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Tuesday, 24 April 2018

भगवान भोलेनाथ के ऐसे रहे जिन्हें सुनकर चौक जाएंगे आप ( भाग - 2 )

By: Secret On: 07:00
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  •  भगवान भोलेनाथ के ऐसे रहे जिन्हें सुनकर चौक जाएंगे आप ( भाग-2)




    14. शिव चिह्न


    वनवासी से लेकर सभी साधारण व्‍यक्ति जिस चिह्न की पूजा कर सकें, उस पत्‍थर के ढेले, बटिया को शिव का चिह्न माना जाता है। इसके अलावा रुद्राक्ष और त्रिशूल को भी शिव का चिह्न माना गया है। कुछ लोग डमरू और अर्द्ध चन्द्र को भी शिव का चिह्न मानते हैं, हालांकि ज्यादातर लोग शिवलिंग अर्थात शिव की ज्योति का पूजन करते हैं। 

    15. शिव की गुफा

    शिव ने भस्मासुर से बचने के लिए एक पहाड़ी में अपने त्रिशूल से एक गुफा बनाई और वे फिर उसी गुफा में छिप गए। वह गुफा जम्मू से 150 किलोमीटर दूर त्रिकूटा की पहाड़ियों पर है। दूसरी ओर भगवान शिव ने जहां पार्वती को अमृत ज्ञान दिया था वह गुफा 'अमरनाथ गुफा' के नाम से प्रसिद्ध है।


    16. शिव के पैरों के निशान

    श्रीपद- श्रीलंका में रतन द्वीप पहाड़ की चोटी पर स्थित श्रीपद नामक मंदिर में शिव के पैरों के निशान हैं। ये पदचिह्न 5 फुट 7 इंच लंबे और 2 फुट 6 इंच चौड़े हैं। इस स्थान को सिवानोलीपदम कहते हैं। कुछ लोग इसे आदम पीक कहते हैं।

    रुद्र पद- तमिलनाडु के नागपट्टीनम जिले के थिरुवेंगडू क्षेत्र में श्रीस्वेदारण्येश्‍वर का मंदिर में शिव के पदचिह्न हैं जिसे 'रुद्र पदम' कहा जाता है। इसके अलावा थिरुवन्नामलाई में भी एक स्थान पर शिव के पदचिह्न हैं।

    तेजपुर- असम के तेजपुर में ब्रह्मपुत्र नदी के पास स्थित रुद्रपद मंदिर में शिव के दाएं पैर का निशान है।

    जागेश्वर- उत्तराखंड के अल्मोड़ा से 36 किलोमीटर दूर जागेश्वर मंदिर की पहाड़ी से लगभग साढ़े 4 किलोमीटर दूर जंगल में भीम के मंदिर के पास शिव के पदचिह्न हैं। पांडवों को दर्शन देने से बचने के लिए उन्होंने अपना एक पैर यहां और दूसरा कैलाश में रखा था।

    रांची- झारखंड के रांची रेलवे स्टेशन से 7 किलोमीटर की दूरी पर 'रांची हिल' पर शिवजी के पैरों के निशान हैं। इस स्थान को 'पहाड़ी बाबा मंदिर' कहा जाता है।


    17. शिव के अवतार

    वीरभद्र, पिप्पलाद, नंदी, भैरव, महेश, अश्वत्थामा, शरभावतार, गृहपति, दुर्वासा, हनुमान, वृषभ, यतिनाथ, कृष्णदर्शन, अवधूत, भिक्षुवर्य, सुरेश्वर, किरात, सुनटनर्तक, ब्रह्मचारी, यक्ष, वैश्यानाथ, द्विजेश्वर, हंसरूप, द्विज, नतेश्वर आदि हुए हैं। वेदों में रुद्रों का जिक्र है। रुद्र 11 बताए जाते हैं- कपाली, पिंगल, भीम, विरुपाक्ष, विलोहित, शास्ता, अजपाद, आपिर्बुध्य, शंभू, चण्ड तथा भव।


    18. शिव का विरोधाभासिक परिवार

    शिवपुत्र कार्तिकेय का वाहन मयूर है, जबकि शिव के गले में वासुकि नाग है। स्वभाव से मयूर और नाग आपस में दुश्मन हैं। इधर गणपति का वाहन चूहा है, जबकि सांप मूषकभक्षी जीव है। पार्वती का वाहन शेर है, लेकिन शिवजी का वाहन तो नंदी बैल है। इस विरोधाभास या वैचारिक भिन्नता के बावजूद परिवार में एकता है।

    19. ति‍ब्बतस्थित कैलाश पर्वत पर उनका निवास है। जहां पर शिव विराजमान हैं उस पर्वत के ठीक नीचे पाताल लोक है जो भगवान विष्णु का स्थान है। शिव के आसन के ऊपर वायुमंडल के पार क्रमश: स्वर्ग लोक और फिर ब्रह्माजी का स्थान है। 

    20.शिव भक्त 

    ब्रह्मा, विष्णु और सभी देवी-देवताओं सहित भगवान राम और कृष्ण भी शिव भक्त है। हरिवंश पुराण के अनुसार, कैलास पर्वत पर कृष्ण ने शिव को प्रसन्न करने के लिए तपस्या की थी। भगवान राम ने रामेश्वरम में शिवलिंग स्थापित कर उनकी पूजा-अर्चना की थी।

    21.शिव ध्यान

        शिव की भक्ति हेतु शिव का ध्यान-पूजन किया जाता है। शिवलिंग को बिल्वपत्र चढ़ाकर शिवलिंग के समीप मंत्र जाप या ध्यान करने से मोक्ष का मार्ग पुष्ट होता है।


    22.शिव मंत्र 

      दो ही शिव के मंत्र हैं पहला- ॐ नम: शिवाय। दूसरा महामृत्युंजय मंत्र- ॐ ह्रौं जू सः। ॐ भूः भुवः स्वः। ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्‌। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्‌। स्वः भुवः भूः ॐ। सः जू ह्रौं ॐ ॥ है।

    23.शिव व्रत और त्योहार 

      सोमवार, प्रदोष और श्रावण मास में शिव व्रत रखे जाते हैं। शिवरात्रि और महाशिवरात्रि शिव का प्रमुख पर्व त्योहार है।


    24.शिव प्रचारक 
      भगवान शंकर की परंपरा को उनके शिष्यों बृहस्पति, विशालाक्ष (शिव), शुक्र, सहस्राक्ष, महेन्द्र, प्राचेतस मनु, भरद्वाज, अगस्त्य मुनि, गौरशिरस मुनि, नंदी, कार्तिकेय, भैरवनाथ आदि ने आगे बढ़ाया। इसके अलावा वीरभद्र, मणिभद्र, चंदिस, नंदी, श्रृंगी, भृगिरिटी, शैल, गोकर्ण, घंटाकर्ण, बाण, रावण, जय और विजय ने भी शैवपंथ का प्रचार किया। इस परंपरा में सबसे बड़ा नाम आदिगुरु भगवान दत्तात्रेय का आता है। दत्तात्रेय के बाद आदि शंकराचार्य, मत्स्येन्द्रनाथ और गुरु गुरुगोरखनाथ का नाम प्रमुखता से लिया जाता है।



    25.शिव महिमा 
      शिव ने कालकूट नामक विष पिया था जो अमृत मंथन के दौरान निकला था। शिव ने भस्मासुर जैसे कई असुरों को वरदान दिया था। शिव ने कामदेव को भस्म कर दिया था। शिव ने गणेश और राजा दक्ष के सिर को जोड़ दिया था। ब्रह्मा द्वारा छल किए जाने पर शिव ने ब्रह्मा का पांचवां सिर काट दिया था।


    Sunday, 22 April 2018

    भारतीय इतिहास के 14 हैरतंगेज़ और रोमांचित रहस्य !

    By: Secret On: 16:00
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  • भारतीय इतिहास के 14 हैरतंगेज़ और रोमांचित रहस्य !

    अगर आप कठिन से कठिन पहेलियाँ बुझाने में माहिर है और ऐतिहासिक किस्सों में दिलचस्पी रखते है तो भारतीय इतिहास के इन अनसुलझे रहस्यों को जानकर आश्चर्यचकित हो जायेंगे।
    इतिहास हमेशा कुछ न कुछ सिखाता है पर उसमे अनगिनत रहस्य समाये होते है जिसे इंसान हर कदम पर सुलझाने की कोशिश करता है। कुछ रहस्य नये होते है और कुछ सदियों पुराने! भारतीय इतिहास में ऐसी कई कहानियाँ मौजूद है, जिसमे ढेरों राज़ छिपे है, जिन्हें जानने के लिये वैज्ञानिक और इतिहासकार हमेशा से प्रयत्न करतेआ रहे है।
    आईये ऐसी ही कुछ कहानियों से रूबरू होते है। अगर आप इन्हें सुलझा सकते है तो कमेंट बॉक्स में जरूर लिखे। क्या पता इन अनसुलझे प्रश्नों का उत्तर आप ही में से किसी के पास हो!

    1. गुमनाम सिंधु घाटी सभ्यता



    सिंधु घाटी सभ्यता भारत की सबसे प्राचीन संस्कृति है। मिस्र (इजिपशियन) और मेसोपोटामियन सभ्यता से भी  सिंधु घाटी सभ्यता बहूत पुरानी, बड़ी, रहस्यमय और अनेक अनसुलझे सवालो से भरी पड़ी है। जिन लोगो ने इस सभ्यता की शुरुआत की उनके बारे में पुख्ता सबूत अभी तक नहीं मिले। इतना ही नहीं, उनके द्वारा इस्तेमाल किये गये 4000 साल पुराने सिंधु चित्रमय लिपि को भी आजतक कोई समझ नहीं पाया। उस जमाने की संस्कृति और उससे संबधित असंख्य रहस्य धरती की गोद में समा गये इसलिये इस सभ्यता को समझना मुश्किल है। सभ्यता को लेकर बहुत सारे सिद्धांत दिये गये है पर कोई भी निर्णायक नहीं है।

    2. चरामा की एलियन नुमा शैल चित्र

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    छत्तीसगढ़ के बस्तर आदिवासी इलाके में चरामा गाँव के पास पुरातन गुफाए मिली है जहा के पत्थरो पे दुसरे ग्रह के लोगो जैसे दिखने वाले चित्र पाये गये। गुफाओ की खोज करने वाले पुरातत्ववादी जे. आर. भगत कहते है कि चित्रो में चेहरे अलग तरह से दिखते है और कुछ चित्र उड़न तश्तरी के भी है।इससे जुडी हुयी एक कहानी गांववाले बताते है जिसमे रोहेला नामक लोग उड़न तश्तरी से यहाँ आते है और गांववालो का अपहरण करते है। छत्तीसगढ़ पुरातत्व विभाग ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन और अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) को इस मुहीम में मदद करने की मांग की है।

    3. बिहार की सोन भंडार गुफाएं

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    बिहार की सोन भंडार गुफाएं एक बड़े पत्थर से बनायीं हुयी है और कहा जाता है कि ये गुफाएं मगधन राजा बिम्बिसार के ज़माने की है। लोगो का मानना है कि बिम्बिसार राजा अपने खजाने को छुपाने के लिये इन गुफाओ का इस्तेमाल करता था। सोन भंडार का मतलब है ‘सोने का खजाना’। जब बिम्बिसार को उसके पुत्र अजातशत्रु ने कारागार  में डाल दिया तब उसके आदेश से उसकी बीवी ने राज्य का खजाना इस गुफाओ में छिपाया था। यहा पर मिली हुयी संखलिपि में लिखित शिलालेख है जिनसे शायद इस खजाने तक पहुँचने की चाबी मौजूद है। अंग्रेजो ने खजाने को हासिल करने के लिये दरवाजो पर तोप के गोले बरसाये थे जिनके निशान आज भी दिखते है पर उन्हें कुछ भी नहीं मिला था।

    4. नौ अपरिचित व्यक्ति

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    भारत के ‘नौ अपरिचित व्यक्ति’दुनिया भर के सबसे बड़े रहस्यों में से एक माने जाते  है। जानकारों का मानना है कि इसवी सन पूर्व 273 में जब कलिंगा का युद्ध हुआ था जिसमे 100,000 लोगो की जाने गयी थी, उसके बाद सम्राट अशोक ने इन नौ व्यक्तियों का गुट बनाया था। नौ में से हर एक व्यक्ति को एक विषय पर बहुत सारा ज्ञान था, जिसमे पर्यटन, विज्ञान और युद्ध कौशल जैसे विषय शामिल थे। उन सभी 9 लोगो के बारे में पूरी जानकारी नहीं है पर ऐसा मानना है कि आज भी उनके वंशज मौजूद है।

    5. मीर ओस्मान अली का खजाना

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    हैदराबाद के असफ जाह शासन के सातवे और आखरी निज़ाम मीर ओस्मान अली खान अपने गहनो और खजाने के संग्रह के लिये प्रसिद्ध थे। सन 1937 में टाइम मैगज़ीन ने उन्हें दुनिया के सबसे अमीर आदमी का सम्मान दिया। उनके द्वारा संग्रहित की गयी सभी गहनों और खजाने को उनके मृत्यु के बाद भी कोई ढूंड नहीं पाया था। लोगो का कहना है कि सारा खजाना हैदराबाद के कोठी पैलेस में छुपा है जहा निजाम रहते थे।

    6. लामा तेनझीन की 500 साल पुरानी ममी

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    हिमालय में स्पिटी के पास घुइन नामक एक छोटासा क़स्बा है जहा पुराने ज़माने में प्रचलित, खुद की ममी बनाने की संस्कृति देखने को मिलती है ।यहा पर एक छोटे से कमरे में 500 साल की ममी रखी गयी है जिसे कांच से सरंक्षित किया गया है। पंद्रहवी शताब्दी के महंत सांघा तेनझीन की ये ममी है, जिसकी त्वचा और सर के बाल आज भी साबुत है। ये ममी सबसे पहली प्राकृतिक ममी है।

    7. जयगढ़ किले का शाही खजाना

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    जयगढ़ का जैवाना किला दुनिया के सबसे बड़े पहियों वाली तोपो के लिये प्रसिद्द तो है पर साथ साथ साजिश और खजानों की कहानियो के लिये भी प्रसिद्ध है। ऐसा कहा जाता है कि अफगानिस्तान की जंग जीतने के बाद अकबर के रक्षा मंत्री मान सिंग ने युद्ध में जीता हुआ खजाना इसी किले में छुपा के रखा था। सन 1977 में तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने किले में खजाना और पानी की टंकिया ढूंढने के लिये एक मुहीम चलायी। पर इसमे कुछ भी नहीं पाया गया। इस मुहीम की पूरी कहानी महारानी गायत्री देवी द्वारा लिखी गयी ‘A Princess Remembers’ नामक किताब में पढने को मिलता है।

    8. नानासाहेब का लापता होना

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    नानासाहेब 1857 के विद्रोह के नेता थे जिन्होंने ब्रिटिश शासन को ललकारा था। विद्रोह के बाद नानासाहेबअचानक एक दिन गायब हो गए। इतिहास में किसीको पता नहीं है कि उनके द्वारा लूटा हुआ खजाना कहा है। कहानी ये भी है कि वो खजाने के साथ नेपाल चले गये और ब्रिटिशो के हाथ नहीं लगे। ब्रिटिश काल से नानासाहेब और उनका खजाना एक रहस्य बना हुआ है।

    9. कुलधरा- भूतो से पीड़ित गाँव

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    जैसलमेर के पश्चिम दिशा में 20 किमी के बाद भूतो से पीड़ित कुलधारा गाँव है जहा 100 साल पहले पालीवाल ब्राह्मण रहते थे। लगबग 1500 लोग एक ही रात में इस गाँव को छोड़कर निकल गये। किसी को खबर नहीं थी कि वो कहा और क्यों गये पर लोगो का मानना है कि दुष्ट शासक सलीम सिंग और उसके लगाये गये लगान की वजह से लोग गाँव छोड़कर चले गए, और जाते जाते गाँव को एक श्राप भी देकर गये। उस घटना के बाद जिसने भी गाँव में रहने का निश्चय किया उसकी मौत हो गयी इसी वजह से ये गाँव  आजतक नहीं बसा।

    10. चपाती आंदोलन

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    1857 के विद्रोह के दौरान चपाती आंदोलन शुरू किया गया था, जिसके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है इसलिये आजतक यह एक रहस्य बना हुआ है। कुछ अध्ययन द्वारा ये बताया गया है कि कोलेरा से प्रभावित लोगो को चपाती पहूचाना इसका उद्देश था पर इस आंदोलन का असली मकसद आज भी किसीको नहीं पता। इतिहासकारो का मानना है कि इस आंदोलन से 1857 में ब्रिटिश राज में खलबली मची थी।

    11. नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की मृत्यु

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    नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की मृत्यु के बारे में असंख्य कहानियाँ प्रचलित है, जो आज भी एक रहस्य बना हुआ है। कोई नहीं जानता कि तायपेई से टोकियो जाने वाले विमान में उनके साथ क्या हुआ। आजाद भारत का ये एक अनसुलझा सवाल है। उनके गायब होने के बाद ऐसा कहा जाता है कि वो भारत वापस आये थे और उत्तर भारत में साधू के वेश में रहते थे। इस बात का सबूत नहीं है पर ऐसा माना जाता है कि उत्तर प्रदेश के फैजाबाद में रहने वाले साधू गुमनामी बाबा ही सुभाष चन्द्र बोस थे।

    12. लालबहादुर शास्त्री की असामयिक मौत

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    भारत के प्रधानमंत्री बनने के महज 2 साल बाद दुसरे देश में लाल बहादुर शास्त्री की अचानक मौत होना देश के लिये एक दुर्भाग्य था और सबसे बड़ा रहस्य भी। सन 1966 में ताशकन्त देश में दिल का दौरा पड़ने से उनकी मौत हुयी। नीले धब्बे और कटने के निशान उनके शरीर पर थे पर न तो उनका पोस्ट मार्टम किया गया और न ही उनकी मौत से जुड़े कोई दस्तावेज़ सरकार को दिये गये। इसलिये उनकी मौत पर हमेशा एक प्रश्नचिन्ह बना रहा।

    13. शांतीदेवी का पुनर्जन्म

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    एक बच्ची का दिल्ली में पुनर्जन्म हुआ जिसका नाम शांतिदेवी था। शांतिदेवी ने अपने घरवालो को उसके पहले जन्म के घर और घरवालो की जानकारी दी। महात्मा गाँधी द्वारा स्थापन की गयी एक कमिटी ने शांतिदेवी द्वारा दी गयी जानकारी को टटोला और रिकॉर्ड किया।

    14. एक योगी कुछ खाये-पिये बिना जी रहा है

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    अहमदाबाद से 200 किमी दूर अम्बाजी गाँव में चुनरीवाला माताजी नाम से मशहूर एक कमजोर बुर्जुर्ग तपस्वी रहते है। इनका असली नाम प्रल्हाद जानी है। इनका कहना है कि 11 साल की उम्र से वो देवी अम्बा के  भक्त बने और अध्यात्म से जुडे। वे  कहते  है कि देवी ने उन्हें आशीर्वाद देकर अमृत दिया जिसे वो तालू के छेद से शरीर में पहुँचता रहता है। सन 2003 में 21 लोगो की मेडिकल रिसर्च टीम ने इस योगी पर विडियो द्वारा नज़र रखी पर कुछ निष्कर्ष नहीं निकला। योगी का कहना है कि सन 1940 से वो कुछ भी खाए पिए बगैर जी रहे है।

    प्रकृति के 12 रहस्य जो अभी तक अनसुलझे है

    By: Secret On: 07:00
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  • प्रकृति के रहस्य जो अभी तक अनसुलझे है

    खुला आसमान और विशाल धरती के बीच इंसान प्रकृति का एक अदना सा हिस्सा है। इंसान कितना भी ज्ञान अर्जित कर ले, कितना भी विज्ञान को जान जाये लेकिन प्रकृति हर बार कुछ ऐसा कर जाती है कि हर बार उसके करिश्मे के आगे विज्ञानं भी घुटने टेक देता है।
    आज हम ऐसी ही कुछ रहस्यमयी बातों को आपके सामने पेश कर रहें हैं-
    1. करोड़ों साल पुराना धातु का हथौड़ा
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    हमने अपनी इतिहास की किताबों से यही सीख है, की इंसान ने धातु का इस्तेमाल कुछ 10 हज़ार सालों पहले शुरू किया था। लेकिन 1934 में पुरातत्व विभाग को अपनी खोज में मिला ये हथौड़ा भ्रमित कर ही देता है। कारण यह है कि इस हथौड़े में लगी लकड़ी कोयला बन चुकी है। और कोयला बनने में करोड़ो वर्ष लग जातें हैं।
    2. मरुस्थल में बना शिलाओं का घेरा
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    सहारा मरुस्थल के बीचो-बीच कुछ बड़े पत्थरों का एक बड़ा घेरा मिला। इसकी खोज पुरातत्व विशेषज्ञों ने 1973 में की। वैज्ञानिकों का मानना है कि पाषाण काल में इनका इस्तेमाल खगोलशास्त्रियों के द्वारा ग्रह-नक्षत्रों की खोज के लिए किया जाता था। लेकिन आज का मनुष्य इस कला से अनभिज्ञ है।

    3. शेंग मरुस्थल में मिली पत्थर पर बनी सीढ़ी लकीरें
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    चीन में गानसू शेंग रेगिस्तान के बीचो-बीच कुछ लकीरें मिली, जिन्हें चीनी मोज़ेक लाइन का नाम दिया गया। इसे मोगाओं गुफ़ा के आस-पास बनाया गया था। चौंकाने वाली बात यह है कि पत्थरों के ऊबड़-खाबड़ होने के बाद  भी यह लकीरें एकदम सटीक और सीधी हैं।
    4. पाषाणकालीन पत्थर का खिलौना
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    पुरातत्व विभाग को 1889 में ईदाहो के नाम्पा में एक पत्थर की गुड़िया मिली, जो बहुत ही पुरानी थी। इसे देख कर वैज्ञानिकों ने यह अनुमान लगाया कि पाषाणकालीन यह गुड़िया मानव के धरती पर अस्तित्व पर सवाल उठा रही थी। वैज्ञानिकों के हिसाब से यह गुड़िया करोड़ों वर्ष पुरानी थी।

    5. उल्का अवशेष में फंसा धातु का पेंच
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    वैज्ञानिकों को 1998 में हुई शोध में उल्का के अवशेष की जांच करते समय एक पत्थर का टुकड़ा मिला था। जिसमें एक लोहे का पेंच था। वैज्ञानिकों के माने तो यह पत्थर 30 करोड़ साल पुराना है और लेकिन उस समय तक धरती और किसी भी प्रजाति ने जन्म नहीं लिया था।
    6. पत्थर पर बना प्राचीन विमान का चित्र
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    पाषाणकाल में मनुष्य अक्सर पत्थरों पर चित्रकारी किया करता था। 5000 ईसा पूर्व की इस कला के नमूने में आपको एक विमान दिख रहा होगा। वैज्ञानिक आज भी स्तब्ध हैं कि क्या उस समय ऐसा कोई विज्ञान था? और अगर नहीं था तो मनुष्य ने उस काल में इसकी कल्पना कैसे की होगी…!
    7. चलने वाला पत्थर
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    कैलिफोर्निया की डेथ वैली के खिसकते पत्थर आज भी वैज्ञानिकों के लिए असुलझी पहेली बने हुए हैं। 1972 में इस रहस्य का खुलासा करने के लिए वैज्ञानिकों की एक टीम गठित की गई थी, लेकिन वह टीम पूरी तरह से असफल रही और आज भी यह एक अनसुलझा रहस्य ही है।

    8. मेक्सिकन पिरामिड में ब्राजील के अभ्रक
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    प्राचीन मेक्सिको शहर की दीवार अभ्रक की बनी हुई है। लेकिन अभ्रक तो ब्राज़ील में मिलता है, जो यहां से हज़ारों मील दूर है। इसका उपयोग ऊर्जा प्रदान करने के लिए किया जाता है। तो उस वक़्त के कारीगर इसे लेट कैसे थें और इसका इस्तेमाल क्यों किया जाता था, ये दोनों बातें वैज्ञानिकों को परेशां करती रहीं हैं।
    9. भीमकाय मानव के जीवाश्म
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    1895 में आयरलैंड में पुरातत्व विभाग की खोज में खुदाई के दौरान 12 फीट लम्बा एक मानवीय जीवाश्म मिला।यह मानव आधुनिक मानव होमो शेपिएन्स से बिल्कुल अलग था, जिसके पैर में 6 उंगलिया थीं और उसके हाथ 4 फीट लम्बे थे।
    10. गुप्त अटलांटिस
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    पुरातत्व विभाग का मानना है कि उन्होंने अटलांटिस की खोज कर ली है, लेकिन आज भी इसके कई राज दफ़न हैं।
    11. विशाल इंसानी जबड़ा
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    अमेरिका के नेवाडा में 1911 में एक भीमकाय इंसानी जबड़ा मिला, कहा जाता है कि नेवाडा में लाल बाल वाले 12 फीट लम्बे इंसान रहा करते थे। इसके अलावा 1931 में इंसानी कंकाल भी मिले, जिनकी लम्बाई 12 फीट थी। आखिर ये थे क्या इंसान या कोई अलग ही प्रजाति?
    12. कंकाल में फंसी एल्युमीनियम की कील
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    त्रानसिलवेनिया की मुर्से नदी में 1974 में एक 20 हज़ार साल पुराने मैस्तदन की हड्डियों से एक एल्युमीनियम की एक कील मिली, जिसे वैज्ञानिकों ने 300 से 400 साल प्राचीन बताया। लेकिन, चौंकाने वाली बात यह थी की हड्डियों के बीच एल्युमीनियम आया तो आया कहाँ से?

    Saturday, 21 April 2018

    विश्व के 10 अजीब अनसुलझा रहस्य Top 10 World’s Unsolved Mysteries

    By: Secret On: 18:33
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  • विश्व के 10 अजीब अनसुलझा रहस्य  Top 10 World’s Unsolved Mysteries

    दोस्तो आपका स्वागत हैं । शुरू करने से पहले आपसे निवेदन है कि आप हमारे ब्लॉग को bookmark और subscribe कर लीजिए तथा रोजाना विजिट कीजिये । दोस्तों वैसे तो दुनिया में कई सारे “unsolved mysteries” है । जिनको आज तक कोई solve नही कर पाया है । अलग-अलग लोग अपने अलग-अलग मत प्रस्तुत करते रहते है और दावा करते है कि उन्होंने इन mysteries को solve कर लिया है । खैर आज मैं आपको दुनिया के कुछ अनसुलझे रहस्यों में से 10 के बारे में बताने जा रहा हूँ । तो ज्यादा इधर-उधर की न करते हुए चलिए शुरू करते हैं

    1. 18 वी सदी  में फैला डांसिंग प्लेग । ये वो बीमारी है जिसका सैकड़ो researchers ने शोध किया है । मगर आज तक इसका कारण कोई नही बता पाया । इसलिए इसे unsolved mysteries में रखा जाता है । दरअसल  हुआ ये था कि रोहनसर  नाम के एक गांव में एक औरत अचानक से नाचने लगी । देखते-देखते ये बीमारी बाकि गांव वालों को भी लग गयी और गांव के सैकड़ो लोग नाचने लगे वो भी महीनो तक । बहुत से लोग महीनों तक , एक लंबे समय तक नाचने की वजह से ,  हार्ट अटैक और अत्यधिक थकान की वजह से मारे गए ।



    2. 15 जनवरी 1947 को लॉस एंजेलिस में एलिज़ाबेथ शॉट नाम की एक महिला की हत्या हो गयी । उसकी लाश कमर से आधी काटी और मुँह और कान के पास चिरी हुई पायी गयी । उसके शरीर पर बहुत से चोट के निशान पाए गए थे । ये अजीब नही है,अजीब घटना इसके आगे घटी वो ये की इसकी हत्या की जिम्मेदारी  60 लोगो ने ली । इस घटना की जांच करते-करते police वालो के पसीने छूट गए और जिन 60 लोगो ने हत्या की जिम्मेदारी ली थी जज ने उन्हें छोड़ दिया । आज तक नही पता कि  क्यों ? इसलिए इसे भी unsolved mysteries में शामिल किया जाता हैं ।

    3.  साल 2007 में ब्रिटिश कोलंबिया में बीच के किनारे कटे हुए पैर पाए गए । इस घटना से हड़कंप मच गया । high profile police investigation हुई मगर सत्य का पता नही चल सका  । ये तक पता नही चला की पैर किनके थे । अलग-अलग तर्क लोगो द्वारा उस वक़्त दिए गए । जैसे कि शायद ये 2004 में आये सुनामी में मरे गये लोगों के है ,शायद इन लोगो का बड़ी बेरहमी से murder किया गया है ,और भी कई बातें उड़ती रही । आज तक उड़ रही है । इसलिए इसे भी unsolved mysteries में शामिल किया गया है ।

    4  कॉपर family ने 1950 में टेक्सास में अपना नया घर ख़रीदा । घर की opning party आयोजित की गयी । नाच-गाना ,खाना-पीना सब चला । फिर photo session हुआ । जिसमें घर के दोनों बच्चे अपने दादी और माँ के गोद में सोफे पर बैठ गए । photo click हुआ । उसके बाद जब फोटो बन कर आई तो सब हैरान थे । फोटो में एक लटकती हुई लाश दिखाई दे रही थी । पुरे इलाके में खबर फैली । कुछ ने कहा भूत है कुछ ने कहा photo effect है या  फेक है । मगर जब फोटो की जांच experts ने की तो फोटो असली निकली । लोग आज तक इस mysterious photo पर सर खुजा रहे है । मगर सच से पर्दा अभी तक उठा नही है । यानि ये भी है unsolved mysteries.


    5. साल 1638 । जब शैतान ने चर्च में बिजली बरसाई और कई लोग मारे गए । यह सेलपरिक्स शहर के लोगो के बयान है । उस  दिन अचानक से चर्च के ऊपर काले बादल मंडराने लगे और दोपहर के वक़्त 300 लोगो से खचाखच भरे चर्च में बिजली बरसने लगी । ये घटना है तो पुरानी मगर आज भी चर्चा और रहस्य का विषय बना हुआ है । घटना की हक़ीक़त,कोई नही जानता । इसलिए इसे भी unsolved mysteries में से एक माना जाता हैं ।

    6. इंग्लैंड के साल्वे फर्थ में साल 1964 में एक ऐसी घटना घटी जो आज तक रहस्य का विषय है । एक दिन जिम टेपलेटन अपनी बेटी के साथ घूमने निकले । वहां वो खूबसूरत वादियों में घूमने लगे । अच्छा मौसम और नज़ारा देखकर उन्होंने अपनी बेटी का एक फोटो लिया । बाद में जब उस फोटो को धुलवाया तो वो दंग रह  गये । उनकी बेटी के पीछे एक स्पेससूट पहना हुआ एक आदमी खड़ा था । जबकि फोटो लेते वक़्त उन दोनो के अलावा वहां और कोई नही था । ये खबर local न्यूज़पेपर के माध्यम से ऐसी फैली की दुनियाभर के experts ने अपना पूरा दिमाग और वक़्त इस फोटो पर खपा दिया । मगर इस फोटो के रहस्य को नही सुलझा पाए । आज भी ये unsolved mysteries में से एक है ।


    7. पूरी दुनिया में एक और रहस्य का गुबार छा गया जब चिली के एक शहर में 6 इंच का इंसानी कंकाल मिला । experts ने बहुत जांच की मगर ये किस तरह की प्रजाति है पता नही लगा पाए । हैं एक चीज़ जो उन्होंने माना वो ये की ये इंसानी कंकाल जैसा ही है बस फ़र्क़ सिर्फ इतना सा है कि इसके बॉडी में धारियां मौजूद है और दांत बहुत मजबूत है । मगर असल में ये किसका है  ,अभी तक unsolved mysteries ही बना हुआ है ।


    8 . 19 फरवरी 2013 में 21 साल की एलिसा लेन जो की ब्रिटिश कोलंबिया यूनिवर्सिटी वेंकेवर में स्टूडेंट थी ,डाउनटाउन के एक होटल के टंकी में मृत पायी गयी । दरआसल होटल में रह रहे लोगो ने शिकायत की कि पानी बदबूदार और गन्दा आ रहा है । फिर स्टाफ ने टंकी की जांच की तो लड़की की बॉडी मिली । बाद में जब होटल के  CCTV footage को खंगाला गया तो एलिसा लिफ्ट के पास किसी invisible चीज़ से छुपती और बात करते हुई दिखी । ये फुटेज public हुई फिर क्या था । दुनिया भर के experts के आकर्षण का ये केंद्र बिंदु बन गयी । इस फुटेज और रहस्य की कई experts ने जांच की मगर सब खाली हाथ ही रहे और घटना भी unsolved mysteries के फाइलो में दबकर रह गयी ।

    9 . अमेरिका के घने जंगलों में एक ऐसा गड्ढा है जो आज तक लोगो के लिए रहस्य बना हुआ है । दरअसल एक नदी है जो की झरने से गिरते वक़्त दो धड़ो  में बटती है एक  नीचे नदी में गिरती है और दूसरी चट्टानों में मौजूद एक रहस्यमयी गड्ढे में जिसे Devils kettle कहा जाता है । दशकों गुजर चुके है scientists को इसकी जांच करते-करते मगर आज तक हक़ीक़त कोई नही जान सका हैं ।  इसलिए यह भी unsolved mysteries में से एक हैं ।

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    10. स्कॉटलैंड में लोच झील नाम का एक झील है जो 1933 से चर्चा और रहस्य का विषय बना हुआ हैं । यहाँ के local लोगो के अनुसार इस झील के नीचे एक विशाल दैत्याकार जीव रहता है । जो की दिखने में डायनासोर जैसा हैं । बाकि की unsolved mysteries की तरह  ये जगह भी बहुत famous है और इसपर भी बहुत से experts ने research किया हैं ,और बाकि की तरह ही नतीजा जीरो ही निकला है । इसकी हक़ीक़त अभी भी राज़ हैं । कुछ  लोग इसे local लोगो की fake story बताते है तो कुछ कहते है कि हो सकता है कि कोई डायनासोर आज भी जिन्दा हो और इस झील में रहता हो । कई experts और लोगो के तर्क है कि आखिर डाइनोसॉर के ज़माने के मगरमछ भी तो आज भी जिंदा हैं । तो डाइनोसॉर कुछ बच गए हो और आज भी जिंदा हो संभव है ।


    तो दोस्तों आपका इन 10 ‘unsolved mysteries’ के बारे में क्या कहना हैं । क्या आपको लगता हैं कि ये unsolved , solved में convert हो पाएंगे  ? मुझे अपनी राय comment करके बताइये और हां  share करना मत भूलियेगा । और अगर आपने हमारे दूसरे आर्टिकल्स को नही पढ़ा है तो जरूर से पढियेगा ।

    Friday, 15 September 2017

    प्राचीन भारतीय और आधुनिक ब्रम्हांड की परिकल्पना

    By: Secret On: 16:56
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  • महर्षि चित्र ने अपने गुरुकुल में यज्ञ-आयोजित किया था । ऋत्विक् के लिये उन्होंने महर्षि उद्दालक को आमंत्रित किया लेकिन उद्दालक कुछ समय के लिये समाधि लेकर अन्तरिक्ष के कुछ रहस्यों का अध्ययन करना चाहते थे इसलिये उन्होंने अपने पुत्र श्वेतकेतु को यज्ञ के ऋत्विक् के रूप में भेज दिया, अब महर्षि चित्र को हिचकिचाहट इस बात की थी कि बगैर योग्यता की परख किये महर्षि चित्र उन्हें यज्ञ का आचार्य कैसे बनाए इसलिए उन्होंने श्वेतकेतु से प्रश्न किया- ‘सवृत लोके यस्मित्राधास्य हो बोचदध्वा लोके वास्यसीति’ । अर्थात्-क्या इस लोक में कोई आवरण वाला ऐसा स्थान है जहाँ तुम मेरे प्राणों को स्थिर कर सकोगे अथवा कोई ऐसा आवरण रहित अद्भुत स्थान है जहाँ पहुँचा कर मुझे यज्ञ के फलस्वरूप दिव्य अक्षय लोक का भागी बनाओगे ?।

    श्वेतकेतु ने इस प्रश्न का उत्तर देने में अपनी असमर्थता प्रकट की (यद्यपि श्वेतकेतु स्वयं एक उच्चकोटि के ऋषि थे) । वे लौटकर अपने पिता के पास गये और उनसे वही प्रश्न पूछा जो उनसे (श्वेतकेतु से) महर्षि चित्र ने पूछा था । महर्षि उद्दालक बड़े सूक्ष्मदर्शी थे उन्होंने सारी स्थिति समझ ली कि चित्र ने श्वेतकेतु से ऐसा प्रश्न क्यों पूछा | लेकिन सच्चाई तो ये थी कि, वे (महर्षि उद्दालक) स्वयं इसी रहस्य को जानने के लिए अविकल्प समाधि (जिस समाधि में चिन्तन, मनन, भावानुभूति चलती रहती है उसे सविकल्प समाधि कहते हैं) लेना चाहते थे ।

    उन्होंने अपने ध्यान में ये अनुभव किया कि महर्षि चित्र यह रहस्य पहले से ही जानते हैं सो पिता पुत्र दोनों महर्षि चित्र के पास गये और उनके प्रश्न का उत्तर सविनय उन्हीं से बताने का आग्रह करने लगे । उनकी जिज्ञासा को समझकर महर्षि चित्र ने उन्हें मृत्यु की अवस्था और देवयान मार्ग द्वारा दिव्य उच्च लोकों की प्राप्ति का जो ज्ञान दिया है वह सारा का सारा ही आख्यान महान् वैज्ञानिक सत्यों ओर आश्चर्यों से ओत-प्रोत है और कौषीतकि ब्राह्मणोपनिषद् में उसका विस्तार से वर्णन है । उससे यह पता चलता है कि भारतीय मनीषा (ऋषि-मुनी) न केवल प्राण और जीवन के रहस्यों से विज्ञ थे वरन् उन्हें सूक्ष्म से सूक्ष्म भौगोलिक ओर ब्रह्माण्ड विज्ञान के रहस्यों का भी ज्ञान था । आज जब उस ज्ञान को हम आधुनिक विज्ञान की कसौटी पर कसते हैं तो हमें यह मानना पड़ता है कि भारतीय साधनायें किसी भी भौतिक जगत के विज्ञान से अधिक महत्वपूर्ण हैं और जीवन से सम्बन्धित समस्त जिज्ञासाओं और समस्याओं का वही सर्वश्रेष्ठ विकल्प है ।
    महर्षि चित्र, महर्षि उद्दालक और श्वेतकेतु को बताते हैं- आर्य ! यज्ञादि श्रेष्ठ कर्म करने वाले लोगों को उच्च लोकों की प्राप्ति जिस तरह होती है वह मैं आप लोगों को बताता हूँ, प्राणों के योग से चन्द्रमा को बल मिलता है, पर कृष्ण पक्ष में तथा दक्षिणायन सूर्यगति के समय स्वर्गादि उच्च लोकों का द्वार अवरुद्ध रहता है इसलिये योगीजन उस समय अपने प्राणों को अपने ध्यान में ही स्थिर कर लेते हैं । अपनी निष्काम भावना को दृढ़ रखते हुए वे जितेन्द्रिय, देवयान मार्ग से अपनी मानवेतर यात्रा प्रारम्भ करते हैं, और सबसे पहले अग्नि लोक को प्राप्त होते हैं, फिर वायुलोक और वहाँ से सूर्य लोक की ओर गमन करते हैं । सूर्य लोक से वरुण लोक, इन्द्रलोक, प्रजापति लोक में पहुँचते हुए वे अंत में ब्रह्म लोक के अधिकारी बनते है |

    कौषीतकि ब्राह्मणोपनिषद् की इस आख्यायिका में आगे के वर्णन में बड़े विस्तार पूर्वक देवयान मार्ग की अनुभूतियों का वर्णन हैं | जीवात्मा को वहाँ से जैसे दृश्य दिखाई देते हैं जैसी-जैसी ध्वनियाँ और गन्ध की अनुभूति होती है उस सब का बड़ा ही अलंकारिक और मनोरम वर्णन किया गया है । पहली बार पढ़ने से ऐसा लग सकता है जैसे इसका वास्तविकता से कोई सम्बन्ध न हो पर जब दर्शन और आज के आधुनिक विज्ञान के सिद्धांतो पर हम उसे तौलते और उसका विश्लेषण करते हैं तब आश्चर्यचकित रह जाते हैं कि इतनी विराट् अनुभूति प्राचीन ऋषियों को कैसे सम्भव हो सकी ।

    जैसे–जैसे आधुनिक द्रव्य और ब्रह्माण्ड विज्ञान समय के पथ पर आगे बढ़ रहा है, उनकी अनुभूतियों को शतप्रतिशत सत्य प्रमाणित कर रहा है । इसका एक ज्वलंत प्रमाण अभी कुछ वर्षों पहले आई क्रिस्टोफ़र नोलेन द्वारा रचित फिल्म इन्टरस्टेलर थी जो विशुद्ध रूप से भारतीय ब्रह्माण्ड विज्ञान के सिद्धांतो से प्रेरित थी | यद्यपि अभी विज्ञान अपूर्णावस्था में है तथापि अभी तक उसने जो भी निष्कर्ष निकाले हैं वह भारतीय तत्वदर्शन से एक भी कदम आगे नहीं बढ़ पाते।


    Monday, 4 September 2017

    चूहों पर ही ज्यादातर प्रयोग क्यों होते है जानिए adhbhut कारण

    By: Successlocator On: 10:00
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  • यह सच है कि विज्ञान समुदाय में चूहे निश्चित रूप से सबसे आम टेस्ट सब्जेक्ट होते हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका में पशु शोध के करीब 95 प्रतिशत तक शोध चूहों पर आयोजित किये जाते हैं। हम यह भी जानते हैं कि यूरोपीय संघ में 79 प्रतिशत पशु परीक्षण के शोध और अध्ययन के लिए चूहों का इस्तेमाल होता है।

    हालांकि हम यह पता नहीं कर सकते हैं कि स्टडीज और प्रयोगों में कितने चूहों का उपयोग किया जाता है। जबकि संयुक्त राज्य अमेरिका का कृषि विभाग परीक्षण के लिए इस्तेमाल की जाने वाली कई प्रजातियों का ट्रैक रखता है लेकिन संयुक्त राज्य अमेरिका में कोई भी अनुसंधान में इस्तेमाल किये गए सभी चूहों की एक विस्तृत सूची नहीं रखता है।

    हम जानते हैं कि 1965 से चूहों से जुड़े शैक्षणिक उद्धरणों की संख्या चौगुनी हो गई है, जबकि अधिकांश अन्य विषयों (कुत्तों, बिल्लियों, गिनी सूअरों, खरगोशों) का अध्ययन काफी निरंतर गति से किया जाता है। तो आखिर लैब्स इतने चूहों और चूहों का उपयोग क्यों कर रहे हैं?

    कुछ कारण व्यावहारिक हैं : वे छोटे हैं, वे नस्ल में आसान होते हैं और वे सस्ते होते हैं। जब आप कई विषयों पर परीक्षण कर रहे होते हैं और एक समय में एक से अधिक पीढ़ियों का अध्ययन करने में लाभ हो सकता है, लेकिन एक माइस या चूहे को बीट करना कठिन होता है।

    इसके अलावा वे स्तनधारी होते हैं, इसलिए हम सभी एक ही परिवार के कहे जा सकते हैं। इस प्रकार ये लगभग समान आनुवांशिकी का निर्माण करते हैं, वो भी बिना किसी खराब प्रभाव के। लेकिन हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि हमारे स्तनधारी कृंतक मित्र प्राइमेट्स नहीं है। जबकि प्राइमेट्स आनुवंशिक रूप से हमसे बहुत करीब से जुड़े होते हैं।

    अनुसंधान में प्राइमेट का उपयोग बेहद विवादास्पद होता है। यह भी ध्यान देने योग्य है कि चूहों के जीन को बदलना आसान होता है। इस पर विचार करें : विज्ञान पिछले काम के निर्माण के बारे में भी है। प्रयोगशाला में चूहों और चूहों का उपयोग तेजी से बढ़ गया है, यह विकास वास्तव में उनकी लोकप्रियता का कारण हो सकता है।

    ऐसा इसलिए है क्योंकि इसका परिणाम इसके विपरीत होता है। यदि कोई वैज्ञानिक प्रयोगशाला परिवेश में किसी विशिष्ट जानवर का उपयोग करने का विकल्प चुनता है, तो समान या संबंधित शोधों का परीक्षण करते समय एक ही जानवर को चुनने के लिए बहुत सारी समझ चाहिए होती है।

    Friday, 2 December 2016

    विचित्र किन्तु सत्य – अंगा आदिवासी जो लाशों को ममी बनाकर रखते है सुरक्षीत तथा बडे उत्सवो में शामील करते है पूर्वजो की ममी क़ो

    By: Secret On: 17:30
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  • विचित्र किन्तु सत्य – अंगा आदिवासी जो लाशों को ममी बनाकर रखते है सुरक्षीत तथा बडे उत्सवो में शामील करते है पूर्वजो की ममी क़ो:

    Smoked Mummies Of Papua New Guinea : इंसान की मृत्यु होने के पशचात उसके शव का रीती रिवाजो क़े साथ अँतिम संस्कार कीया जाता हैं। लेकिन कई समुदायों में अंतिम संस्कार की किर्या बडी विचित्र होती हैं जैसे की तिब्बत की स्काय बुरिअल जिसके बारे में हमने आपको अपनी एक पिछली पोस्ट में बताया था। ऐसी ही एक अनोखी अंतिम संस्कार की किर्या पापुआ न्यू गिनी के अंगा जनजाति के लोग अपनाते है जो  कि पहले लाश क़ो हल्क़ा सा जलाते है और फिर उस अध जलीं लाश को ममी बनाकार पहाडों पऱ हमेंशा के लीए सुरक्षीत रख़ देते है।

    Smoked Mummies Of Papua New Guinea : Story& History in Hindi
    पापुआ न्यू गिनी के मोरोबे में अंगा जनजाति अपनी अनोखी ममीकरण तकनीक के लिए चर्चित है। यहां शवों को सुरक्षित रखने के लिए पहले उन्हें सुलगाया जाता है, फिर उन्हें मकबरों या कब्रों में दफनाने की जगह पहाड़ियों पर रख दिया जाता है, ताकि वे पहाड़ियों पर से गांव को देखते रहें। शव लाल रंग में रंगे होते हैं। पहाड़ियों पर बांस के सहारे रखी ये लाशें देखने में बड़ी ही विचित्र लगती हैं, लेकिन अंगा जनजाति के लोगों के लिए ये मृतकों को सम्मान देने के सबसे बेहतरीन तरीकों में से एक है।
    Smoked Mummies Of Papua New Guinea  Information in Hindi
    शवों के संलेपन का काम बड़ी ही सावधानी से किसी अनुभवी व्यक्ति द्वारा करवाया जाता है। सबसे पहले घुटने, कंधे और पैरों को सही आकार देने के लिए पूरी चर्बी हटाई जाती है। फिर बांस के ढांचे में उन्हें रखा जाता है। इस दौरान शरीर से निकले पदार्थों को मृतक के परिजनों और रिश्तेदारों के बालों और त्वचा पर लगाया जाता है। ऐसा माना जाता है कि इससे मृतक की ताकत जीवित व्यक्ति में आ जाती है।
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    Smoked Mummies Of Papua New Guinea  Information in Hindi
    इसके बाद अगले चरण में मांस की सड़न को रोकने के लिए शव से आंखें, मुंह और गुदा का हिस्सा निकाला लिया जाता है। इसके बाद माना जाता है कि ममी (लाश के संरक्षण) को सदियों तक संरक्षित रखा जा सकता है। जीभ, हथेली से लेकर तमाम ऐसे हिस्सों को निकाल लिया जाता है, जिनसे सड़न पैदा होने का डर हो। इसके बाद शव के बाकी बचे ढांचे को आग में सुलगाया जाता है।
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    आग में सुलगाने के बाद ममी पर लाल रंग का लेप लगाया जाता है, जिसमें डाला गया प्राकृतिक कोकुन शव का सदियों तक संरक्षण करता है। इस पूरी प्रक्रिया के बाद जाकर ममी तैयार होती है। किसी खास मौके या जश्न के वक्त अंगा आदिवासी अपने परिजनों की ममी को पहाड़ियों पर से उतारते भी हैं, ताकि उन्हें जश्न का हिस्सा बनाया जा सके। मोरोबे में आज दो सौ साल पुरानी ममी भी देखने को मिल जाएंगी।

    भारत का एक मात्र श्मशान घाट जहाँ मुर्दे से भी वसूला जाता है टैक्स, तीन हज़ार साल पुरानी है परंपरा

    By: Secret On: 08:00
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  • भारत का एक मात्र श्मशान घाट जहाँ मुर्दे से भी वसूला जाता है टैक्स, तीन हज़ार साल पुरानी है परंपरा

    Unique tradition of Manikarnika Ghat – Tax for cremation : काशी का मणिकर्णिका श्मशान घाट के बारे में मान्यता  है कि यहां चिता पर लेटने वाले को सीधे मोक्ष मिलता है। दुनिया का ये इकलौता श्मशान जहां चिता की आग कभी ठंडी नहीं होती। जहां लाशों का आना और चिता का जलना कभी नहीं थमता। यहाँ पर एक दिन में करीब 300 शवों का अंतिम संस्कार होता है।

    लेकिन मणिकर्णिका घाट की इसके अलावा भी कई अन्य विशेषताएं है जो भारत के किसी अन्य श्मशान घाट में नहीं है। ऐसी ही दो विशेषताओं के बारे में हम अब तक आप सब को बता चुके है। पहली यह की  मणिकर्णिका घाट पर जलती चिताओं के बीच चिता भस्म से खेली जाती है होली और दूसरी चैत्र नवरात्री अष्टमी को मणिकर्णिका घाट पर,जलती चिताओं के बीच, मोक्ष की आशा में सेक्स वर्कर करती है पूरी रात डांस।
    आज हम आपको इस श्मशान घाट से ही जुडी एक और अन्य परंपरा के बारे में बताएंगे जो भी यहाँ के अलावा कई और नहीं पाई जाती है।

    आप शायद यकीन ना करें पर इस श्मशान घाट पर आने वाले हर मुर्दे को चिता पर लिटाने से पहले बाकायदा टैक्स वसूला जाता है। श्मशान घाट पर लाशों से पैसे वसूलने के पीछे की ये कहानी भी कम दिलचस्प नहीं है।
    Unique tradition of Manikarnika Ghat - Tax for cremation Hindi
    मणिकर्णिका घाट पर अंतिम संस्कार की कीमत चुकाने की परम्परा तकरीबन तीन हजार साल पुरानी है। मान्यता है कि श्मशान के रख रखाव का जिम्मा तभी से डोम जाति के हाथ था। चूंकि डोम जाति के पास तब रोजगार का कोई और साधन नहीं था लिहाजा दाह संस्कर के मौके पर उन्हें दान देने की परम्परा थी। मगर डोम तब दाह संस्कार की यूं मुंह मांगी कीमत नहीं मांगते थे और ना ही पैसा कमाने के गलत तरीके अपनाते थे।

    दरअसल टैक्स वसूलने के मौजूदा दौर की शुरुआत हुई राजा हरीशचंद्र के जमाने से। हरीशचंद्र ने तब एक वचन के तहत अपना राजपाट छोड़ कर डोम परिवार के पूर्वज कल्लू डोम की नौकरी की थी। इसी बीच उनके बेटे की मौत हो गई और बेटे के दाह संस्कार के लिये उन्हें मजबूरन कल्लू डोम की इजाजत मांगनी पड़ी। चूंकि बिना दान दिये तब भी अंतिम संस्कार की इजाज़त नहीं थी लिहाजा राजा हरीशचंद्र को मजबूरन अपनी पत्नी की साड़ी का एक टुकड़ा बतौर दक्षिणा कल्लू डोम को देना पड़ा। बस तभी से शवदाह के बदले टैक्स मांगने की परम्परा मजबूत हो गई। वही परम्परा जिसका बिगड़ा हुआ रूप मणिकर्णिका घाट पर आज भी जारी है.
    चूंकि ये पेशा अब पूरी तरह एक धंधे की शक्ल अख्तियार कर चुका है लिहाजा श्मशान के चप्पे चप्पे पर डोम परिवार ने बाकायदा जासूस फैला रखे हैं। उनकी नजर श्मशान में आने वाली हर शव यात्रा पर रहती है ताकि किस पार्टी से कितना पैसा वसूला जा सकता है इसका ठीक ठीक अंदाजा लगाया जा सके।

    Unique tradition of Manikarnika Ghat - Tax for cremation Hindi
    वैसे डोम परिवार की बात पर यकीन किया जाए तो गुजरे जमाने में उन पर धन-दौलत लुटाने वाले रईसों की कमी नहीं थी। उनका दावा है कि उस दौर में अंतिम संस्कार के एवज में उन्हें राजे रजवाड़े जमीन जायदाद यहां तक की सोना-चांदी तक दिया करते थे। जबकी आज के जमाने में मिलनेवाली तयशुदा रकम के लिये भी उन्हें श्मशान आने वालों से उलझना पड़ता है।