Showing posts with label mysterious place. Show all posts
Showing posts with label mysterious place. Show all posts

Wednesday, 25 April 2018

दूसरी दुनिया के दरवाजे और वर्महोल का रहस्य

By: Secret On: 08:00
  • Share The Gag
  • दूसरी दुनिया के दरवाज़े हैं ये रहस्यमय वर्महोल




           अपनी धरती पर अब तक इस तरह के दो वर्म होल ढूँढ़े जा चुके हैं। इनमें से एक फ्लोरिडा कोस्टारिका और बरमूडा के बीच बरमूडा त्रिकोण है, जबकि दूसरे की खोज अभी २६ वर्ष पहले 18 अगस्त 1990 को हुई। जापान, ताइवान तथा गुगुआन के मध्य स्थित यह ट्रायंगल “ड्रेगन्स ट्राइएंगल” के नाम से प्रसिद्ध है | क्या होते है ये वर्म होल ? वर्म होल इस अखिल विश्व ब्रह्माण्ड के वो छिद्र हैं जहाँ पर समय (Time) और आकाश (Space) की सारी ज्यामितियाँ एक हो जाती हैं अर्थात यहाँ पर समय (Time) और आकाश (Space) का परस्पर एक-दूसरे में रूपांतर संभव है | समय (Time) और आकाश (Space) की ज्यामितियाँ एक हो जाने की वजह से, इस अखिल विश्व ब्रह्माण्ड में जितनी भी विमायें (Dimensions) हैं वो सब उस ‘बिंदु’ में तिरोहित हो जाती हैं इसी वजह से इस बिंदु में प्रचंड आकर्षण शक्ति होती है |

    तो अगर आप किसी वर्म होल के मुहाने पर खड़े हैं तो उसकी अकल्पनीय आकर्षण शक्ति में फंस सकते हैं | एक बार कोई भी वस्तु उस छिद्र में फंसी तो वो स्वयं भी उस बिंदु के समान हो जाएगी लेकिन अगले ही क्षण वो इस बिंदु से बाहर किसी दूसरे लोक में होगी | जितने समय तक वो वस्तु उस बिंदु में रहेगी वो अपने आप को उस ब्रह्माण्ड की सारी विमाओं (Dimensions) में व्यक्त करेगी लेकिन ये समय इतना कम होता है कि न तो इसको किसी भी तरह से मापा जा सकता है और न ही इस मानवीय शरीर से इसका अनुभव किया जा सकता है |

    अगर आप दुर्भाग्य वश इस वर्म होल में फंस गए तो, दिक्-काल (Time-Space) की सारी ज्यामितियों के हो जाने की वजह से, आप के साथ दो संभावने हो सकती है | या तो आप किसी बिलकुल अद्भुत और अनजान लोक में पहुंचे लेकिन वहां भी उसी समय में जी रहे होंगे जिस समय में आप जीते अगर पृथ्वी लोक में होते तो | ऐसा भी हो सकता है की दूसरे लोक में भी आपको अपने आस-पास, अपने लोगो की आवाज़े आरही हों जो गायब होते वक्त आपके आस-पास थे लेकिन आप उनको देख नहीं पा रहे हों क्योकि आप उनसे इतर किसी दूसरे लोक में हैं | ऐसा इसलिए होता है की वर्म होल में फंसने की वजह आप के क्षेत्र या आकाश (Space) की ज्यामिति परिवर्तित (Change) हो गयी लेकिन आपके समय (Time) की ज्यामिति नहीं बदली |

    दूसरी सम्भावना ये है कि हो सकता है वर्म होल में फंसने के बाद आप वापस उसी जगह पर हों लेकिन आप की अपनी दुनिया के लोग वहां न हों हांलाकि हो सकता है जगह थोड़ी सी बदली-बदली सी लगे लेकिन वास्तव में आप होंगे उसी जगह पर, लेकिन आप के अपने समय के संगी-साथी वहां नहीं होंगे | ऐसा समय की ज्यामिति परिवर्तित होने से होता है | यानि आपके स्थान या आकाश (Space) की ज्यामिति तो वही रही लेकिन समय (Time) की ज्यामिति बदल गयी |आप अपने ही लोक, अपने ही ग्रह पर लेकिन किसी और समय में होंगे |

    यद्यपि वर्महोल की परिकल्पना वैज्ञानिको के लिए अभी भी चुनौती पूर्ण बनी हुई है लेकिन ब्रह्माण्ड के अद्भुत रहस्यों में से एक वर्म होल ने कई अनसुलझी गुत्थियों को सुलझा भी दिया है | पृथ्वी पर स्थित वर्म होलों के संबंध में वैज्ञानिकों के एक दल का विश्वास है कि इस प्रकार के अनेक छोटे वर्म होल्स इसके जल या स्थल भाग में स्थित हो सकते हैं पर किन्हीं कारणों से उनके मुँह बंद रहते हैं और यदा−कदा ही खुलते हैं, किन्तु जब खुलते हैं, तो इस प्रकार की घटनाएँ देखने−सुनने को मिलती हैं। ये छिद्र कभी−कभी ही क्यों खुलते हैं और अधिकाँश समय बंद क्यों रहते हैं? इस संबंध में जानकारी प्राप्त करने के लिए वैज्ञानिक अब पृथ्वी स्थित अपनी प्रयोगशाला में ही छोटे आकार के वर्महोल विनिर्मित करने का प्रयास कर रहे हैं, ताकि उनकी प्रकृति के बारे में गहराई से अध्ययन किया जा सके। यदि ऐसा हुआ, तो फिर लोक−लोकान्तरों की यात्रा बिना किसी कठिनाई के कर सकना संभव हो सकेगा और व्यक्ति इच्छानुसार किसी भी लोक का सफर किसी भी समय सरलतापूर्वक कर सकेगा।

    ऐसे गमनागमन का आर्ष साहित्यों में यत्र−तत्र वर्णन भी मिलता है। महाभारत में एक इसी तरह के प्रसंग का उल्लेख वन पर्व के तीर्थयात्रा प्रकरण में मौजूद है, जिसमें बंदी नामक एक पंडित ने यज्ञ के आयोजन के लिए विद्वान ब्राह्मणों को समुद्र मार्ग से वरुण लोक भेजा था। चर्चा यह भी है कि यज्ञ के उपराँत वे सकुशल पुनः उसी मार्ग से पृथ्वी लोक आ गये थे। इससे स्पष्ट है कि तब लोग उस विद्या में निष्णात् हुआ करते थे, जिसे आत्मिकी या उच्च स्तरीय रूप माना जाता है। यदि ऐसा नहीं होता, तो उनका वापस लौट पाना एक प्रकार से अशक्य बना रहता। आज इसी अशक्त ता के कारण ऐसी घटनाओं में व्यक्ति एक लोक से दूसरे में पहुँच तो जाता है, पर फिर अपने पूर्व लोक में वापस नहीं आ पाता। इससे यह भी साबित होता है कि अन्य लोकों का सुनिश्चित अस्तित्व असंदिग्ध रूप से विद्यमान है।

    इसी का समर्थन करते हुए प्रसिद्ध वैज्ञानिक रिचर्ड एच. ब्रायण्ट अपनी कृति “अदर वर्ल्डस” में लिखते हैं कि भौतिक आयामों से परे अपने ही जैसे किसी अन्य विश्व-ब्रह्माण्ड के लिए यह जरूरी है कि व्यक्त चार आयामों के अतिरिक्त और चार आयाम हों। यह आयाम प्रत्यक्ष आयामों को ढकेंगे नहीं, वरन् हर नया आयाम प्रत्येक दूसरे से समकोण पर स्थित होगा। वे कहते हैं कि यद्यपि इस प्रकार की विचारधारा सिद्धाँत रूप में संभव नहीं है, फिर भी गणितीय रूप से इसे दर्शाया जा सकता है। उनके अनुसार यदि भौतिक विज्ञान की पहुँच से बाहर दृश्य आयामों से परे कोई पड़ोसी अदृश्य संसार वास्तव में है, तो इसे पाँचवें, छठवें, सातवें और आठवें आयामों से बना होना चाहिए। इस प्रकार विज्ञान ने भी सूक्ष्म लोकों के अस्तित्व पर एक प्रकार से मुहर लगा दी है।


    Saturday, 21 April 2018

    विश्व के 10 अजीब अनसुलझा रहस्य Top 10 World’s Unsolved Mysteries

    By: Secret On: 18:33
  • Share The Gag
  • विश्व के 10 अजीब अनसुलझा रहस्य  Top 10 World’s Unsolved Mysteries

    दोस्तो आपका स्वागत हैं । शुरू करने से पहले आपसे निवेदन है कि आप हमारे ब्लॉग को bookmark और subscribe कर लीजिए तथा रोजाना विजिट कीजिये । दोस्तों वैसे तो दुनिया में कई सारे “unsolved mysteries” है । जिनको आज तक कोई solve नही कर पाया है । अलग-अलग लोग अपने अलग-अलग मत प्रस्तुत करते रहते है और दावा करते है कि उन्होंने इन mysteries को solve कर लिया है । खैर आज मैं आपको दुनिया के कुछ अनसुलझे रहस्यों में से 10 के बारे में बताने जा रहा हूँ । तो ज्यादा इधर-उधर की न करते हुए चलिए शुरू करते हैं

    1. 18 वी सदी  में फैला डांसिंग प्लेग । ये वो बीमारी है जिसका सैकड़ो researchers ने शोध किया है । मगर आज तक इसका कारण कोई नही बता पाया । इसलिए इसे unsolved mysteries में रखा जाता है । दरअसल  हुआ ये था कि रोहनसर  नाम के एक गांव में एक औरत अचानक से नाचने लगी । देखते-देखते ये बीमारी बाकि गांव वालों को भी लग गयी और गांव के सैकड़ो लोग नाचने लगे वो भी महीनो तक । बहुत से लोग महीनों तक , एक लंबे समय तक नाचने की वजह से ,  हार्ट अटैक और अत्यधिक थकान की वजह से मारे गए ।



    2. 15 जनवरी 1947 को लॉस एंजेलिस में एलिज़ाबेथ शॉट नाम की एक महिला की हत्या हो गयी । उसकी लाश कमर से आधी काटी और मुँह और कान के पास चिरी हुई पायी गयी । उसके शरीर पर बहुत से चोट के निशान पाए गए थे । ये अजीब नही है,अजीब घटना इसके आगे घटी वो ये की इसकी हत्या की जिम्मेदारी  60 लोगो ने ली । इस घटना की जांच करते-करते police वालो के पसीने छूट गए और जिन 60 लोगो ने हत्या की जिम्मेदारी ली थी जज ने उन्हें छोड़ दिया । आज तक नही पता कि  क्यों ? इसलिए इसे भी unsolved mysteries में शामिल किया जाता हैं ।

    3.  साल 2007 में ब्रिटिश कोलंबिया में बीच के किनारे कटे हुए पैर पाए गए । इस घटना से हड़कंप मच गया । high profile police investigation हुई मगर सत्य का पता नही चल सका  । ये तक पता नही चला की पैर किनके थे । अलग-अलग तर्क लोगो द्वारा उस वक़्त दिए गए । जैसे कि शायद ये 2004 में आये सुनामी में मरे गये लोगों के है ,शायद इन लोगो का बड़ी बेरहमी से murder किया गया है ,और भी कई बातें उड़ती रही । आज तक उड़ रही है । इसलिए इसे भी unsolved mysteries में शामिल किया गया है ।

    4  कॉपर family ने 1950 में टेक्सास में अपना नया घर ख़रीदा । घर की opning party आयोजित की गयी । नाच-गाना ,खाना-पीना सब चला । फिर photo session हुआ । जिसमें घर के दोनों बच्चे अपने दादी और माँ के गोद में सोफे पर बैठ गए । photo click हुआ । उसके बाद जब फोटो बन कर आई तो सब हैरान थे । फोटो में एक लटकती हुई लाश दिखाई दे रही थी । पुरे इलाके में खबर फैली । कुछ ने कहा भूत है कुछ ने कहा photo effect है या  फेक है । मगर जब फोटो की जांच experts ने की तो फोटो असली निकली । लोग आज तक इस mysterious photo पर सर खुजा रहे है । मगर सच से पर्दा अभी तक उठा नही है । यानि ये भी है unsolved mysteries.


    5. साल 1638 । जब शैतान ने चर्च में बिजली बरसाई और कई लोग मारे गए । यह सेलपरिक्स शहर के लोगो के बयान है । उस  दिन अचानक से चर्च के ऊपर काले बादल मंडराने लगे और दोपहर के वक़्त 300 लोगो से खचाखच भरे चर्च में बिजली बरसने लगी । ये घटना है तो पुरानी मगर आज भी चर्चा और रहस्य का विषय बना हुआ है । घटना की हक़ीक़त,कोई नही जानता । इसलिए इसे भी unsolved mysteries में से एक माना जाता हैं ।

    6. इंग्लैंड के साल्वे फर्थ में साल 1964 में एक ऐसी घटना घटी जो आज तक रहस्य का विषय है । एक दिन जिम टेपलेटन अपनी बेटी के साथ घूमने निकले । वहां वो खूबसूरत वादियों में घूमने लगे । अच्छा मौसम और नज़ारा देखकर उन्होंने अपनी बेटी का एक फोटो लिया । बाद में जब उस फोटो को धुलवाया तो वो दंग रह  गये । उनकी बेटी के पीछे एक स्पेससूट पहना हुआ एक आदमी खड़ा था । जबकि फोटो लेते वक़्त उन दोनो के अलावा वहां और कोई नही था । ये खबर local न्यूज़पेपर के माध्यम से ऐसी फैली की दुनियाभर के experts ने अपना पूरा दिमाग और वक़्त इस फोटो पर खपा दिया । मगर इस फोटो के रहस्य को नही सुलझा पाए । आज भी ये unsolved mysteries में से एक है ।


    7. पूरी दुनिया में एक और रहस्य का गुबार छा गया जब चिली के एक शहर में 6 इंच का इंसानी कंकाल मिला । experts ने बहुत जांच की मगर ये किस तरह की प्रजाति है पता नही लगा पाए । हैं एक चीज़ जो उन्होंने माना वो ये की ये इंसानी कंकाल जैसा ही है बस फ़र्क़ सिर्फ इतना सा है कि इसके बॉडी में धारियां मौजूद है और दांत बहुत मजबूत है । मगर असल में ये किसका है  ,अभी तक unsolved mysteries ही बना हुआ है ।


    8 . 19 फरवरी 2013 में 21 साल की एलिसा लेन जो की ब्रिटिश कोलंबिया यूनिवर्सिटी वेंकेवर में स्टूडेंट थी ,डाउनटाउन के एक होटल के टंकी में मृत पायी गयी । दरआसल होटल में रह रहे लोगो ने शिकायत की कि पानी बदबूदार और गन्दा आ रहा है । फिर स्टाफ ने टंकी की जांच की तो लड़की की बॉडी मिली । बाद में जब होटल के  CCTV footage को खंगाला गया तो एलिसा लिफ्ट के पास किसी invisible चीज़ से छुपती और बात करते हुई दिखी । ये फुटेज public हुई फिर क्या था । दुनिया भर के experts के आकर्षण का ये केंद्र बिंदु बन गयी । इस फुटेज और रहस्य की कई experts ने जांच की मगर सब खाली हाथ ही रहे और घटना भी unsolved mysteries के फाइलो में दबकर रह गयी ।

    9 . अमेरिका के घने जंगलों में एक ऐसा गड्ढा है जो आज तक लोगो के लिए रहस्य बना हुआ है । दरअसल एक नदी है जो की झरने से गिरते वक़्त दो धड़ो  में बटती है एक  नीचे नदी में गिरती है और दूसरी चट्टानों में मौजूद एक रहस्यमयी गड्ढे में जिसे Devils kettle कहा जाता है । दशकों गुजर चुके है scientists को इसकी जांच करते-करते मगर आज तक हक़ीक़त कोई नही जान सका हैं ।  इसलिए यह भी unsolved mysteries में से एक हैं ।

    www.rahasya2.blogspot.comwww.rahasya2.blogspot.com

    10. स्कॉटलैंड में लोच झील नाम का एक झील है जो 1933 से चर्चा और रहस्य का विषय बना हुआ हैं । यहाँ के local लोगो के अनुसार इस झील के नीचे एक विशाल दैत्याकार जीव रहता है । जो की दिखने में डायनासोर जैसा हैं । बाकि की unsolved mysteries की तरह  ये जगह भी बहुत famous है और इसपर भी बहुत से experts ने research किया हैं ,और बाकि की तरह ही नतीजा जीरो ही निकला है । इसकी हक़ीक़त अभी भी राज़ हैं । कुछ  लोग इसे local लोगो की fake story बताते है तो कुछ कहते है कि हो सकता है कि कोई डायनासोर आज भी जिन्दा हो और इस झील में रहता हो । कई experts और लोगो के तर्क है कि आखिर डाइनोसॉर के ज़माने के मगरमछ भी तो आज भी जिंदा हैं । तो डाइनोसॉर कुछ बच गए हो और आज भी जिंदा हो संभव है ।


    तो दोस्तों आपका इन 10 ‘unsolved mysteries’ के बारे में क्या कहना हैं । क्या आपको लगता हैं कि ये unsolved , solved में convert हो पाएंगे  ? मुझे अपनी राय comment करके बताइये और हां  share करना मत भूलियेगा । और अगर आपने हमारे दूसरे आर्टिकल्स को नही पढ़ा है तो जरूर से पढियेगा ।

    Friday, 20 April 2018

    दुनिया के ऐसे रहस्य जिन पर से आज भी पर्दा उठना बाकी है!

    By: Secret On: 18:28
  • Share The Gag
  • दुनिया के ऐसे रहस्य जिन पर से आज भी पर्दा उठना बाकी है!
    अपनी दुनिया के बारे में हम बहुत कुछ जानते हैं. जैसे, आज रात बारिश होगी या नहीं. कल धूप निकलेगी या नहीं. या, बॉलीवुड में किसका चक्कर किसके साथ चल रहा है. इतना सब कुछ जानने के बावजूद हम बहुत सी चीज़ों से अनजान हैं, या यूं कहूं कि कभी उनके बारे में जानने की कोशिश ही नहीं की. आज हम आपको कुछ ऐसी ही जगहों और चीज़ों के बारे में बता रहे हैं, जिनके बारे में कई रहस्य कायम हैं.

    1. ADX Florence Prison

    ये जेल किसी नरक से कम नहीं है. एक ऐसा नरक, जिसके बारे में फेडरल सिक्योरिटी के एजेंट्स भी ये नहीं बताना चाहते कि यहां कौन-कौन से अपराधी बंद हैं. ऐसा केवल अंदाज़ा लगाया जाता है कि यहां खतरनाक से खतरनाक अपराधियों को रखा गयाहै.
    एक कमरे में एक शॉवर, टॉयलेट के अलावा एक छोटी सी टेबल, कॉक्रीट का बेड और 4 इंच की खिड़की है. यहां किसी भी अपराधी को किसी से बात करने की इजाज़त नहीं है.
    तनाव से ग्रस्त हो कर 20 वर्षों में 7 अपराधी यहां आत्महत्या कर चुके हैं.


    2. Queen Elizabeth II’s Bedroom – Buckingham Palace



    ब्रिटिश राज परिवार उन राजघरानों में से है, जिसके बारे में लोगों की उत्सुकता हमेशा बरक़रार रही है. इसी का एक हिस्सा है बकिंघम पैलेस, जिसके 2nd फ्लोर के बारे में कहा जाता है कि यहां महारानी का रूम है, जहां तक केवल ख़ूफ़िया दरवाज़े से ही पहुंचा जा सकता है. ऐसा कहा जाता है कि इस दरवाज़े के बारे में जानने वाले केवल कुछ ही लोग ज़िंदा है
      3. Cicada 3301


    दुनिया के कुछ अनसुलझे रहस्यों में से एक Cicada 3301 का रहस्य आज तक कायम है. Washington Post के अनुसार उन्होंने एक सन्देश द्वारा लोगों को उनसे जुड़ने की अपील की थी.
    ये अपने यहां लोगों को काम पर रखने से पहले एक गुत्थी को सुलझाने के लिए देते हैं.
    इस गुत्थी को सुलझा चुके Joel Eriksson के अनुसार ये एक अंडर कवर एजेंसी है, जिसके सवालों को अब तक चंद लोग ही हल कर पाएं हैं.

    4. Iron Mountain


    बहुमूल्य खज़ानों का घर कहे जाने वाले Iron Mountain दुनिया की सबसे सुरक्षित जगहों में से एक है. नुयूक्लिअर अटैक से ले कर आतंकी घटना में भी यह अपने आपको सुरक्षित रखने में सक्षम हैं. 500 से भी ज़्यादा मल्टीनेशनल कंपनियां इसे अपने डेटा बेस कैंप के तौर पर इस्तेमाल करती हैं. Iron Mountain में 50 मिलियन से भी ज़्यादा बहुमूल्य फ़ोटोग्राफ़्स के ओरिज़नल नेगेटिव मौजूद हैं, जिनमे अल्बर्ट आइंस्टीन से लेकर Frank Sinatra के अलावा कई मशहूर हस्तियां शामिल हैं.

    5. Coca-Cola’s Secret Recipe


    200 से ज़्यादा देशों में बिकने वाला कोका कोला दुनिया के सबसे पॉपुलर ब्रांड्स में से एक है. हम ये तो जानते है कि इसे बनाने में कोका पत्तियों और कोको नट्स का इस्तेमाल किया जाता है, पर इसे कैसे बनाया जाता है? ये आज तक एक रहस्य है, जिसके बारे में कुछ लोग ही जानते हैं.

    6. North Sentinel Island


    इस द्वीप को दुनिया का सबसे रहस्यमई द्वीप कहना कतई गलत नहीं होगा. यहां खेती का कोई नामो-निशान नहीं है और पिछले 60000 सालों से दुनिया से कटा हुआ है. यहां के आदिवासियों के बारे में कहा जाता है कि ये किसी भी बाहरी की दखल को बर्दाश्त नहीं करते और बाहरी व्यक्ति पर तीरों और भालों से हमला कर देते हैं.
    भारत सरकार ने भी इस द्वीप के 3 किलोमीटर के दायरे को प्रतिबंधित घोषित किया हुआ है.

    7. The Tomb of Genghis Khan



    इतिहास में अपना अहम स्थान रखने वाले मंगोलियन कमांडर चंगेज़ खान का मकबरा एक ऐसा रहस्य है, जिसके बारे में लोगों की उत्सुकता कभी समाप्त नहीं होने वाली है. कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के Dr. Albert Yu-Min Lin के अनुसार चंगेज़ खान के मकबरे को छुपाने के लिए 2000 लोगों को मार कर दफ़नाया गया और कई महीनों तक उस स्थान को घोड़ों की थापों से दबा कर एक नदी का रुख उस ओर मोड़ा गया.
    8. Varosha – Forbidden Place



    70 के दशक में सबसे बड़े टूरिस्ट आकर्षणों में से एक Varosha को आज भूतों का शहर कहा जाता है. किसी ज़माने में इस शहर में बड़ी-बड़ी इमारतें हुआ करती थीं और Elizabeth Taylor जैसे सेलेब्स इस शहर की जान हुआ करते थे. 1974 में तुर्की के दखल के बाद ये शहर वीराने जंगल में तब्दील हो गया. अब यहां केवल तुर्की आर्मी और यूनाइटेड नेशन्स के सदस्यों को ही आने की इजाज़त है और किसी भी अनजान को देखते ही शूट एंड साइट का आर्डर है.





                                                 



    Friday, 8 September 2017

    अजगर की तरह उड़ने वाले जानवर।

    By: Secret On: 08:21
  • Share The Gag

  • एक विशाल प्राचीन उड़ने वाले सरीसर्प अजगर की तरह दिखते थे जिन्हें फिल्म "अवतार" में " ikran" नामक हवाई शिकारी के रुप में दिखाया गया है । शोधकर्ताओं ने कहा कि pterosaur जिसे अब Ikrandraco   (लैटिन में "ड्रैको" का अर्थ है ड्रैगन) कहा जाता है, पर ऐसा माना जा सकता pterosaur(ये उड़ने वाले सरीसृपों की एक श्रेणी ) उड़ने के लिए पंखों के झुंड के  पहले पीठों वाले जानवर थे।  डायनासोर के अंत में pterosaur  के विलुप्त होने से पहले ही वे सबसे बड़े जानवर थे, जो कभी पंछी थीं, जिसकी पंख 39 फीट (12 मीटर) तक थी। हालांकि डायनासोर के साथ pterosaur  रहते थे, इन उड़ाने वाले सरीसर्प (Ikrandraco) डायनासोर नहीं थे पर इन्हें डायनासोर की प्रजाति ही माना जाता है।।

    वैज्ञानिकों ने लगभग 120 मिलियन वर्ष पहले सरीसर्प के दो आंशिक कंकाल की जांच की थी, जो कि शुरुआती क्रेटासियस अवधि में था। उन्होंने इन जीवाश्मों को पूर्वोत्तर चीन के लिओनिंग प्रांत में शुष्क पहाड़ियों में की जो कि पिछले दशक में वहां पंख वाले डायनासोरों की खोज के लिए प्रसिद्ध रहा है।

    पहले जब सरीसृप जीवित था, उस क्षेत्र में जहां यह पाया गया था एक  मीठे पानी की झील थी जो गर्म जलवायु के साथ कई प्रकार के जानवरों जैसे मछली, कछुए, अन्य pterosaurs, पंख वाले डायनासोर, पक्षियों और स्तनधारियों के लिए घर हुआ करता था ।

    pterosaur लगभग 2.3 फीट (0.7 मीटर) लंबा था और इसके लगभग 4.9 फीट (1.5 मीटर) की पंख होते थे। इसकी लम्बी खोपड़ी और एक निचली जबड़े की चोटी पर एक अनोखा शिखा या हड्डी पर उभार था। Ikrandraco के जबड़े के शिखर के पीछे थोड़ा हुकुआ संरचना थी शोधकर्ताओं ने सुझाव दिया है कि इस पायदान ने मुलायम ऊतकों के लिए एक लंगर के रूप में काम किया होगा ।साथ ही यह भी सामने आया है कि Ikrandraco के पास गले की थैली थी जैसे कि पोलिकन भोजन का भंडार करने का उपयोग करता है

     शोधकर्ताओं ने कहा कि Ikrandraco को कभी-कभी पानी के ऊपर घूमते हुए और सतह के पास शिकार किया करते थे। हालांकि, Ikrandraco आधुनिक स्कीमिंग पक्षियों की तुलना में बड़ा है, इसलिए यह नियमित रूप से skimmed नहीं हो सकता है, बल्कि आमतौर पर शिकार के लिए उथले पानी में खड़ा होता था।

    Tuesday, 13 September 2016

    अजब, अनूठे, रहस्यमय एवं रोमांच से भरे गाँवों की कहानियां –

    By: Secret On: 14:17
  • Share The Gag
  • अजब, अनूठे, रहस्यमय एवं रोमांच से भरे गाँवों की कहानियां –


    मुफ्त में मिल जाता है यहाँ सैकड़ो लीटर दूध- धोकड़ा गांव
    Dhokada-Village
    पूरी दुनिया में वैसे तो डेनमार्क को ही एक ऐसे देश के रूप में जाना जाता है, जहाँ दूध की नदियां बहती है। वही कम ही लोग जानते हैं की भारत में भी एक ऐसा गांव है जहाँ ये पंक्ति सटीक बैठती है।  वह गांव है गुजरात के सुदूर कच्छ के इलाके में बसा धोकड़ा गांव जोक़ि मुफ्त में दूध बांटने के लिए जाना जाता है। यहां के ग्रामीण यहाँ आने वाले लोगों व आस-पास के जरूरतमंदो को मुफ्त में ही दूध बांट देते है। जिसे आमतौर पर समाजसेवा की भावना से जोड़ा जाता रहा है जबकि सच में इसके पीछे गांव वालों के विश्वास से जुड़ी एक कहानी है। कहते हैं कि, तकरीबन 500 साल पहले यहां आए एक पीर-फकीर ने गांव की तरक्की एवं खुशहाली के लिए स्थानीय लोगों को दूध का व्यापार न कर उसे जरूरतमंदो को मुफ्त में बांटने की सलाह दी थी, जिसके बाद गांव में यह परम्परा बन गई।
    यह भी पढ़े>> हिन्दू धर्म के 29 ऐसे रहस्य, जो अनसुलझे हैं - भाग 1
     

     हालाँकि कुछ बर्ष पूर्व जब किसी ग्रामीण ने इस बात को गलत साबित करने के लिए दूध का व्यापार आरंभ किया तो उसकी अचानक मृत्यु हो गई। जिससे गांव वालो के विश्वास को और बल मिला और मुफ्त दूध बांटने का काम आज भी यहां जारी है।
    नजदीकी रेलवे स्टेशन- भुज

    क्योंकि शौक बड़ी चीज़ है- उप्पलां गांव
    Villages Uppla

    इंसान के पास अगर धन-दौलत की कमी ना हो तो वो अपने हर शौक को पूरी शिद्दत के साथ पूरा करने की कोशिश करता हैं। फिर चाहें उसका वो शौक कितना ही अजीबों-गरीब क्यों ना हो। ऐसे ही शौकियां और दौलतमंद लोगों का एक गांव है पंजाब के जालंधर शहर के नज़दीक बसा उप्पलां गांव। इस गांव के वासियों का अजीबों-गरीब शौक अपने घरो-कोठियों की छत पर खूबसूरत पानी की टंकी बनवाना है। जिस कारण आपकों यहां के हर कोठी की छत पर एक खुबसूरत आकृति वाली पानी की टंकी नजर आएगी वो भी लगभग 2 किलोमीटर दूर से।
    यहां के किसी कोठी की छत पर आपको पानी जहाज़ बना दिखेगा तो कही एअर इंडिया का हवाई जहाज़, किसी कोठी की छत पर बैलगाड़ी नजर आयेगी तो कही पंख फैलाए उड़ने को तैयार बाज़। इस अजीबों-गरीब शौक के पीछे की कहानी के अनुसार गांव के ज्यादातर लोग मूलतः एन आर आई है जो सालों पहले पैसा कमाने विदेश गए थे। उन्हीं में से एक व्यक्ति ने अपनी पहली विदेश यात्रा की याद में जब अपनी कोठी की छत पर पानी जहाज की आकृति वाली पानी की टंकी बनवाई तो उनका ये रोचक आइडिया बाकी लोगों को भी भा गया। फिर देखते ही देखते गांव की हर कोठी की छत पर लोगों ने अपने पसंद की आकृति की पानी टंकी बनवा डाली। आज इस गांव की पहचान इसकी अजीबों-गरीब पानी की टंकियों से है। जिनकी खूबसूरती देखते ही बनती है।
    नजदीकी रेलवे स्टेशन- जालंधर
    यह भी पढ़े>> हिमालय के चमत्कारिक महात्मा की रहस्यमय दास्तां - पौराणिक कथा
     


    ऐसे अमीर किसान देखे है कहीं- सलारपुर खालसा
    Salarpur-Khalsa (1)

    भले ही आज देश के ज्यादातर किसान बदहाली की जिंदगी जी रहे हो। मगर इस सबसे विपरीत उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद मंडल के अमरोहा जनपद के गांव सलारपुर खालसा के किसानों ने ना सिर्फ खेती से देश भर में अपने गांव का नाम रोशन किया है बल्कि खेती का गरीबी के पर्याय बन चुकी धारणा को भी गलत सिद्ध कर दिया है। वो भी किसी खास तरीके की फसल से नहीं बल्कि टमाटर जैसे रोजमर्रा की सब्जी की खेती से।
    इस सब के पीछे है एक किसान के प्रेरणा की कहानी जिसने 17-18 साल पहले अपने खेतों में टमाटर की खेती शुरू की थी। धीरे-धीरे इसका रकबा बढ़ता चला गया और गांव के बाकी किसान भी टमाटर की खेती की ओर आकर्षित होते चले गये। आज पूरे अमरोहा जनपद में 1200 हैक्टेयर में टमाटर की खेती की जाती है जिसका 1000 हैक्टेयर का हिस्सा अकेले इसी क्षेत्र का है। गौरतलब है की वर्तमान में जहाँ किसान खेती छोड़ शहर में रोजगार के लिए पलायन करने को मजबूर हैं वही सलारपुर खालसा के किसान अपने साथ-साथ आसपास के 30 गांवों के लोगों को रोजगार प्रदान कर खेती की शक्ति की अनोखी मिसाल पेश करने में लगे हुए है।
    यहां के दिहाड़ी मजदूर भी रोज़ाना 300-400 रू कमा लेते है। बात अगर टमाटर की खेती के कुल कारोबार की करे तो खेती के इस कारोबार के आगे दिल्ली, मुम्बई में जमे अच्छे-अच्छे बिजनेस का टर्नओवर  फ़ीका नजर आता है। 3500-4000 की आबादी वाले इस गांव के किसान मात्र 5 महीनें टमाटर की खेती कर 60 करोड़ से ज्यादा का कारोबार कर लेते है। किसानों को प्रोत्साहन देने के लिए कई खाद, कीटनाशक कम्पनियों ने यहाँ के किसानों को राजस्थान एवं बैंगलुरू भेजकर प्रशिक्षण भी दिलवाया है। स्थानीय किसानों का दावा है कि देश का ऐसा कोई कोना नहीं है जहां इस गांव का टमाटर नहीं पहुंचता।
    नजदीकी रेलवे स्टेशन-  अमरोहा
    यह भी पढ़े>>  

    Sunday, 11 September 2016

    भारत की 15 रहस्यमयी गुफाओं का रहस्य जानिए...

    By: Secret On: 14:46
  • Share The Gag


    • भारत की 15 रहस्यमयी गुफाओं का रहस्य जानिए...

      अभगच्छत राजेन्द्र देविकां विश्रुताम्।
      प्रसूर्तित्र विप्राणां श्रूयते भरतर्षभ॥- महाभारत


      अर्थात्- सप्तचरुतीर्थ के पास वितस्ता नदी की शाखा देविका नदी के तट पर मनुष्य जाति की उत्पत्ति हुई। प्रमाण यही बताते हैं कि आदि सृष्टि की उत्पत्ति भारत के उत्तराखंड अर्थात इस ब्रह्मावर्त क्षेत्र में ही हुई।

      प्रारंभिक मानव गुफा में रहता था? उल्लेखनीय है कि वैज्ञानिकों ने दुनिया की सबसे प्राचीन पहाड़ी अरावली और सतपुड़ा की पहाड़ियों को माना है। यूनान के लोगों की धारणा थी कि उनके देवता गुफाओं में ही रहते थे। इसी प्रकार रोम के लोगों का मानना था कि गुफाओं में परियां तथा जादू-टोना करने वाले लोग रहते हैं। फारस के लोग मानते थे कि गुफाओं में देवताओं का वास होता है। आज का विज्ञान कहता है कि गुफाओं में एलियंस रहते थे। गुफाओं का इतिहास सदियों पुराना है। पाषाण युग में मानव गुफाओं में रहता था।

      आमतौर पर पहाड़ों को खोदकर बनाई गई जगह को गुफा कहते हैं, लेकिन गुफाएं केवल पहाड़ों पर ही निर्मित नहीं होती हैं यह जमीन के भीतर भी बनाई जातीं और प्राकृतिक रूप से भी बनती हैं। प्राकृतिक रूप से जमीन के नीचे बहने वाली पानी की धारा से बनती हैं। ज्वालामुखी की वजह से भी गुफाओं का निर्माण होता है। दुनिया में अनेक छोटी-बड़ी गुफाएं हैं, जो किसी अजूबे से कम नहीं हैं।

      अफगानिस्तान के बामियान से भीमबैठका तक और अमरनाथ से महाबलीपुरम तक भारत में हजारों गुफाएं हैं। हिमालय में तो अनगिनत प्राकृतिक गुफाएं हैं जिनके बारे में कहा जाता है कि वहां साधु-संत ध्यान और तपस्या करते हैं। आओ जानते हैं भारत की 15 रहस्यमयी गुफाओं के बारे में, जो अब रखरखाव के अभाव में अपने अस्तित्व संकट से जूझ रही हैं। भारत सरकार को चाहिए कि वह इस पर ध्यान दें।



      भीमबैठका : भीम यहां बैठते थे, विश्राम करते थे इसलिए इन गुफाओं को भीमबैठका कहा जाता है। भीमबैठका रातापानी अभयारण्य में स्थित है। यह भोपाल से 40 किलोमीटर दक्षिण में है। यहां से आगे सतपुडा की पहाड़ियां शुरू हो जाती हैं। भीमबेटका (भीमबैठका) भारत के मध्यप्रदेश प्रांत के रायसेन जिले में स्थित एक पुरापाषाणिक आवासीय पुरास्थल है। यह आदिमानव द्वारा बनाए गए शैलचित्रों और शैलाश्रयों के लिए प्रसिद्ध है। इन चित्रों को पुरापाषाण काल से मध्यपाषाण काल के समय का माना जाता है।
      नर्मदा घाटी को विश्व की सबसे प्राचीन घाटियों में गिना जाता है। यहां भीमबैठका, भेड़ाघाट, नेमावर, हरदा, ओंकारेश्वर, महेश्वर, होशंगाबाद, बावनगजा, अंगारेश्वर, शूलपाणी आदि नर्मदा तट के प्राचीन स्थान हैं। नर्मदा घाटी में डायनासोर के अंडे भी पाए गए हैं और यहां कई विशालकाय प्रजातियों के कंकाल भी मिले हैं। छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में तो कई गुफाएं हैं। एक गुफा में 10 हजार वर्ष पुराने शैलचित्र मिले हैं।

      यहां मिले शैलचित्रों में स्पष्ट रूप से एक उड़नतश्तरी बनी हुई है। साथ ही इस तश्तरी से निकलने वाले एलियंस का चित्र भी स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है, जो आम मानव को एक अजीब छड़ी द्वारा निर्देश दे रहा है। इस एलियंस ने अपने सिर पर हेलमेट जैसा भी कुछ पहन रखा है जिस पर कुछ एंटीना लगे हैं। वैज्ञानिक कहते हैं कि 10 हजार वर्ष पूर्व बनाए गए ये चित्र स्पष्ट करते हैं कि यहां एलियन आए थे, जो तकनीकी मामले में हमसे कम से कम 10 हजार वर्ष आगे हैं ही।

      भीमबेटका क्षेत्र को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, भोपाल मंडल ने अगस्त 1990 में राष्ट्रीय महत्त्व का स्थल घोषित किया। इसके बाद जुलाई 2003 में यूनेस्को ने इसे विश्व धरोहर स्थल घोषित किया है। ये भारत में मानव जीवन के प्राचीनतम चिह्न हैं। इनकी खोज वर्ष 1957-1958 में डॉक्टर विष्णु श्रीधर वाकणकर द्वारा की गई थी।

      यहां 750 शैलाश्रय हैं जिनमें 500 शैलाश्रय चित्रों द्वारा सज्जित हैं। पूर्व पाषाणकाल से मध्य ऐतिहासिक काल तक यह स्थान मानव गतिविधियों का केंद्र रहा।

      इन चित्रों में शिकार, नाच-गाना, घोड़े व हाथी की सवारी, लड़ते हुए जानवर, श्रृंगार, मुखौटे और घरेलू जीवन का बड़ा ही शानदार चित्रण किया गया है। इसके अलावा वन में रहने वाले बाघ, शेर से लेकर जंगली सूअर, भैंसा, हाथी, हिरण, घोड़ा, कुत्ता, बंदर, छिपकली व बिच्छू तक चित्रित हैं। चित्रों में प्रयोग किए गए खनिज रंगों में मुख्य रूप से गेंरुआ, लाल और सफेद हैं और कहीं-कहीं पीला और हरा रंग भी प्रयोग हुआ है।

      कहीं-कहीं तो चित्र बहुत सघन हैं जिनसे पता चलता है कि ये अलग-अलग समय में अलग-अलग लोगों ने बनाए होंगे। इनके काल की गणना कार्बन डेटिंग सिस्टम से की गई है जिनमें अलग-अलग स्थानों पर पूर्व पाषाणकाल से लेकर मध्यकाल तक की चित्रकारी मिलती है। इसकी कार्बन डेटिंग से पता चला है कि इनमें से कुछ चित्र तो लगभग 25 हजार वर्ष पुराने हैं।

      ये चित्र गुफाओं की दीवारों व छतों पर बनाए गए हैं जिससे मौसम का प्रभाव कम से कम हो। अधिकतर चित्र सफेद व लाल रंग से ही बनाए गए हैं लेकिन मध्यकाल के कुछ चित्र हरे व पीले रंगों से भी निर्मित हैं। प्रयुक्त रंगों में कुछ पदार्थों जैसे मैंगनीज, हैमेटाइट, नरम लाल पत्थर व लकड़ी के कोयले का मिश्रण होता था। इसमें जानवरों की चर्बी व पत्तियों का अर्क भी मिला दिया जाता था। आज भी ये रंग वैसे के वैसे ही हैं।



      अजंता-एलोरा की गुफाएं : यह स्थान महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले में स्थित हैं। इसमें अजंता में 29 बौद्ध गुफाएं और कई हिन्दू मंदिर मौजूद हैं। ये गुफाएं अपनी चित्रकारी, गुफाएं और अद्भुत मंदिरों के लिए प्रसिद्ध हैं। ये गुफाएं कई हजार वर्ष पुरानी हैं, लेकिन बौद्ध गुफाएं होने के कारण इनको 2 सदी ईसा पूर्व से 7 शताब्दी ईसा तक का माना जाता रहा है, लेकिन अब नए शोध ने यह धारणा बदल दी है।
      एलोरा की गुफाएं सबसे प्राचीन मानी जाती हैं। इसमें पत्थर को काटकर बनाई गईं 34 गुफाएं हैं और एक रहस्यमयी प्राचीन हिन्दू मंदिर है जिसके बारे में कहा जाता है कि इसे कोई मानव नहीं बना सकता और इसे आज की आधुनिक तकनीक से भी नहीं बनाया जा सकता। इस विशालकाय अद्भुत मंदिर को सभी देखने आते हैं। इसका नाम कैलाश मंदिर है। आर्कियोलॉजिस्टों के अनुसार इसे कम से कम 4 हजार वर्ष पूर्व बनाया गया था। 40 लाख टन की चट्टानों से बनाए गए इस मंदिर को किस तकनीक से बनाया गया होगा? यह आज की आधुनिक इंजीनियरिंग के बस की बात नहीं है।

      माना जाता है कि एलोरा की गुफाओं के अंदर नीचे एक सीक्रेट शहर है। आर्कियोलॉजिकल और जियोलॉजिस्ट की रिसर्च से यह पता चला कि ये कोई सामान्य गुफाएं नहीं हैं। इन गुफाओं को कोई आम इंसान या आज की आधुनिक तकनीक नहीं बना सकती। यहां एक ऐसी सुरंग है, जो इसे अंडरग्राउंड शहर में ले जाती है।


       एलीफेंटा की गुफा : मुंबई के गेट वे ऑफ इंडिया से लगभग 12 किलोमीटर दूर स्थित एक स्थल है, जो एलीफेंटा नाम से विश्वविख्यात है। यहां पहाड़ को काटकर बनाई गई इन सुंदर और रहस्यमय गुफाओं को किसने बनाया होगा? माना जाता है कि इसे 7वीं व 8वीं शताब्दी में राष्‍ट्रकूट राजाओं द्वारा खोजा गया था। 'खोजा गया था' का मतलब यह कि यह उन्होंने बनाया नहीं था। कई हजार वर्षों पुरानी इन गुफाओं की संख्या 7 हैं जिनमें से सबसे महत्‍वपूर्ण है महेश मूर्ति गुफा। एलीफेंटा को घारापुरी के पुराने नाम से जाना जाता है, जो कोंकणी मौर्य की द्वीप राजधानी थी।

      इसका ऐतिहासिक नाम घारापुरी है। यह नाम मूल नाम अग्रहारपुरी से निकला हुआ है। एलीफेंटा नाम पुर्तगालियों ने दिया है। यहां हिन्दू धर्म के अनेक देवी-देवताओं की मूर्तियां हैं। यहां भगवान शंकर की 9 बड़ी-बड़ी मूर्तियां हैं, जो शंकरजी के विभिन्न रूपों तथा क्रियाओं को दिखाती हैं। इनमें शिव की त्रिमूर्ति प्रतिमा सबसे आकर्षक है। यह पाषाण-शिल्पित मंदिर समूह लगभग 6,000 वर्गफीट के क्षेत्र में फैला है।

      गुफा के मुख्‍य हिस्‍से में पोर्टिको के अलावा 3 ओर से खुले सिरे हैं और इसके पिछली ओर 27 मीटर का चौकोर स्‍थान है और इसे 6 खंभों की कतार से सहारा दिया जाता है। 'द्वारपाल' की विशाल मूर्तियां अत्‍यंत प्रभावशाली हैं। इस गुफा में शिल्‍पकला के कक्षों में अर्धनारीश्‍वर, कल्‍याण सुंदर शिव, रावण द्वारा कैलाश पर्वत को ले जाने, अंधकारी मूर्ति और नटराज शिव की उल्‍लेखनीय छवियां दिखाई गई हैं। इस गुफा संकुल को यूनेस्‍को द्वारा विश्‍व विरासत का दर्जा दिया गया है।


       बाघ की गुफाएं : बाघ की गुफाएं प्राचीन भारत के स्वर्णिम युग की अद्वितीय देन हैं। मध्यप्रदेश के प्राचीन स्थल धार जिले में स्थित बाघ की गुफाओं को देखने के लिए देश-विदेश से पर्यटक आते हैं। धार, इंदौर शहर से 60 किलोमीटर की दूरी पर ही है। बाघिनी नामक छोटी-सी नदी के बाएं तट पर और विंध्य पर्वत के दक्षिण ढलान पर स्थित इन गुफाओं का इतिहास भी रहस्यों से भरा है।

      बाघ-कुक्षी मार्ग से थोड़ा हटकर बाघ की गुफाएं बाघ ग्राम से 5 मील दूर हैं। यह स्थल उस विशाल प्राचीन मार्ग पर स्थित है, जो उत्तर से अजंता होकर सुदूर दक्षिण तक जाता है।

      इसमें कुल 9 गुफाएं हैं जिनमें से 1, 7, 8 और 9वीं गुफा नष्टप्राय है तथा गुफा संख्या 2 'पाण्डव गुफा' के नाम से प्रचलित है जबकि तीसरी गुफा 'हाथीखाना' और चौथी 'रंगमहल' के नाम से जानी जाती है। इन गुफा का निर्माण संभवतः 5वी-6वीं शताब्दी ई. में हुआ होगा।

      माना जाता है कि इन गुफाओं का निर्माण भगवान बुद्ध की प्रतिदिन होने वाली दिव्यवार्ता को प्रतिपादित करने हेतु निर्मित और चित्रित किया गया था। बाघ की गुफा संख्या 1 से 9 तक में कक्ष, स्तंभ, लंबे बरामदे, कोठरियां, शैलकृत स्तूप, बुद्ध प्रतिमा, बोधिसत्व, अवलोकितेंर मैत्रेय, नदी, देवियों आदि का अंकन है। बाघ की गुफा संख्या 2, 3, 4, 5, एवं 7 में भित्तिचित्र हैं, गुफा में 6 दृश्यों का अंकन है। बाघ गुफाओं के चित्रों की शैली अजंता के समान है तथा ये अजंता के समकालीन हैं।


       बहाकाली और कन्हेरी की गुफाएं : मुंबई में कई गुफाएं हैं। उनमें से एलीफेंटा, महाकाली और कन्हेरी की गुफाएं प्रसि‍द्ध हैं। महाकाली की गुफा मुंबई के अंधेरी वेस्ट में बौद्धमठ के पास है, जबकि कन्हेरी की गुफा मुंबई के पश्चिम में बसे बोरीवली क्षेत्र में स्थित है।

      महाकाली की गुफाएं 19 गुफाओं को मिलाकर बनाई गई हैं। माना जाता है कि लगभग 1 शताब्दी से 6वीं के शताब्दी के मध्य इसका निर्माण हुआ था। महाकाली गुफा के बीच में एक शिव मंदिर है। यहां का शिवलिंग 8 फिट ऊंचा है। महाकाली गुफा में 9वीं गुफा सबसे बड़ी है, इस गुफा में बुद्ध की पौराणिक कथा और उनके 7 चित्र बने हुए हैं।

      कन्हेरी की गुफा की लंबाई 86 फुट, चौड़ाई 40 फुट और ऊंचाई 50 फुट है। इसमें 34 स्तंभ लगाए गए हैं। कन्हेरी की गणना पश्चिमी भारत के प्रधान बौद्ध दरीमंदिरों में की जाती है।

       बोरा गुफाएं : दक्षिणी राज्य आंध्रप्रदेश में ऐसी कई गुफाएं हैं। इनमें बेलम व बोरा गुफाएं प्रमुख हैं। बोरा गुफाएं विशाखापट्टनम से 90 किलोमीटर की दूरी पर हैं। 10 लाख साल पुरानी ये गुफाएं समुद्र तल से 1400 फुट ऊंचाई पर स्थित हैं। भू-वैज्ञानिकों के शोध कहते हैं कि लाइमस्टोन की ये स्टैलक्टाइट व स्टैलग्माइट गुफाएं गोस्थनी नदी के प्रवाह का परिणाम हैं।

      गुफाएं अंदर से काफी विराट हैं। उनके भीतर घूमना एक अद्भुत अनुभव है। अंदर घुसकर वह एक अलग ही दुनिया नजर आती है। कहीं आप रेंगते हुए मानो किसी सुरंग में घुस रहे होते हैं तो कहीं अचानक आप विशालकाय बीसियों फुट ऊंचे हॉल में आ खड़े होते हैं।

      देश की प्रमुख गुफाओं में से एक है बोरा की गुफाएं। बोरा गुफाएं छत्तीसगढ़ में कोटमसर गुफाओं जैसी गर्म और दमघोंटू नहीं हैं। इसकी वजह इनकी भीतर से विशालता भी है। विशाखापट्टनम में रुककर भी दिन में गुफाएं देखी जा सकती हैं।

      बेलम गुफाएं : आंध्र में ही कुरनूल से 106 किलोमीटर दूर बेलम गुफाएं स्थित हैं। मेघालय की गुफाओं के बाद ये भारतीय उपमहाद्वीप की दूसरी सबसे बड़ी प्राकृतिक गुफाएं हैं। इन्हें मूल रूप से तो 1854 में एचबी फुटे ने खोजा था लेकिन दुनिया के सामने 1982 में यूरोपीय गुफा विज्ञानियों की एक टीम ने इन्हें मौजूदा स्वरूप में पेश किया।

      पहाड़ियों में स्थित बोरा गुफाओं के विपरीत बेलम गुफाएं एक बड़े से सपाट खेत के नीचे स्थित हैं। जमीन से गुफाओं तक 3 कुएं जैसे छेद हैं। इन्हीं में से बीच का छेद गुफा के प्रवेश द्वार के रूप में इस्तेमाल होता है। लगभग 20 मीटर तक सीधे नीचे उतरने के बाद गुफा जमीन के नीचे फैल जाती हैं। इनकी लंबाई 3,229 मीटर है।


       कुटुमसर की गुफाएं : कुटुमसर की गुफाओं में रहते थे आदि मानव। एक अध्ययन से पता चला है कि करोड़ों वर्ष पूर्व प्रागैतिहासिक काल में बस्तर की कुटुमसर की गुफाओं में मनुष्य रहा करते थे। फिजिकल रिसर्च लैबोरेटरी अहमदाबाद, इंस्टीट्यूट ऑफ पेलको बॉटनी लखनऊ तथा भूगर्भ अध्ययन शाला लखनऊ ने यह जानकारी दी है।

      विश्वप्रसिद्ध बस्तर की कुटुमसर की गुफाएं कई रहस्यों को अभी भी अपने में समेटे हुए है जिनका भूगर्भ शास्त्रियों द्वारा लगातार अध्ययन किया जा रहा है। भूगर्भशास्त्रियों का कहना है कि करोड़ों वर्ष पूर्व क्षेत्र में कुटुमसर की गुफाऐं स्थित हैं वह क्षेत्र पूरा पानी में डूबा हुआ था। गुफाओं का निर्माण प्राकृतिक परिवर्तनों साथ साथ पानी के बहाव के कारण हुआ।

      कुटुमसर की गुफाएं जमीन से 55 फुट नीचे हैं। इनकी लंबाई 330 मीटर है। इस गुफा के भीतर कई पूर्ण विकसित कक्ष हैं जो 20 से 70 मीटर तक चौड़े हैं। फिजिकल रिसर्च लेबोरेटरी अहमदाबाद के शोधकर्त्ताओं ने इन्हीं कक्षों के अध्ययन के बाद निष्कर्ष पर पहुंचे है कि करोड़ों वर्ष पूर्व यहां के आस पास के लोग इन गुफाओं में रहा करते थे। संभवत: यह प्रागैतिहासिक काल था।

      चूना पत्थर से बनी कुटुमसर की गुफाओं के आंतरिक और बाह्य रचना के अध्ययन के उपरांत भूगर्भशास्त्री कई निष्कर्षों पर पहुंचे हैं। उदाहरण के लिए चूना पत्थर के रिसाव, कार्बनडाईक्साइड तथा पानी की रासायनिक क्रिया से सतह से लेकर छत तक अद्भूत प्राकृतिक संरचनाएँ गुफा के अंदर बन चुकी हैं। उल्लेखनीय है कि रक्षामंत्रालय की एक उच्चस्तरीय समिति ने विश्वप्रसिद्ध इस गुफा की झाँकियों को 26 जनवरी के अवसर पर राजपथ पर प्रस्तुत करने की अनुमति भी प्रदान की।


       उंदावली, विजयवाड़ा की गुफा : विजयवाड़ा आंध्र प्रदेश प्रान्त का एक शहर है।  विजयवाड़ा आंध्र प्रदेश के पूर्व-मध्य में कृष्णा नदी के तट पर स्थित है। दो हज़ार वर्ष पुराना यह शहर बैजवाड़ा के नाम से भी जाना जाता है। यह नाम देवी कनकदुर्गा के नाम पर है, जिन्हें स्थानीय लोग विजया कहते हैं। यहाँ की गुफाओं में उंद्रावल्ली की प्रमुख गुफा है, जो सातवीं सदी में बनाई गई थी। शयन करते विष्णु की एक शिला से निर्मित मूर्ति यहाँ की कला का श्रेष्ठ नमूना है। विजयवाड़ा के दक्षिण में 12 किलोमीटर दूर मंगलगिरि की पहाड़ी पर विष्णु के अवतार भगवान नरसिंह का विख्यात मंदिर है।

      जम्मू कश्मीर की गुफाएं : कश्मीर में तो अमरनाथ और वैष्णोदेवी की गुफा में हिन्दुजन दर्शन के लिए जाते ही हैं लेकिन कश्मीर में ऐसी चार गुफाएं हैं, जिनके बारे में कहा जा रहा है कि उनका दूसरा सिरा 4000 हजार किलोमीटर दूर रूस तक जाता है। इतना ही नहीं, इन गुफाओं के बारे में और भी ऐसे रहस्य हैं, जिनकी सच्चाई सदियों बाद भी सामने नहीं आईं।

      पीर पंजाल की गुफा : जम्मू-कश्मीर के पीर पंजाल में एक गुफा है जहां एक शिवलिंग रखा है। इसका नाम पीर पंजाल केव रखा गया है।

      शिव खाड़ी : जम्मू में ही शिव खाड़ी नामक एक गुफा है।


       डुंगेश्वरी गुफा, बिहार : सुजात नामक स्थान पर डुंगेश्वरी गुहा मंदिर को महाकाल गुफाओं के नाम से भी जाना जाता है जो बोधगया (बिहार) के उत्तर-पूर्व में 12 किमी की दूरी पर स्थित है। यहां तीन पवित्र बुद्ध गुफाएं हैं। इन गुफाओं में भगवान बुद्ध ने ध्यान लगाया था। भगवान बुद्ध ने बोधगया आने के पूर्व छह वर्षों तक कठोर निग्रह के साथ इन गुफाओं में तपस्या की थी। यह माना जाता है कि भगवान बुद्ध को यहीं से मध्यम मार्ग का ज्ञान प्राप्त हुआ था। दो छोटे मंदिर इस घटना की याद मे यहां बनाए गए हैं।

      मूलत: यह हिन्दू धर्म से जुड़ी गुफाएं हैं जो हिंदू देवी डुंगेश्वरी नाम से विख्‍यात है।


       अर्जन गुफा : कुल्लू से 5 किलोमीटर की दूरी पर जगतसुख स्थान है। जगतसुख कुल्लू के राजा जगत सिंह की राजधानी थी। इस स्थान पर बिम्बकेश्वर और  गायत्री देवी के मंदिर विशेष आकर्षक हैं। इसके नजदीक हमटा नाम स्थान है। यहां प्रसिद्ध अर्जुन गुफा है।

      इस गुफा में अर्जुन की विशाल प्रतिमा है। यहां से 2 किलामीटर दूर त्रिवेणी नामक स्थान है,जहां व्यास गंगा, धोमाया गंगा और सोमाया गंगा का संगम है। इससे 1 किलोमीटर की दूरी पर गर्म पानी का चश्मा कलात कुंड है और कपिल मुनि का आश्रम भी यहां है। यहीं पर टोबा नामक प्रसिद्ध गुफा मठ भी है।


       पीतलखोरा की गुफा : पीतलखोरा की गुफा महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले में स्थित है। यहां पत्थर की चट्टानों को काटकर कुल 13 गुफाएं बनाई गई है। गुफा संख्या 3 चैत्य गृह और गुफा संख्या 4 विहार हैं। यहां स्थित 37 अठपहलू स्तंभों में से 12 बचे हैं, तथा शेष ये स्तूप विनष्ट हो गए हैं।  इसका निर्माण सम्भवतः द्वितीय शताब्दी ईसा पूर्व में होने का अनुमान है।

       वाणावर (बराबर) : प्राचीन मगध साम्राज्‍य के गौरवमयी विरासत प्रतीक स्‍वरूप है वाणावर जिला। वाणावर पहाड़ी समूह में प्रमुख रूप से वाणावर एवं नागार्जुनी पहाड़ियां सम्मिलित है। वैसे तो इस पहाड़ी समूह में मूर्त्ति शिल्‍प, भित्ति चित्र एवं ललित कला के नायाब नमूने मिलते हैं, पर उस पहाड़ी समूह का सर्वप्रमुख आकर्षण यहां की गुफाएं है। माना जाता है कि ग्रेनाइट की शैलों में आज से लगभग ढ़ाई हजार वर्ष पहले ये गुफाएं बनाई गई थी।

      इन गुफाओं को भारतीय वास्‍तुकला की उन गरिमामयी परम्‍परा में स्थान प्राप्त है, जिसमें उदयगिरि, खंडगिरि, अजंता एवं एलोरा की गुफाओं को रखा गया है। इन गुफाओं में उत्‍कीर्ण अभिलेखों से पता चलता है कि मौर्य शासक अशोक महान एवं उनके पोते दशरथ ने इन गुफाओं को अजीवक संप्रदाय के संतों को दान में दिया था।

      वाणावर पहाड़ी के उतुंग शिखर पर स्थित बाबा सिद्धेश्‍वर नाथ का मंदिर भी ऐतिहासिक है। ऐसा कहा जाता है कि महाभारत कालीन वाणासुर ने इसकी स्‍थापना की थी । वापी गुफा में अंकित एक अभिलेख से इस मंदिर के 7वीं-8वीं शताब्‍दी के होने का उल्‍लेख मिलता है।


       उदयगिरि की गुफाएं : उदयगिरि मध्यप्रदेश के विदिशा से वैसनगर होते हुए पहुंचा जा सकता है। नदी से यह पहाड़ी लगभग 1 मील की दूरी पर है। यह प्राचीन स्थल भिलसा से चार मील दूर बेतवा तथा बेश नदियों के बीच स्थित है।

      पहाड़ी के पूरब की तरफ पत्थरों को काटकर अद्भुत गुफाएं बनाई गई हैं। उदयगिरि को पहले नीचैगिरि के नाम से जाना जाता था। कालिदास ने भी इसे इसी नाम से संबोधित किया है। 10 वीं शताब्दी में जब विदिशा धार के परमारों के हाथ में आ गया, तो राजा भोज के पौत्र उदयादित्य ने अपने नाम से इस स्थान का नाम उदयगिरि रख दिया।

      उदयगिरि में कुल 20 गुफाएं हैं। इनमें से कुछ गुफाएं 4वीं-5वीं सदी से संबद्ध है। गुफा संख्या 1 तथा 20 को जैन गुफा माना जाता है। बाकी शिव गुफा, वराह गुफा, वैष्णव गुफा आदि गुफाओं के नाम से विख्‍यात है। इन गुफाओं का संवरक्षण करना जरूरी है।


       उदयगिरि और खंडगिरि गुफाएं : उदयगिरि और खंडगिरि ओडीशा में भुवनेश्वर के पास स्थित दो पहाड़ियां हैं। इन पहाड़ियों में आंशिक रूप से प्राकृतिक व आंशिक रूप से कृत्रिम गुफाएं हैं जो पुरातात्विक, ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्व की हैं। भुवनेश्वर से 8 किमी दूर स्थित इन दो पहाड़ियों का वातावरण काफी निर्मल है। उदयगिरि और खंडगिरि में कभी प्रसिद्ध जैन मठ हुआ करते थे। इन मठों को पहाड़ी की चोटी पर चट्टानों को काट कर बनाया गया था।

      इन्हीं मठों को आज गुफा के रूप में देख सकते हैं। ये मठ काफी प्रचीन थे और इसका निर्माण ईसा पूर्व दूसरी शताब्दी में किया गया था। इन में से कुछ गुफाओं में नक्काशी भी की गई है। यहां एक दो तल्ला गुफा भी है जिसे रानी गुंफा के नाम से जाना जाता है। इस गुफा को ढेरों नक्काशियों से सजाया गया है। यहां एक और बड़ी गुफा है, जिसे हाथी गुंफा के नाम से जाना जाता है। उदयगिरि में जहां 18 गुफाएं हैं, वहीं खंडगिरि में 15 गुफाएं हैं।

      खंडगिरि : पहली और दूसरी गुफाएं तातोवा गुम्फा 1 और 2 कहलाती हैं, जो प्रवेश स्थल पर रक्षकों और दो बैलों तथा सिंहों से सुसज्जित है। प्रवेश तोरण पर तोते की आकृतियां हैं। गुफा संख्या 3 अनंत गुफा कहलाती है, जहां स्त्रियों, हाथियों, खिलाड़ियों और पुष्प उठाए हंसों की मूर्तियां हैं। गुफा संख्या 4 तेन्तुली गुम्फा है। गुफा संख्या 5 खंडगिरि गुम्फा दो मंजिली है, जो सामान्य तरीके से काटी गई हैं। गुफा संख्या 12, 13 और 14 के कोई नाम नहीं है। गुफा संख्या 6 से गुफा संख्या 11 के नाम हैं- ध्यान गुम्फा, नयामुनि गुम्फा, बाराभुजा गुम्फा, त्रिशूल गुम्फा, अम्बिका गुम्फा और ललतेंदुकेसरी गुम्फा। गुफा सख्या 11 की पिछली दीवार पर जैन तीर्थंकरों, महावीर और पार्श्वनाथ की नक्काशी वाली उभरी हुई मूर्तियां हैं। गुफा संख्या 14 एक साधारण कक्ष है, जिसे एकादशी गुम्फा के नाम से जाना जाता है।

      उदयगिरी की गुफा : ओडीशा की राजधानी भुवनेश्वर की उदयगिरी पहाड़ियों में स्थित यह गुफा भी विश्व प्रसिद्ध है। इस गुफा के साथ ही यहां पर कई रहस्यमयी और अद्भुत गुफाएं भी हैं। इन्हीं में से एक है टाइगर केव। दरअसल इस गुफा का प्रवेश द्वार शेर के मुख की तरह बना हुआ है, इसी वजह से इसे टाइगर केव या शेर गुफा कहा जाता है। उदयगिरी की पहाड़ियों को सूर्योदय पर्वत भी माना जाता है और यहां से सूर्योदय का नजारा बेहद खास होता है।

      बादामी गुफा : गुफा के अन्दर कई मंदिर होने से आकर्षक और भव्य दिखती है यह गुफा। कर्नाटक में स्थित बादामी गुफा के अन्दर कई मंदिर हैं। इतिहासकारों के अनुसार बादामी गुफा पांचवीं सदी की है।

      Sunday, 28 August 2016

      सोमनाथ मंदिर की कहानी : 50 हजार हिन्दुओं को उतारा गया मौत के घाट

      By: Secret On: 11:25
    • Share The Gag

    • सोमनाथ मंदिर की कहानी : 50 हजार हिन्दुओं को उतारा गया मौत के घाट:



      Somnath Temple Story: Fifty thousand Hindus landed killing In Hindi : इतिहास हमेशा वर्तमान पर हमले करता है और वर्तमान को बचाने के लिए बलिदान दिया जाता है तब यही वर्तमान फिर इतिहास बनता है.

      हिन्दुओ का इतिहास काफी संघर्षपूर्ण रहा है. 


      सोमनाथ मंदिर के लिए चित्र परिणाम

      Somnath Mandir Ka Itihas In Hindi

         >>असीरगढ़ का किला – श्रीकृष्ण के श्राप के कारण यहां आज भी भटकते हैं अश्वत्थामा, किले के शिवमंदिर में प्रतिदिन करते है पूजा
      सोमनाथ मंदिर की गिनती 12 ज्योतिर्लिंगों में सर्वप्रथम ज्योतिर्लिंग के रूप में होती है । कहते हैं कि इसका निर्माण स्वयं चंद्रदेव सोमराज ने किया था, इसका उल्लेख ऋग्वेद में मिलता है । इस सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण और विनाश का इतिहास देखिये ...

       यह भी पढ़े >>हजारों वर्षों से जीवित है ये आठ महामानव
      एक समय था जब हिन्दू अपने देश में शांतिपूर्वक रहते थे.  इस देश को सोने की चिड़िया बोला जाता था.

      तभी कुछ इंसानियत के दुश्मन देश में आते हैं और इस देश की शांति भंग हो जाती है. यहाँ लूट होती है. महिलाओं की इज्जत उतारी जाती हैं. बच्चों का क़त्ल होता है. हिन्दुओं के धार्मिक स्थान को तोड़ा और लूटा जाता है.

        


      इस सोमनाथ मंदिर को लूटने के लिए महमूद गजनवी अपनी विशाल सेना लेकर आया था.

      तो आज हम आपको बताने वाले एक ऐसी कहानी, जो हिदुओं के लिए गर्व की बात है. यह कहानी है सोमनाथ मंदिर को बचाने के लिए बलिदान की, यह कहानी है अमर शहीदों के बलिदान की.

      तो आइये पढ़ते हैं सोमनाथ मंदिर को बचाने की पूरी कहानी

      सोमनाथ मंदिर को बचाने का पहला इतिहास क्या बोलता है –

       सरन प्रकाशन मंदिर मेरठ से प्रकाशित ‘‘भारत वर्ष का इतिहास’’ – ‘‘मंदिर की सेवा के लिए 10 हजार गांव लगे थे. मंदिर में 100 पुजारी, 500 नर्तकियां तथा 200 गायक दर्शकों को भगवान के गीत सुनाया करते थे. मंदिर की अपार सम्पत्ति से ललचाकर महमूद अजमेर के रास्ते सोमनाथ के द्वार पर जा पहुंचा. राजपूतों ने मंदिर की रक्षा के लिए घमासान युद्ध किया, लगभग 50 हजार हिंदू मारे गए.

      सोमनाथ मंदिर को बचाने का दूसरा इतिहास क्या कहता है –

      सोमनाथ मंदिर की रक्षा के प्रयास में कोई 50 हजार हिंदू मंदिर के द्वार पर मारे गए और सोमनाथ मंदिर तोड़कर महमूद ने कोई 2 करोड़ दीनार की सम्पत्ति लूट ली.’’ (पृ0, 261-262)

      सोमनाथ मंदिर को बचाने का तीसरा इतिहास की पढ़ लें –
          >> रहस्यमयी ‘चोरों की बावड़ी’- क्या इसमें दफन है बेशकीमती खजाना

      डॉ. सुरेन्द्र कुमार शर्मा ‘अज्ञात’ जी की पुस्तक ‘‘क्या बालू की भीत पर खड़ा है हिंदू धर्म ?’’

      उसके पेज न 203 पर सोमनाथ मंदिर के विषय में लिखा है, जब महमूद की सेना ने नरसंहार शुरू किया, तब हिंदुओं का एक समूह दौड़ता हुआ मंदिर की मूर्ति के सामने धरती पर लेट कर उससे विजय के लिए प्रार्थना करने लगा. हिंदुओं के ऐसे दल के दल मंदिर में प्रवेश करते, जिनके हाथ गरदन के पास जुड़े होते, जो रो रहे होते और बड़े भावावेश पूर्ण ढंग से सोमनाथ की मूर्ति के आगे गिड़गिड़ा कर प्रार्थनाएं कर रहे होते. फिर वे बाहर आते, जहां उन्हें कत्ल कर दिया जाता. यह क्रम तब तक चलता रहा जब तक कि हर हिंदू कत्ल नहीं हो गया. (देखेंः सर एच.एच. इलियट और जान डाउसन कृत ‘द हिस्ट्री आफ इंडिया एज टोल्ड बाई इट्स ओन हिस्टोरियनस’ पृ0 470)
      (यह सभी सबूत आप भी जांच सकते हैं)

      तो अब आखिर सच भी पढ़ लीजिये –


          

         >>.विशव की 10 रहस्यमयी जगह (10 Mysterious Places Around The World)
      महमूद गजनवी ने अपने 5000 लुटेरों के साथ इस मंदिर पर हमला किया, जमकर लूट-पाट की और मंदिर को ध्वस्त कर दिया । 50 हजार हिन्दू हाथ जोड़े प्रभु से विनती करते मारे गए । इसके बाद गुजरात के राजा भीम और मालवा के राजा भोज ने इसका पुनर्निर्माण कराया ।

      इसके बाद 1297 मे दिल्ली के सुल्तान ने और 1706 में अत्याचारी मुगल औरंगजेब ने सोमनाथ मंदिर को ध्वस्त कर दिया । हजारों हिन्दू मार डाले गए । इस समय जो भव्य मंदिर खड़ा है, उसे भारत के गृह मंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल ने बनवाया और पहली दिसंबर 1995 को भारत के राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा ने इसे राष्ट्र को समर्पित किया था ।

      लेकिन क्या वाकई वहां हिन्दुओं का कत्लेआम हुआ था?

      तो इसका जवाब हाँ है. इतिहास की सबसे अच्छे दस्तावेजों वाली पुस्तक पूर्ववर्ती मुस्लिम आक्रान्ताओं का भारतीयों द्वारा प्रतिरोध, नामक यह पुस्तक बताती है कि जब महमूद ने सोमनाथ के योधाओं को बचने के लिए मुस्लिम बनने की शर्त राखी तो सभी ने इस शर्त को नकार दिया था. अंत में जब लड़ाई हुई तो इस मंदिर की रक्षा में 50 हजार हिन्दुओं ने अपनी जान दी थी.
          >>क्‍या हैं यमराज द्वारा बताये मृत्यु रहस
      इस तरह के बलिदान की कहानी किसी भी इतिहास में नहीं मिलती है.

      सभी हिन्दू जानते थे कि अब हमको मरना ही है लेकिन वह अपना धर्म छोड़ने को तैयार नहीं हुए. यह लड़ने वाले योधा सभी जाति से थे. यह लोग सोमनाथ मंदिर को छुते थे और युद्ध के मैदान में चले जाते थे.

      बड़े दुःख की बात है कि आज भारत के लोग सोमनाथ मंदिर को बचाने के लिए किये हुए बलिदान को जानते तक नहीं है.

      बच्चों की किताबों से यह वीर इतिहास गायब है. तीनों इतिहास की किताबों में यह लिखा हुआ है कि कैसे हिन्दुओं ने सोमनाथ मंदिर को बचाने के लिए अपने प्राण भी दिए थे.

      मेने किसी धर्म या जाति की भावना को ठेस पहुँचने के लिए मधुशाला में यह पोस्ट नहीं लिखी बल्कि किसी धर्म या जाति को उसका अपना इतिहास याद दिलाने के लिए ये पोस्ट लिखी है और यही सच है।
       यह भी पढ़े:
      -हस्त रेखा ज्योतिष 15 बातें जो जीवन रेखा देखकर मालूम हो सकती हैं |
      -LIGO ने दूसरी बार गुरुत्वाकर्षण तरंग देखने मे सफ़लता पायी  
       -दुनिया के 10 अनसुलझे रहस्य | Duniya ke 10 ansuljhe rahasya
      -परग्रही जीवन की तलाश और उड़न तश्तरीयां
      - भगवान श्री राम की मृत्यु कैसे हुई | Bhagwan Shri Ram Ji Ki Mrityu Kaise Hui In Hindi