पुरातत्व विभाग ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन और अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) को इस मुहीम में मदद करने की मांग की है।

    3. बिहार की सोन भंडार गुफाएं

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    बिहार की सोन भंडार गुफाएं एक बड़े पत्थर से बनायीं हुयी है और कहा जाता है कि ये गुफाएं मगधन राजा बिम्बिसार के ज़माने की है। लोगो का मानना है कि बिम्बिसार राजा अपने खजाने को छुपाने के लिये इन गुफाओ का इस्तेमाल करता था। सोन भंडार का मतलब है ‘सोने का खजाना’। जब बिम्बिसार को उसके पुत्र अजातशत्रु ने कारागार  में डाल दिया तब उसके आदेश से उसकी बीवी ने राज्य का खजाना इस गुफाओ में छिपाया था। यहा पर मिली हुयी संखलिपि में लिखित शिलालेख है जिनसे शायद इस खजाने तक पहुँचने की चाबी मौजूद है। अंग्रेजो ने खजाने को हासिल करने के लिये दरवाजो पर तोप के गोले बरसाये थे जिनके निशान आज भी दिखते है पर उन्हें कुछ भी नहीं मिला था।

    4. नौ अपरिचित व्यक्ति

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    भारत के ‘नौ अपरिचित व्यक्ति’दुनिया भर के सबसे बड़े रहस्यों में से एक माने जाते  है। जानकारों का मानना है कि इसवी सन पूर्व 273 में जब कलिंगा का युद्ध हुआ था जिसमे 100,000 लोगो की जाने गयी थी, उसके बाद सम्राट अशोक ने इन नौ व्यक्तियों का गुट बनाया था। नौ में से हर एक व्यक्ति को एक विषय पर बहुत सारा ज्ञान था, जिसमे पर्यटन, विज्ञान और युद्ध कौशल जैसे विषय शामिल थे। उन सभी 9 लोगो के बारे में पूरी जानकारी नहीं है पर ऐसा मानना है कि आज भी उनके वंशज मौजूद है।

    5. मीर ओस्मान अली का खजाना

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    हैदराबाद के असफ जाह शासन के सातवे और आखरी निज़ाम मीर ओस्मान अली खान अपने गहनो और खजाने के संग्रह के लिये प्रसिद्ध थे। सन 1937 में टाइम मैगज़ीन ने उन्हें दुनिया के सबसे अमीर आदमी का सम्मान दिया। उनके द्वारा संग्रहित की गयी सभी गहनों और खजाने को उनके मृत्यु के बाद भी कोई ढूंड नहीं पाया था। लोगो का कहना है कि सारा खजाना हैदराबाद के कोठी पैलेस में छुपा है जहा निजाम रहते थे।

    6. लामा तेनझीन की 500 साल पुरानी ममी

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    हिमालय में स्पिटी के पास घुइन नामक एक छोटासा क़स्बा है जहा पुराने ज़माने में प्रचलित, खुद की ममी बनाने की संस्कृति देखने को मिलती है ।यहा पर एक छोटे से कमरे में 500 साल की ममी रखी गयी है जिसे कांच से सरंक्षित किया गया है। पंद्रहवी शताब्दी के महंत सांघा तेनझीन की ये ममी है, जिसकी त्वचा और सर के बाल आज भी साबुत है। ये ममी सबसे पहली प्राकृतिक ममी है।

    7. जयगढ़ किले का शाही खजाना

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    जयगढ़ का जैवाना किला दुनिया के सबसे बड़े पहियों वाली तोपो के लिये प्रसिद्द तो है पर साथ साथ साजिश और खजानों की कहानियो के लिये भी प्रसिद्ध है। ऐसा कहा जाता है कि अफगानिस्तान की जंग जीतने के बाद अकबर के रक्षा मंत्री मान सिंग ने युद्ध में जीता हुआ खजाना इसी किले में छुपा के रखा था। सन 1977 में तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने किले में खजाना और पानी की टंकिया ढूंढने के लिये एक मुहीम चलायी। पर इसमे कुछ भी नहीं पाया गया। इस मुहीम की पूरी कहानी महारानी गायत्री देवी द्वारा लिखी गयी ‘A Princess Remembers’ नामक किताब में पढने को मिलता है।

    8. नानासाहेब का लापता होना

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    नानासाहेब 1857 के विद्रोह के नेता थे जिन्होंने ब्रिटिश शासन को ललकारा था। विद्रोह के बाद नानासाहेबअचानक एक दिन गायब हो गए। इतिहास में किसीको पता नहीं है कि उनके द्वारा लूटा हुआ खजाना कहा है। कहानी ये भी है कि वो खजाने के साथ नेपाल चले गये और ब्रिटिशो के हाथ नहीं लगे। ब्रिटिश काल से नानासाहेब और उनका खजाना एक रहस्य बना हुआ है।

    9. कुलधरा- भूतो से पीड़ित गाँव

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    जैसलमेर के पश्चिम दिशा में 20 किमी के बाद भूतो से पीड़ित कुलधारा गाँव है जहा 100 साल पहले पालीवाल ब्राह्मण रहते थे। लगबग 1500 लोग एक ही रात में इस गाँव को छोड़कर निकल गये। किसी को खबर नहीं थी कि वो कहा और क्यों गये पर लोगो का मानना है कि दुष्ट शासक सलीम सिंग और उसके लगाये गये लगान की वजह से लोग गाँव छोड़कर चले गए, और जाते जाते गाँव को एक श्राप भी देकर गये। उस घटना के बाद जिसने भी गाँव में रहने का निश्चय किया उसकी मौत हो गयी इसी वजह से ये गाँव  आजतक नहीं बसा।

    10. चपाती आंदोलन

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    1857 के विद्रोह के दौरान चपाती आंदोलन शुरू किया गया था, जिसके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है इसलिये आजतक यह एक रहस्य बना हुआ है। कुछ अध्ययन द्वारा ये बताया गया है कि कोलेरा से प्रभावित लोगो को चपाती पहूचाना इसका उद्देश था पर इस आंदोलन का असली मकसद आज भी किसीको नहीं पता। इतिहासकारो का मानना है कि इस आंदोलन से 1857 में ब्रिटिश राज में खलबली मची थी।

    11. नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की मृत्यु

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    नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की मृत्यु के बारे में असंख्य कहानियाँ प्रचलित है, जो आज भी एक रहस्य बना हुआ है। कोई नहीं जानता कि तायपेई से टोकियो जाने वाले विमान में उनके साथ क्या हुआ। आजाद भारत का ये एक अनसुलझा सवाल है। उनके गायब होने के बाद ऐसा कहा जाता है कि वो भारत वापस आये थे और उत्तर भारत में साधू के वेश में रहते थे। इस बात का सबूत नहीं है पर ऐसा माना जाता है कि उत्तर प्रदेश के फैजाबाद में रहने वाले साधू गुमनामी बाबा ही सुभाष चन्द्र बोस थे।

    12. लालबहादुर शास्त्री की असामयिक मौत

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    भारत के प्रधानमंत्री बनने के महज 2 साल बाद दुसरे देश में लाल बहादुर शास्त्री की अचानक मौत होना देश के लिये एक दुर्भाग्य था और सबसे बड़ा रहस्य भी। सन 1966 में ताशकन्त देश में दिल का दौरा पड़ने से उनकी मौत हुयी। नीले धब्बे और कटने के निशान उनके शरीर पर थे पर न तो उनका पोस्ट मार्टम किया गया और न ही उनकी मौत से जुड़े कोई दस्तावेज़ सरकार को दिये गये। इसलिये उनकी मौत पर हमेशा एक प्रश्नचिन्ह बना रहा।

    13. शांतीदेवी का पुनर्जन्म

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    एक बच्ची का दिल्ली में पुनर्जन्म हुआ जिसका नाम शांतिदेवी था। शांतिदेवी ने अपने घरवालो को उसके पहले जन्म के घर और घरवालो की जानकारी दी। महात्मा गाँधी द्वारा स्थापन की गयी एक कमिटी ने शांतिदेवी द्वारा दी गयी जानकारी को टटोला और रिकॉर्ड किया।

    14. एक योगी कुछ खाये-पिये बिना जी रहा है

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    अहमदाबाद से 200 किमी दूर अम्बाजी गाँव में चुनरीवाला माताजी नाम से मशहूर एक कमजोर बुर्जुर्ग तपस्वी रहते है। इनका असली नाम प्रल्हाद जानी है। इनका कहना है कि 11 साल की उम्र से वो देवी अम्बा के  भक्त बने और अध्यात्म से जुडे। वे  कहते  है कि देवी ने उन्हें आशीर्वाद देकर अमृत दिया जिसे वो तालू के छेद से शरीर में पहुँचता रहता है। सन 2003 में 21 लोगो की मेडिकल रिसर्च टीम ने इस योगी पर विडियो द्वारा नज़र रखी पर कुछ निष्कर्ष नहीं निकला। योगी का कहना है कि सन 1940 से वो कुछ भी खाए पिए बगैर जी रहे है।

    प्रकृति के 12 रहस्य जो अभी तक अनसुलझे है

    By: Secret On: 07:00
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  • प्रकृति के रहस्य जो अभी तक अनसुलझे है

    खुला आसमान और विशाल धरती के बीच इंसान प्रकृति का एक अदना सा हिस्सा है। इंसान कितना भी ज्ञान अर्जित कर ले, कितना भी विज्ञान को जान जाये लेकिन प्रकृति हर बार कुछ ऐसा कर जाती है कि हर बार उसके करिश्मे के आगे विज्ञानं भी घुटने टेक देता है।
    आज हम ऐसी ही कुछ रहस्यमयी बातों को आपके सामने पेश कर रहें हैं-
    1. करोड़ों साल पुराना धातु का हथौड़ा
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    हमने अपनी इतिहास की किताबों से यही सीख है, की इंसान ने धातु का इस्तेमाल कुछ 10 हज़ार सालों पहले शुरू किया था। लेकिन 1934 में पुरातत्व विभाग को अपनी खोज में मिला ये हथौड़ा भ्रमित कर ही देता है। कारण यह है कि इस हथौड़े में लगी लकड़ी कोयला बन चुकी है। और कोयला बनने में करोड़ो वर्ष लग जातें हैं।
    2. मरुस्थल में बना शिलाओं का घेरा
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    सहारा मरुस्थल के बीचो-बीच कुछ बड़े पत्थरों का एक बड़ा घेरा मिला। इसकी खोज पुरातत्व विशेषज्ञों ने 1973 में की। वैज्ञानिकों का मानना है कि पाषाण काल में इनका इस्तेमाल खगोलशास्त्रियों के द्वारा ग्रह-नक्षत्रों की खोज के लिए किया जाता था। लेकिन आज का मनुष्य इस कला से अनभिज्ञ है।

    3. शेंग मरुस्थल में मिली पत्थर पर बनी सीढ़ी लकीरें
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    चीन में गानसू शेंग रेगिस्तान के बीचो-बीच कुछ लकीरें मिली, जिन्हें चीनी मोज़ेक लाइन का नाम दिया गया। इसे मोगाओं गुफ़ा के आस-पास बनाया गया था। चौंकाने वाली बात यह है कि पत्थरों के ऊबड़-खाबड़ होने के बाद  भी यह लकीरें एकदम सटीक और सीधी हैं।
    4. पाषाणकालीन पत्थर का खिलौना
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    पुरातत्व विभाग को 1889 में ईदाहो के नाम्पा में एक पत्थर की गुड़िया मिली, जो बहुत ही पुरानी थी। इसे देख कर वैज्ञानिकों ने यह अनुमान लगाया कि पाषाणकालीन यह गुड़िया मानव के धरती पर अस्तित्व पर सवाल उठा रही थी। वैज्ञानिकों के हिसाब से यह गुड़िया करोड़ों वर्ष पुरानी थी।

    5. उल्का अवशेष में फंसा धातु का पेंच
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    वैज्ञानिकों को 1998 में हुई शोध में उल्का के अवशेष की जांच करते समय एक पत्थर का टुकड़ा मिला था। जिसमें एक लोहे का पेंच था। वैज्ञानिकों के माने तो यह पत्थर 30 करोड़ साल पुराना है और लेकिन उस समय तक धरती और किसी भी प्रजाति ने जन्म नहीं लिया था।
    6. पत्थर पर बना प्राचीन विमान का चित्र
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    पाषाणकाल में मनुष्य अक्सर पत्थरों पर चित्रकारी किया करता था। 5000 ईसा पूर्व की इस कला के नमूने में आपको एक विमान दिख रहा होगा। वैज्ञानिक आज भी स्तब्ध हैं कि क्या उस समय ऐसा कोई विज्ञान था? और अगर नहीं था तो मनुष्य ने उस काल में इसकी कल्पना कैसे की होगी…!
    7. चलने वाला पत्थर
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    कैलिफोर्निया की डेथ वैली के खिसकते पत्थर आज भी वैज्ञानिकों के लिए असुलझी पहेली बने हुए हैं। 1972 में इस रहस्य का खुलासा करने के लिए वैज्ञानिकों की एक टीम गठित की गई थी, लेकिन वह टीम पूरी तरह से असफल रही और आज भी यह एक अनसुलझा रहस्य ही है।

    8. मेक्सिकन पिरामिड में ब्राजील के अभ्रक
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    प्राचीन मेक्सिको शहर की दीवार अभ्रक की बनी हुई है। लेकिन अभ्रक तो ब्राज़ील में मिलता है, जो यहां से हज़ारों मील दूर है। इसका उपयोग ऊर्जा प्रदान करने के लिए किया जाता है। तो उस वक़्त के कारीगर इसे लेट कैसे थें और इसका इस्तेमाल क्यों किया जाता था, ये दोनों बातें वैज्ञानिकों को परेशां करती रहीं हैं।
    9. भीमकाय मानव के जीवाश्म
    Unsolved-Mysteries-9
    1895 में आयरलैंड में पुरातत्व विभाग की खोज में खुदाई के दौरान 12 फीट लम्बा एक मानवीय जीवाश्म मिला।यह मानव आधुनिक मानव होमो शेपिएन्स से बिल्कुल अलग था, जिसके पैर में 6 उंगलिया थीं और उसके हाथ 4 फीट लम्बे थे।
    10. गुप्त अटलांटिस
    Unsolved-Mysteries-10
    पुरातत्व विभाग का मानना है कि उन्होंने अटलांटिस की खोज कर ली है, लेकिन आज भी इसके कई राज दफ़न हैं।
    11. विशाल इंसानी जबड़ा
    Unsolved-Mysteries-11
    अमेरिका के नेवाडा में 1911 में एक भीमकाय इंसानी जबड़ा मिला, कहा जाता है कि नेवाडा में लाल बाल वाले 12 फीट लम्बे इंसान रहा करते थे। इसके अलावा 1931 में इंसानी कंकाल भी मिले, जिनकी लम्बाई 12 फीट थी। आखिर ये थे क्या इंसान या कोई अलग ही प्रजाति?
    12. कंकाल में फंसी एल्युमीनियम की कील
    Unsolved-Mysteries-12
    त्रानसिलवेनिया की मुर्से नदी में 1974 में एक 20 हज़ार साल पुराने मैस्तदन की हड्डियों से एक एल्युमीनियम की एक कील मिली, जिसे वैज्ञानिकों ने 300 से 400 साल प्राचीन बताया। लेकिन, चौंकाने वाली बात यह थी की हड्डियों के बीच एल्युमीनियम आया तो आया कहाँ से?

    Sunday, 3 September 2017

    आज भी अनसुलझा है Patna के अगम कुएं का रहस्य

    By: Successlocator On: 10:00
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  • प्राचीन भारत के पाटलिपुत्र को आज पटना के नाम से जाना जाता है, जो बिहार का प्रमुख शहर होने के साथ-साथ उसकी राजधानी भी है. नन्द वंश और मौर्य वंश के शासन काल में यह शहर न केवल मगध की, बल्कि पूरे भारत की सांस्कृतिक और आर्थिक राजधानी के रूप में विख्यात रहा है. भारत का यह ऐतिहासिक शहर आज भी अपने आप में कई रहस्यों को समेटे हुए हैं, उन्ही रहस्यों में से एक हैं Patna का अगम कुआं.
    इतिहासकार बताते हैं इस कुएं का निर्माण आज से लगभग दो हजार साल पहले हुआ था. जब से यह कुआं अपने अस्तित्व में आया है, तब से यह कभी सूखा नहीं है. यह अपने आप में एक हैरान कर देने वाला सच है.

    आखिर यह कुआं अब तक सूखा क्यों नहीं यह अभी तक एक पहली बना हुआ है. इस कुएं के बारे में यह कहा जाता है कि गर्मियों के समय इसका पानी एक से डेढ़ फुट नीचे और बारिश के समय यह एक से डेढ़ फुट तक बढ़ जाता है.
    सम्राट अशोक के समय में अस्तित्व में आये इस कुएं के रहस्य को जानने के लिए तीन बार कोशिश की जा चुकी है. पहली बार 1932 में, दूसरी बार 1965 में, और तीसरी बार 1995 में लेकिन अगम कुएं के रहस्य को अब तक नहीं सुलझाया जा सका है.

    कुएं के बारे में यह कहा जाता है कि कई बार भयंकर अकाल और सूखा पड़ने पर भी इस कुएं का पानी नहीं सूखा. यहां तक कि बाढ़ आने पर भी कुएं के पानी में कोई ख़ास बढ़ोत्तरी भी नहीं हुई. स्थानीय लोग इस कुएं के बारे में एक और रहस्यमयी बात बताते हैं हुए कहते हैं की कुएं के पानी का रंग अक्सर बदलता रहता है.
    यहां के लोग इस कुएं का संबंध पश्चिम बंगाल में स्थित गंगा सागर से बताते हैं. लोगों का कहना है कि एक बार एक अंग्रेज की छड़ी गंगा सागर में गिर गयी जो बहते-बहते पाटलिपुत्र के इस कुएं में आ गयी थी.
    आज भी वह छड़ी कोलकाता के एक म्यूजियम में मौजूद है. सम्राट अशोक के समय में भारत आये चीनी दार्शनिकों ने भी अपनी पुस्तक में इस अजीब कुएं का जिक्र किया था.

    Saturday, 2 September 2017

    एक गुड़िया की सच्ची कहानी जिस पर 4 फिल्में बन चुकी हैं

    By: Successlocator On: 12:29
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  • एनाबेल क्रिएशन फिल्म रिलीज हो चुकी है. जिसमें एक ऐसी गुड़िया की कहानी बताई गई है जिसमें एक शैतान की आत्मा बसती है और जो उसे अपने घर में पनाह देता है वो उसी की जान लेने की कोशिश करती है. वैसे तो लोगों के दिलों में हमेशा से ये सवाल रहा है कि क्या नाम की चीज होती है? लेकिन इस दावे को सच करती है यह फिल्म जो एक सत्य घटना पर आधारित है और ये घटना हुई थी दशकों पहले अमेरिका में.

    हॉलीवुड में बनी चर्चित फिल्म ‘The Conjuring’ के चौथे पार्ट ‘एनाबेल क्रिएशन’ डरावनी फिल्मों में दिलचस्पी रखने वालों को अपनी ओर खींच रही है. ये चौथी फिल्म एक गुड़िया ‘Annabelle’ पर आधारित है. लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि ये इस गुड़िया की कहानी सिर्फ फिल्मी नहीं है, असल में ये असल जिंदगी में भी लोगों की जिंदगी में डर और खौफ भर चुकी है.
    ये गुड़िया आज भी अमेरिका के Occult विशेषज्ञ दंपति Ed और लॉरेन के म्यूजियम में रखी हुई है. आज तो ये किसी को परेशान नहीं कर रही, लेकिन आज से करीब 40 साल पहले इसने अमेरिका के कई परिवारों के जीवन में आतंक भर दिया था. देखने ये भले ही एक आम गुड़िया की तरह ही दिखती है और फिल्म की डॉल से अलग दिखती है, लेकिन इसकी कहानी फिल्म की कहानी से कहीं ज्यादा भयानक है.

    Annabelle की डरावनी कहानी 1970 में शुरू हुई थी, जब एक महिला ने अपनी बेटी डोना के जन्मदिन के लिए इस डॉल को खरीदा था. डोना इस डॉल को अपने फ्लैट पर ले आई थी. डोना यहां अपनी दोस्त Angie के साथ रहती थी. जैसे ही उन्होंने फ्लैट में कदम रखा, उन्होंने इस गुड़िया में कुछ अजीबोगरीब हलचल महसूस की.
    इसी घटना के बाद से ही उसकी हरकतें बढ़ने लगीं, जैसे कि इस डॉल को डोना के बेड पर बैठाया गया, लेकिन वो Angie के कमरे के बाहर बैठी मिलीं थी. लेकिन अभी तो ये शैतानी हरकतों की शुरुआत थी, अभी तो इसका असली आतंक सामने आना था. डोना का एक दोस्त लॉउ इस गुड़िया के आस-पास बेहद नर्वस हो जाता था. उसे ऐसा महसूस होता था कि इस डॉल में कोई बुरी आत्मा रहती है, लेकिन डोना और Angie ने उसकी बातों को टाल दिया. इसी के कुछ दिनों बाद ही उनके फ्लैट के आस-पास बच्चे की हेंड-राइटिंग में ‘हमें बचा लो’ और ‘लॉउ को बचा लो’ जैसे नोट्स मिलने लगे.

    डोना एक बार जब ऑफिस से घर वापस आईं तो उन्होंने पाया कि Annabelle के हाथ ‘खून’ से सने हुए थे. वो यूं तो अपने बेड पर बैठी थी, लेकिन उसके हाथों पर लाल रंग लगा हुआ था. इसके बाद जब इस फ्लैट का इतिहास खंगाला गया, तो पता चला कि अपार्टमेंट बनने से पहले ये जगह एक खाली मैदान था. यहां कई साल पहले एक 7 साल की बच्ची Annabelle Higgins की लाश पाई गई थी. जब इस डॉल को फ्लैट में लाया गया था, उस समय Annabelle की आत्मा इसी क्षेत्र में थी. ऐसा माना जाता है कि Annabelle इस डॉल की मुरीद हो गई और उसने इसके बेजान शरीर पर कब्जा कर लिया.
    इस फ्लैट में अब अजीबोगरीब घटनाएं बढ़ती जा रही थीं. एक रात लॉउ एक बेहद बुरे सपने से उठा और उसे घबराहट महसूस होने लगी. उसने आस-पास देखा तो पाया कि वो डॉल धीरे-धीरे उसकी तरफ बढ़ रही थी और अचानक सामने आकर उसका गला दबाने लगी. लॉउ अपने Senses खो चुका था और सुबह जब वो उठा तो उसे पता नहीं था कि जो भी उसके साथ हुआ वो सपना था या हकीकत.
    इसी के कुछ दिनों बाद लॉउ ने देखा कि Annabelle कुर्सी पर बैठी हुई थी, लेकिन वो जानते थे कि आमतौर पर उसे वहां नहीं रखा जाता था. जैसे ही वो उस गुड़िया की तरफ बढ़े, उन्हें ऐसा महसूस हुआ कि कोई उनके पीछे है. जब तक वो कुछ समझ पाता उसके पीठ पर किसी ने नाखूनों से वार कर दिए. उन्हें ऐसा लगा कि किसी ने उसकी पीठ पर कई बार हमले किए हों चुके थे. लॉउ की पीठ पर सात नाखूनों के निशान थे. लेकिन सबसे हैरानी की बात ये थी कि ये सभी निशान दो दिनों में अपने आप ही गायब हो गए.
    वो सभी हादसे के बाद बेहद डर गए और उन्होंने इस मामले से निपटने के लिए एक पादरी मदद ली. लेकिन पादरी ने इस मामले में हाथ डालने से मना कर दिया और Occult विशेषज्ञों से सलाह लेने की बात कही. इसके बाद डोना ने एक Occult विशेषज्ञ दंपति से संपर्क किया और वो थे Ed और लॉरेन. ये दोनों ही पति पत्नी थे. उन्होंने बताया कि बेजान वस्तु होने के बावजूद Annabelle की आत्मा इस गुड़िया से जुड़ चुकी है. इसलिए ये डॉल एक रहस्यमयी और भयानक डॉल में तब्दील हो चुकी है.
    Ed ने इस फ्लैट को अपनी पूजापाठ से ‘पवित्र’ किया और उसके बाद उस गुड़िया को लेकर अपने घर ले गए, जहां उन्होंने उसे अपने म्यूजियम में रख दिया. कुछ ही दिनों बाद एक पादरी Ed के घर आया. उसने जब इस गुड़िया के बारे में सुना, तो वो इसके पास पहुंचा और कहा कि तुम किसी का कुछ नहीं बिगाड़ सकती और उसका मजाक बनाने लगा।

    लेकिन इस घटना के बाद Ed को एहसास हो गया था कि पादरी को उस गुड़िया के बारे में ऐसा नहीं कहना चाहिए था. पादरी के जाने के थोड़ी देर बाद ही Ed को एक फोन आया. दूसरी लाइन पर वह पादरी ही था और वो बेहद डरा हुआ था. उसने बताया कि उसकी कार का ब्रेक फेल हो गया था और लेकिन किसी तरह वो अपनी जान बचाने में कामयाब रहा. लॉरेन वॉरेंस अपने म्यूजियम में. वे कभी इस गुड़िया की तरफ नहीं देखती हैं
    Ed समझ चुके था कि ये मामला बेहद गंभीर है. उन्होंने कुछ खास प्रार्थनाओं के जरिए इस डॉल को एक ग्लास बॉक्स में रख कर बंद कर दिया. उसके बाद से ही वो डॉल इस म्यूजियम में रखी हुई है लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई थी. Ed की पत्नी लॉरेन का मानना है कि आज भी अगर इस गुड़िया का कोई मजाक उड़ाने की कोशिश करता है, तो ये गुड़िया उन्हें जिंदा नहीं छोड़ती है.
    इस म्यूजियम में पहुंचे किसी व्यक्ति ने भी एक बार उस गुड़िया का मजाक उड़ाया था और कुछ ही देर में उस आदमी की सड़क हादसे में मौत हो गई. साल 2006 में Ed का देहांत हुआ था, लेकिन उनकी पत्नी आज भी इस गुड़िया की तरफ़ नहीं देखती हैं क्योंकि वे इससे बेहद नफरत करती हैं.।